Fertilizer subsidy: किसानों के लिए खरीफ सीजन 2026 से पहले खुशखबरी है. केंद्र सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटाशिक (P&K) उर्वरकों पर पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS) की नई दरें मंजूर कर दी हैं. यह फैसला केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में लिया गया. 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक DAP, NPKS और अन्य P&K उर्वरक किसानों को किफायती दरों पर उपलब्ध होंगे.
बढ़ा बजट, किसानों को राहत
खरीफ 2026 के लिए सरकार ने उर्वरक सब्सिडी पर लगभग 41,533.81 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान लगाया है. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 4,317 करोड़ रुपये अधिक है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम किसानों पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए उठाया गया है.
एनबीएस (NBS) योजना से किसानों को क्या लाभ
एनबीएस (Nutrient Based Subsidy) योजना के तहत किसानों को उर्वरकों में मौजूद पोषक तत्वों के आधार पर सब्सिडी दी जाती है. इसके मुख्य फायदे हैं:
- किसानों को सस्ती और सब्सिडी वाली खाद आसानी से मिलती है.
- बाजार में खाद की उपलब्धता बनी रहती है.
- खेती की लागत में सीधे कमी आती है.
- खाद कंपनियों को तय दर पर सब्सिडी मिलने से सप्लाई प्रभावित नहीं होती.
सब्सिडी वाले प्रमुख उर्वरक और कीमतें
सरकार ने 28 ग्रेड के DAP, MOP, NPKS समेत अन्य P&K उर्वरक किसानों को सब्सिडी वाली दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है. अनुमानित रेट (50 किलो बैग) इस प्रकार हैं:
| खाद का प्रकार | कीमत (₹ प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| DAP | ₹1,350 – ₹1,500 |
| यूरिया | ₹266 – ₹300 |
| MOP (म्यूरेट ऑफ पोटाश) | ₹1,700 – ₹1,800 |
| NPK (विभिन्न ग्रेड) | ₹1,400 – ₹1,800 |
| SSP | ₹300 – ₹400 |
नोट: कीमतें राज्यों और कंपनियों के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती हैं.
अंतरराष्ट्रीय कीमतों का प्रभाव
यूरिया, DAP और अन्य उर्वरकों की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव लगातार देखा गया है. ऐसे में सरकार ने सब्सिडी बढ़ाकर किसानों को राहत दी है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार की महंगाई का असर उनके उत्पादन और लागत पर कम पड़े.
पिछले साल का अनुभव
खरीफ 2025 में भी सरकार ने 28 मार्च को P&K उर्वरकों पर सब्सिडी मंजूर की थी. उस समय कुल बजट 37,216.15 करोड़ रुपये था. पिछले साल के अनुभव से यह साबित हुआ कि NBS योजना के तहत सब्सिडी मिलने से किसानों को सस्ती दरों पर खाद उपलब्ध हुई और खेती की लागत कम हुई. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, खरीफ 2026 में यह फैसला किसानों के लिए बेहद फायदेमंद होगा.
समय पर सस्ती खाद मिलने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और खेती की लागत कम होगी. विशेष रूप से धान, मक्का, कपास और दलहन जैसी खरीफ फसलों के लिए यह राहत बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी.