आंध्र प्रदेश में कम हुआ धान का रकबा, किसानों की दलहन के प्रति बढ़ी रुचि

आंध्र प्रदेश के किसानों ने रबी में पानी की कमी के कारण धान की बजाय दलहन फसल को प्राथमिकता दी. बेंगल ग्राम, ब्लैकग्राम और ग्रीनग्राम का क्षेत्र बढ़ा. धान केवल सिंचाई-सुरक्षित क्षेत्रों में बोया गया. मकई, ज्वार और तेलहन की भी खेती हुई. यह किसानों की पानी के अनुसार बदलती खेती की रणनीति दिखाता है.

नोएडा | Updated On: 27 Jan, 2026 | 07:15 PM

Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के किसानों ने रबी सीजन में पानी की कम उपलब्धता के कारण धान की जगह दलहन फसलों की खेती की है. नहरों और जलाशयों में सिंचाई पानी सीमित होने से पानी अधिक मांगने वाली धान की खेती कम हुई और किसानों ने कम समय में उगने वाली, कम पानी वाली दलहन फसलों को अपनाया. ताजा बुआई डेटा के मुताबिक, राज्य में कुल बुआई क्षेत्र 17.05 लाख हेक्टेयर है, जो सामान्य 20.69 लाख हेक्टेयर का लगभग 82 प्रतिशत है. हालांकि, इस सीजन में बुआई सामान्य से तेज रही और अब तक 111 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो सीमित पानी के बावजूद कृषि गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाती है.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रबी सीजन की खास बात यह है कि पानी की कमी के चलते किसानों ने धान की बजाय दलहन फसलों  को प्राथमिकता दी है. अब तक दलहन 6.39 लाख हेक्टेयर में बोई गई हैं, जो सामान्य क्षेत्रफल का 97 प्रतिशत है, जबकि धान केवल 5.79 लाख हेक्टेयर में बोया गया है, जो सामान्य क्षेत्र का 78 प्रतिशत है. यह पानी की समस्या का सामना कर रहे किसानों की बदलती प्राथमिकताओं को दिखाता है.

3.02 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुवाई

दलहन में सबसे ज्यादा क्षेत्र बेंगल ग्राम का है, जो 3.02 लाख हेक्टेयर में बोया गया है और यह अब पौध से फूल आने के चरण में है, जिससे समय पर बुआई और अच्छी फसल की स्थिति दिखती है. ब्लैकग्राम 2.34 लाख हेक्टेयर और ग्रीनग्राम 0.49 लाख हेक्टेयर में बोई गई हैं, जो इस सीजन में काफी बढ़ी हैं. दोनों फसलें कम समय में पकती हैं और कम पानी में अच्छी होती हैं. इसके अलावा, रेड ग्राम, हॉर्स ग्राम और अन्य छोटी दलहन फसलों ने कई जिलों में कुल दलहन क्षेत्र को बढ़ाया है.

ब्लैकग्राम की खेती कर रहे किसान

कृषि जिले कृष्णा के बेठावोलु के किसान सयान नारायण राव ने कहा कि पिछले कुछ सालों से रबी सीजन में पानी की कमी  के कारण वे ब्लैकग्राम की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि पहले वे रबी में धान की भी खेती करते थे, जो खरीफ की तुलना में ज्यादा लाभ देती थी. इसके अलावा, वे रबी में निवेश जुटाने के लिए कभी-कभी भिंडी की भी खेती करते हैं.

2.67 लाख हेक्टेयर में मक्का की बुवाई

धान की खेती अब ज्यादातर उन क्षेत्रों तक ही सीमित है, जहां सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित है. फिलहाल धान के पौधे नर्सरी में लगाए जा रहे हैं, जिस समय लगातार पानी की जरूरत होती है. नहरों के आखिरी हिस्सों और पानी देर से आने वाले क्षेत्रों में कई किसानों ने धान छोड़कर दलहन की खेती अपनाई, जो कम पानी में उगती है और जोखिम कम होता है. धान और दलहन के अलावा, रबी में ज्वार और मकई जैसी मोटे अनाज की खेती भी अच्छी रही. मकई 2.67 लाख हेक्टेयर में बोई गई है और अब अनाज भरने के चरण में है, जबकि ज्वार 0.67 लाख हेक्टेयर में बोया गया है और यह भी अनाज भरने के चरण में है.

तेलहन फसलें कम बोई गई हैं

तेलहन फसलें कम बोई गई हैं, कुल 0.63 लाख हेक्टेयर में. मूंगफली  0.48 लाख हेक्टेयर में बोई गई है और यह बीज अंकुर से लेकर पेग बनने के चरण में है, जबकि तिल पौध से फूल आने के चरण में है. तंबाकू, एक प्रमुख वाणिज्यिक फसल, अंकुर से फूल शुरू होने के चरण में है. धान की बजाय दलहन और अन्य फसलों का विस्तार यह दिखाता है कि किसान पानी की उपलब्धता के अनुसार अपनी खेती को बदल रहे हैं, जो राज्य की रबी कृषि में नए रुझान को दर्शाता है.

Published: 27 Jan, 2026 | 09:20 PM

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