हरियाणा को 5700 करोड़ देगा विश्व बैंक, अब हर खेत तक पहुंचेगा सिंचाई का पानी

हरियाणा सरकार ने ‘जल संरक्षित हरियाणा’ कार्यक्रम के तहत 5,700 करोड़ रुपये की विश्व बैंक सहायता से नहरों की मरम्मत, 2 लाख एकड़ सिंचाई, जलभराव समाधान और माइक्रो-सिंचाई लागू करने की योजना बनाई है. परियोजना से राज्य जल आत्मनिर्भर बनेगा और किसानों की उपज व पानी की बचत सुनिश्चित होगी.

नोएडा | Updated On: 25 Jan, 2026 | 10:30 AM

Haryana News: हरियाणा में सिंचाई की किल्लत नहीं होगी. हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा. क्योंकि विश्व बैंक ने ‘जल संरक्षित हरियाणा प्रोजेक्ट’ के तहत हरियाणा को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए 5,700 करोड़ रुपये की तकनीकी और वित्तीय मदद मंजूर की है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि यह राशि 2026 से 2032 तक चरणबद्ध तरीके से खर्च की जाएगी. इसमें बड़े पैमाने पर नहरों की मरम्मत और जल प्रबंधन कार्य शामिल हैं. राज्य में कुल 1,570 नहरों में से अब तक 892 नहरें मरम्मत हो चुकी हैं और अगले पांच साल में शेष 678 नहरों को बहाल किया जाएगा. इसी तरह, 15,562 छोटी नहरों में से 4,487 नहरें पहले ही बहाल हो चुकी हैं और बाकी 1,961 नहरों को अगले पांच साल में सुधारने का लक्ष्य है.

विश्व बैंक 886 करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग देगा

न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा, 70,000 एकड़ कृषि भूमि पर माइक्रो-सिंचाई प्रणाली  लागू की जाएगी और 2,00,000 एकड़ जलभराव वाले इलाकों में ट्यूबवेल और सतही जल निकासी सिस्टम तैयार किए जाएंगे. साथ ही, फसल विविधीकरण, सीधे बीज वाले धान और अन्य जल संरक्षण तकनीकों के जरिए सतत कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसके लिए विश्व बैंक 886 करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग देगा.

28,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी

भूमिगत जल के पुनर्भरण को मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि हरियाणा के दक्षिणी जिलों में लगभग 80 नए जलाशय बनाए जाएंगे. इसके अलावा, जिन्द, कैथल और गुरुग्राम में स्थित चार बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट  से शुद्ध पानी पुनः उपयोग में लाकर करीब 28,000 एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी. इसके लिए विश्व बैंक ने लगभग 600 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी है. सैनी ने कहा कि विश्व बैंक ने सरकार की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता और मार्गदर्शन की सराहना की और ‘जल संरक्षित हरियाणा’ कार्यक्रम को राज्य के जल प्रबंधन में एक ‘परिवर्तनकारी पहल’ बताया.

यह अगले 25 साल तक प्रभावी ढंग से काम करेगा

इस परियोजना के पूरा होने पर हरियाणा की सभी नहरें पूरी तरह से बहाल हो जाएंगी और देश की सबसे आधुनिक और अच्छी तरह से बहाल नहरें बनेंगी. परियोजना से राज्य जल आत्मनिर्भर बनेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित, समावेशी और सतत जल भविष्य सुनिश्चित होगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि पूरे नहर नेटवर्क को पूरी तरह से लाइन किया जाएगा और यह अगले 25 साल तक प्रभावी ढंग से काम करेगा, जिससे भविष्य में नहरों की मरम्मत के लिए कई सालों तक कोई अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता नहीं होगी.

कई अन्य समस्याओं से भी किसान बच सकेंगे

इसके अलावा, इस परियोजना से 2 लाख एकड़ अतिरिक्त भूमि में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी और किसानों को जलभराव (वाटरलॉगिंग) की समस्या से भी राहत मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में सिंचाई में ज्यादातर ताजा पानी का इस्तेमाल होता है, लेकिन इस परियोजना से यह पानी बचाया जाएगा और इसे पीने के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा. सैनी ने किसानों से अपील की कि वे धान की खेती में माइक्रो-इरिगेशन सिस्टम  का अधिक से अधिक उपयोग करें. इससे फसल की उपज बढ़ेगी और खुले खेत में पानी के उपयोग से होने वाली कई अन्य समस्याओं से भी किसान बच सकेंगे.

Published: 25 Jan, 2026 | 10:30 AM

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