Kargil Vijay Diwas: देश आज 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मना रहा है. यह सिर्फ एक सैन्य जीत का दिन नहीं, बल्कि उन हजारों वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए. इन बहादुर सैनिकों में बड़ी संख्या उन युवाओं की थी, जो देश के गांवों और किसान परिवारों से निकलकर भारतीय सेना की वर्दी पहनकर मातृभूमि की रक्षा के लिए कारगिल की बर्फीली चोटियों पर डट गए. कठिन मौसम, दुर्गम पहाड़ और दुश्मन की ऊंची चौकियों के बावजूद भारतीय जवानों ने ऐसा पराक्रम दिखाया कि पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा.
3 मई से 26 जुलाई तक चला था 85 दिनों का भीषण युद्ध
कारगिल युद्ध की शुरुआत 3 मई 1999 को हुई, जब स्थानीय चरवाहों ने कारगिल सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों की मौजूदगी की जानकारी भारतीय सेना को दी. इसके बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय शुरू किया. लगभग 85 दिनों तक चले इस भीषण संघर्ष में भारतीय सैनिकों ने तोलोलिंग, टाइगर हिल और कई अहम चोटियों पर दुश्मन से आमने-सामने की लड़ाई लड़ी. आखिरकार 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने सभी रणनीतिक चौकियों पर दोबारा कब्जा कर विजय हासिल की. तभी से हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है.
वीरों का पराक्रम हमेशा प्रेरित करेगा – प्रधानमंत्री मोदी
कारगिल विजय दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के वीर सैनिकों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र उनकी असाधारण बहादुरी और भारत की सुरक्षा के प्रति समर्पण के लिए हमेशा कृतज्ञ रहेगा. उन्होंने कहा कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में सैनिकों द्वारा दिखाया गया पराक्रम देश के लिए हमेशा गर्व का विषय रहेगा. उनका अटूट देशप्रेम और कर्तव्यनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करती रहेगी.
रक्षा मंत्री और राहुल गांधी ने भी दी श्रद्धांजलि
लद्दाख के द्रास स्थित कारगिल वॉर मेमोरियल में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत की पाकिस्तान से बातचीत केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुद्दे पर ही होगी. उन्होंने कहा कि भारत जहां आधुनिक डेटा सेंटर बना रहा है, वहीं पाकिस्तान कट्टरपंथ के केंद्र तैयार कर रहा है. वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कारगिल विजय दिवस पर सभी शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के साहस, शौर्य और त्याग का राष्ट्र हमेशा ऋणी रहेगा.
गांवों के वीरों ने रचा था इतिहास
कारगिल युद्ध की सबसे बड़ी ताकत भारतीय सैनिकों का अदम्य साहस था. सेना में सेवा देने वाले हजारों जवान ग्रामीण पृष्ठभूमि और किसान परिवारों से आते हैं. इन्हीं गांवों के बेटों ने दुर्गम पहाड़ों पर दुश्मन के मजबूत ठिकानों पर तिरंगा फहराकर दुनिया को भारतीय सेना की ताकत दिखाई. कारगिल विजय दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की सुरक्षा के लिए खेतों से निकलने वाले किसान पुत्र भी सीमा पर उसी समर्पण के साथ डटे रहते हैं, जैसे वे खेतों में अन्न उगाने के लिए मेहनत करते हैं. यही कारण है कि 26 जुलाई का दिन हर भारतीय के लिए गर्व, सम्मान और वीरता का प्रतीक बन चुका है.