Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई है. अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद क्रूड ऑयल लगभग 2 फीसदी तक टूट गया है. ब्रेंट क्रूड अब 77 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जबकि WTI भी 75 डॉलर के नीचे ट्रेड कर रहा है. युद्ध जैसे हालात खत्म होने के संकेतों के बाद तेल सप्लाई की चिंता कम हुई है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिख रहा है.
इस गिरावट का असर अब भारत जैसे देशों पर भी साफ दिखाई देने लगा है, जहां बड़ी मात्रा में तेल और गैस का आयात किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह नीचे रहती हैं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG, CNG और फर्टिलाइज़र तक कई जरूरी चीजों के दामों में राहत मिल सकती है.
कच्चे तेल में गिरावट से बाजार में राहत की उम्मीद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों में गिरावट देखी जा रही है. पिछले दिनों जहां क्रूड 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, वहीं अब ये 80 डॉलर से नीचे आ गया है. इसका मुख्य कारण अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होना और होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद है. भारत में तेल विपणन कंपनियां जैसे IOCL, BPCL और HPCL कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर ही पेट्रोल-डीजल के दाम तय करती हैं. ऐसे में क्रूड सस्ता होने से इन कंपनियों का रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ जाता है और उपभोक्ताओं को भी राहत मिलने की संभावना बनती है.
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LPG, CNG और PNG के दामों में आ सकती है कमी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से LPG और प्राकृतिक गैस के रूप में आयात करता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रोपेन और ब्यूटेन की कीमतों में गिरावट आने से घरेलू LPG सिलेंडर 70 से 100 रुपये तक सस्ता हो सकता है. इसी तरह CNG और PNG के दामों में भी 4 से 6 रुपये प्रति यूनिट तक कमी आने की संभावना है. स्पॉट LNG की कीमतें पहले 15-18 डॉलर प्रति mmBtu तक पहुंच गई थीं, लेकिन अब इनके 9-10 डॉलर तक आने की उम्मीद है. इससे शहरों में चलने वाले वाहनों और पाइप्ड गैस उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.
फर्टिलाइजर और खेती से जुड़ी चीजों पर असर
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और गैस की कीमतें घटने से फर्टिलाइज़र सेक्टर को भी सीधा फायदा मिलता है. भारत हर साल लाखों टन यूरिया और फॉस्फेटिक खाद का आयात करता है. युद्ध के दौरान इसकी लागत बढ़ गई थी, लेकिन अब सप्लाई सामान्य होने से कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. इससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ कम होगा और किसानों को खाद आसानी से मिल सकेगी. कृषि क्षेत्र में यह बदलाव खेती की लागत घटाने में मदद कर सकता है.
हवाई सफर, लॉजिस्टिक्स और रोजमर्रा की चीजें भी होंगी सस्ती
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतें कच्चे तेल से जुड़ी होती हैं. क्रूड सस्ता होने से हवाई किराए में 8 से 10 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है. इससे यात्रियों को सीधा फायदा मिलेगा. इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स सेक्टर में भी राहत की उम्मीद है. डिलीवरी चार्ज और ट्रांसपोर्ट लागत में 5 से 10 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. स्क्रैप मेटल, पेंट, प्लास्टिक और पैकेजिंग सामग्री जैसी कई इंडस्ट्री में भी लागत घटने की संभावना है.
किन 10 चीजों पर दिखेगा सीधा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार अगर कच्चे तेल की कीमतें नीचे बनी रहती हैं, तो भारत में ये 10 चीजें सस्ती हो सकती हैं- LPG, CNG, PNG, फर्टिलाइज़र, पेट्रोल-डीजल, हवाई किराया, प्लास्टिक प्रोडक्ट्स, पेंट्स, लॉजिस्टिक्स सेवाएं और कुछ आयातित खाद्य पदार्थ जैसे ड्राई फ्रूट्स. हालांकि, यह राहत पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिरता और सप्लाई चेन पर निर्भर करेगी. अगर हालात सामान्य रहते हैं, तो आने वाले हफ्तों में आम लोगों की जेब पर बोझ कम हो सकता है और महंगाई से कुछ राहत मिल सकती है.