जानलेवा सब्जियां! गंदे नाले से फसल सिंचाई का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, सरकार से मांगी रिपोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के निर्देश पर मामले की सुनवाई के दौरान राज्य प्रदूषण बोर्ड ने जबलपुर में दूषित पानी से सिंचाई की गई सब्जियों को सेहत के लिए खतरनाक बताया है. बीते साल मामले में 4 से ज्यादा लोगों को प्रशासन ने हिरासत में लिया था. अब अगली सुनवाई की तारीख पर कोर्ट मामले पर फैसला सुना सकता है.
मध्य प्रदेश के जबलपुर में नाले के गंदे पानी से सब्जी फसलों की सिंचाई करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. नवंबर महीने में किसान इंडिया ने इस मुद्दे पर रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी. तब स्थानीय पुलिस ने 4 लोगों को सब्जी फसलों की गंदे नाले के पानी से सिंचाई करते हुए हिरासत में भी लिया है. मामले में मध्य प्रदेश प्रदूषण बोर्ड ने इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है. जबकि, अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब कर ली है. मामले पर सुनवाई 2 फरवरी को होगी.
जबलपुर के एक लॉ स्टूडेंट ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर बताया था कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों को नाले के दूषित पानी का इस्तेमाल सब्जी की खेती में किया जा रहा है, जो कि लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है. चीफ जस्टिस ने पत्र की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करने के आदेश जारी किये थे. इसके बाद याचिका की सुनवाई शुरू हुई और हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल नाले की पानी की जांच कर रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किये थे.
मामले पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को होगी
इसके बाद मप्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल की ओर से हाईकोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि नाले के दूषित पानी से उगाई जाने वाली सब्जियां मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं. जबलपुर के लगभग सभी नालों के पानी में भारी मात्रा में सीवेज मिलता है. इससे यह बेहद दूषित हो गया है और इस पानी का इस्तेमाल सिंचाई के जरिए सब्जी फसलों में किया जा रहा है जो मानव जीवन के लिए बेहद खतरनाक है. पीठ ने सरकार को निर्देशित किया है कि प्रदूषण बोर्ड के सुझावों पर तत्काल अमल करते हुए रिपोर्ट पेश करे. याचिका पर अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित की गई है.
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नवंबर में 4 आरोपी पकड़े गए थे और मोटर पंप सीज जब्त हुए थे
किसान इंडिया ने 26 नवंबर को एक रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी, जिसमें प्रशासनिक कार्रवाई में 4 आरोपियों को पकड़ा गया था. उस वक्त जबलपुर के कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के निर्देशों पर जांच अभियान शुरू किया गया था और लगातार चौथे दिन पाटन बायपास स्थित ग्राम ओरिया में प्रशासन ने कुछ ग्रामीणों को पकड़ा था जो नाले के गंदे पानी से फसलों की सिंचाई कर रहे थे. पुलिस ने मौके से 4 मोटर पंप और पाइप भी जब्त किए थे.
नवंबर 2025 में गंदे नाले से सब्जी की फसल में पानी ले जाने वाले पाइप और पंप को पुलिस ने जब्त किया था.
सोनू भाईजान समेत 4 गिरफ्तार
नवंबर में प्रशासनिक टीम ने नाले के किनारे छापामार कार्रवाई करते हुए कोमल चड़ार, सुंदर पटैल, सोनू भाईजान और शैलू विश्वकर्मा को पकड़ा जो सीधे गंदे नाले में मोटर डालकर पानी खींचकर अपनी सब्जी की फसलों की सिंचाई कर रहे थे. प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई जनता के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकने के लिए की जा रही है. दूषित और जहरीले नाले के पानी से उगाई गई सब्जियों में भारी मात्रा में हानिकारक तत्व होते हैं, जो सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं.
पानी की सैंपल जांच में मात्रा से अधिक मिले खतरनाक तत्व
प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि ओमती नाला, मोती नाला , खूनी नाला, उदरना नाला सहित अन्य नालों से पानी का सैंपल लेकर जांच की थी. जांच के बाद इनके पानी में बीओडी, टोटल कोलीफार्म या फेकल कोलीफॉर्म की मात्रा निर्धारित मानक सीमा से अधिक है. नमूना रिपोर्ट और जांच से स्पष्ट है कि यह अनुपचारित सीवर का जल है जो पीने, नहाने या खेती सहित किसी भी अन्य उपयोग के लिए उपयुक्त नहीं है. रिपोर्ट में कहा गया था कि जबलपुर में 174 मेगा लीटर प्रतिदिन वेस्ट वॉटर नालों में जाता है, जिसमें से नगर निगम द्वारा 13 सीवेज प्लांट्स के जरिए केवल 58 मेगालीटर प्रतिदिन पानी का ट्रीटमेंट किया जाता है. यह पानी नर्मदा तथा हिरन नदी में मिलाया जाता है.