फरवरी में औसत से ज्यादा रहेगा तापमान! गेहूं को कई तरह से पहुंच सकता है नुकसान.. पैदावार में भी गिरावट
फरवरी 2022 में उच्च तापमान ने पंजाब और आसपास के राज्यों में गेहूं के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डाला था, जिससे उत्पादन लगभग 20 फीसदी घट गया था. साथ ही गेहूं में प्रोटीन की मात्रा में भी भारी कमी आई थी.
Punjab News: पंजाब के गेहूं किसानों को फरवरी महीने में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कहा है कि पंजाब में फरवरी महीने में न्यूनतम और अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, जिससे गेहूं की खड़ी फसल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. खासकर जब फसल अनाज भरने के चरण में होंगे. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है. किसानों को पैदावार में गिरावट आने का भय सता रहा है.
दरअसल, पंजाब देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है. गेहूं की फसल बेहतर विकास के लिए सर्दी के अनुकूल तापमान पर निर्भर करती है. रात के तापमान में वृद्धि से गेहूं की जैविक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं. वहीं दिन में अधिक तापमान से जलवाष्पीकरण (evapotranspiration) बढ़ जाएगा, जिससे सिंचाई की जरूरत भी ज्यादा होगी. IMD के अनुसार, उत्तर पश्चिमी भारत में फरवरी में दिन और रात के तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है, जबकि वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है. फरवरी महीना रबी फसलों, विशेष रूप से गेहूं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह फसल अब संवेदनशील विकास के चरण में है.
गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तापमान लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहता है, तो गेहूं की फसल समय से पहले पक सकती है. इससे दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, उनका वजन कम रह जाता है और कुल उत्पादन में गिरावट आने की आशंका रहती है. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के उपकुलपति एसएस गोसल ने भी इस बात से सहमति जताई और कहा कि गेहूं एक ठंडे मौसम की फसल है, जिसे अपने विकास के लिए कम तापमान की आवश्यकता होती है.
उत्पादन लगभग 20 फीसदी घट गया था
गोसल ने कहा कि फरवरी में उच्च तापमान गेहूं के लिए हानिकारक होते हैं, खासकर जब गेहूं का अनाज भरने का महत्वपूर्ण चरण हो. यदि तापमान अचानक बढ़ जाता है, तो गेहूं के दाने सिकुड़ जाते हैं, जिससे उत्पादन में कमी आती है. उन्होंने याद करते हुए कहा कि फरवरी 2022 में उच्च तापमान ने पंजाब और आसपास के राज्यों में गेहूं के उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव डाला था, जिससे उत्पादन लगभग 20 फीसदी घट गया था.
प्रोटीन की मात्रा कम हो गई थी
उन्होंने कहा कि गर्मी से प्रभावित गेहूं की रासायनिक जांच में यह भी पाया गया कि प्रोटीन की मात्रा लगभग 20 फीसदी कम हो गई थी, जो सीधे गेहूं की गुणवत्ता को प्रभावित करता है. गोसल ने भविष्य में गर्मी सहनशील गेहूं की किस्मों के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि वैश्विक तापमान में हो रहे बदलावों को ध्यान में रखते हुए कृषि पर प्रभाव को कम किया जा सके.
कम हो सकते हैं शीतलहर के दिन
IMD ने यह भी अनुमान जताया है कि फरवरी में उत्तर-पश्चिम भारत में शीतलहर (कोल्ड वेव) के दिन कम रहेंगे, जिससे फसलों पर गर्मी का असर और बढ़ सकता है. किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी फसलों की नियमित निगरानी करें और समय पर सिंचाई करके बढ़ते तापमान के प्रभाव को कम करें. IMD की सलाह के अनुसार, फूल आने और दाना भरने जैसे महत्वपूर्ण चरणों में हल्की लेकिन बार-बार सिंचाई करनी चाहिए, ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे. इसके अलावा, गर्मी के असर को कम करने के लिए मल्चिंग और जरूरत पड़ने पर पत्तियों पर स्प्रे करने की भी सिफारिश की गई है.