Drip Irrigation: भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अब खेती के लिए पानी की कमी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. मौसम में बदलाव, लगातार घटता भूजल स्तर और सिंचाई की बढ़ती जरूरतों के कारण पुराने सिंचाई तरीके कई जगह पहले जितने असरदार नहीं रहे. ऐसे में ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) किसानों के लिए एक आधुनिक और किफायती समाधान बनकर सामने आ रहा है. इस तकनीक में पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी बहुत कम होती है.
हाल ही में आयोजित ‘माइक्रो इरिगेशन कॉन्फ्रेंस’ में कृषि विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों ने ड्रिप सिंचाई के महत्व और इसके भविष्य पर विस्तार से चर्चा की.
ड्रिप इरिगेशन: क्या है यह तकनीक?
मुकेश सिंह (Chairman, Indo American Chamber of Commerce UP) ने बताया कि ड्रिप इरिगेशन एक आधुनिक पानी प्रबंधन तकनीक है, जिसमें पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है. इससे पानी की बर्बादी बहुत कम हो जाती है और पौधों को उनकी जरूरत के हिसाब से लगातार नमी मिलती रहती है. उन्होंने यह भी कहा कि यह तरीका खासकर उन इलाकों के लिए बेहद उपयोगी है जहां पानी की कमी है या जमीन समतल नहीं है.
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30 से 50 फीसदी तक पानी की बचत
मुकेश सिंह के अनुसार, ड्रिप इरिगेशन पारंपरिक सिंचाई तरीकों के मुकाबले लगभग 30 से 50 प्रतिशत तक पानी बचाने में मदद करता है. इसमें पानी का भाप बनकर उड़ना और अनावश्यक बहाव काफी कम हो जाता है, जिससे हर बूंद का सही तरीके से इस्तेमाल हो पाता है. इसी वजह से यह तकनीक उन इलाकों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है जहां पानी की कमी है या बारिश कम होती है.
उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए वरदान
ड्रिप सिंचाई तकनीक खासकर उन फसलों के लिए बहुत फायदेमंद होती है जिन्हें तय मात्रा में और नियमित अंतराल पर पानी की जरूरत होती है. जैसे टमाटर और मिर्च जैसी सब्जियां, केला, अंगूर और संतरे जैसे फल, साथ ही नारियल और कॉफी जैसी बागवानी फसलें. इस तकनीक की मदद से पौधों को उनकी जरूरत के हिसाब से पानी मिलता है, जिससे फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होती है और उत्पादन भी बढ़ता है.
असमान जमीन पर भी प्रभावी
ड्रिप इरिगेशन का एक बड़ा फायदा यह है कि इसे ढलान वाली या असमान जमीन पर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. पारंपरिक सिंचाई में पानी अक्सर नीचे की ओर बह जाता है, जिससे हर पौधे को बराबर पानी नहीं मिल पाता. लेकिन ड्रिप सिस्टम में पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे सभी पौधों को लगभग समान मात्रा में पानी मिलता है और खेती ज्यादा संतुलित और बेहतर तरीके से हो पाती है.
माइक्रो इरिगेशन कॉन्फ्रेंस में चर्चा
यह कार्यक्रम CARD और उत्तर प्रदेश उद्यान विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया. इसमें उत्तर प्रदेश के उद्यान मंत्री दीनेश प्रताप सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में माइक्रो इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई) को बढ़ावा देने और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए लगातार काम कर रही है.
इस कॉन्फ्रेंस में उद्यान निदेशक बी.पी. राम विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे. वहीं प्रमुख वक्ता मुकेश सिंह ने किसानों के लिए ड्रिप सिंचाई के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि 12 जून को नोएडा में कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़े उद्यमियों की एक बड़ी बैठक होगी, जिसका मकसद उत्तर प्रदेश के कृषि निर्यात को और मजबूत करना है.
अन्य प्रमुख प्रतिभागी और सम्मान
इस कॉन्फ्रेंस में अरिंदम (CEO, CARD), शोभित (डायरेक्टर, CARD), डॉ. राजीव शर्मा (JD हॉर्टिकल्चर) और सरवेश सिंह (MD, HOFED) जैसे कई विशेषज्ञ और उद्योग से जुड़े लोग शामिल हुए. कार्यक्रम के अंत में बी.पी. राम को उनके खास योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया, जिसे आयोजन का सबसे अहम पल माना गया.