International Day of Forests: जब भी हम ताजी हवा में सांस लेते हैं, पेड़ों की छांव में सुकून पाते हैं या खेतों में हरियाली देखते हैं, तब हमें महसूस होता है कि जंगल हमारी जिंदगी का कितना अहम हिस्सा हैं. जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं, बल्कि ये हमारी जिंदगी, खाना, पानी और रोजगार का बड़ा सहारा हैं. हर साल 21 मार्च को इंटरनेशनल डे ऑफ फॉरेस्ट्स मनाया जाता है, ताकि लोगों को जंगलों की अहमियत समझाई जा सके और उन्हें बचाने के लिए प्रेरित किया जा सके.
क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल डे ऑफ फॉरेस्ट्स?
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, साल 2012 में संयुक्त राष्ट्र ने 21 मार्च को इंटरनेशनल डे ऑफ फॉरेस्ट्स के रूप में घोषित किया था. इसका मकसद दुनिया भर के लोगों को जंगलों के महत्व के बारे में जागरूक करना है. हर साल इस दिन के लिए एक खास थीम रखी जाती है. इस साल की थीम है वन और भोजन, यानी जंगल और भोजन. इसका मतलब है कि जंगल हमारे खाने-पीने से सीधे जुड़े हुए हैं. जंगलों से हमें फल, बीज, जड़ी-बूटियां और कई जरूरी चीजें मिलती हैं, जो खासकर ग्रामीण और आदिवासी लोगों की जिंदगी का आधार हैं.

वन और भोजन से जुड़ा जीवन, जंगलों का महत्व समझें.
भारत में जंगल: संस्कृति और जीवन का हिस्सा
भारत में जंगल सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और अर्थव्यवस्था का भी हिस्सा हैं. गांवों में रहने वाले लोग जंगलों पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कई ऐसी योजनाएं शुरू की हैं, जो जंगलों को बचाने के साथ-साथ लोगों को रोजगार और पोषण भी देती हैं. इन योजनाओं का मकसद है कि जंगल सुरक्षित रहें और लोगों की जिंदगी भी बेहतर हो.
नेशनल एग्रोफॉरेस्ट्री पॉलिसी
सरकार ने 2014 में नेशनल एग्रोफॉरेस्ट्री पॉलिसी शुरू की थी. इसमें किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खेतों में फसलों के साथ पेड़ भी लगाएं.
इससे कई फायदे होते हैं:-
- जमीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है
- किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलती है
- पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है
सरकार किसानों को अच्छे पौधे उपलब्ध कराती है और उन्हें ट्रेनिंग भी देती है. साथ ही, पेड़ों की बिक्री के लिए बाजार की सुविधा भी दी जाती है, जिससे किसानों को अच्छा दाम मिल सके.

इंटरनेशनल डे ऑफ फॉरेस्ट्स.
ग्रीन इंडिया मिशन
ग्रीन इंडिया मिशन, भारत सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसका मकसद देश में जंगलों का क्षेत्र बढ़ाना और उनकी गुणवत्ता सुधारना है.
इस मिशन के तहत:-
- 50 लाख हेक्टेयर में नए पेड़ लगाए जा रहे हैं
- 50 लाख हेक्टेयर जमीन की गुणवत्ता सुधारी जा रही है
- लाखों लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं
यह योजना जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मदद करती है. इसके तहत शहरों में भी पेड़ लगाए जा रहे हैं और वेटलैंड्स को भी बचाया जा रहा है.
जंगल की आग पर काबू
जंगलों में आग लगना एक बड़ी समस्या है, जिससे पेड़-पौधों के साथ-साथ जानवरों और लोगों को भी नुकसान होता है. इसे रोकने के लिए सरकार ने फॉरेस्ट फायर प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट स्कीम शुरू की है. इसमें आधुनिक तकनीक जैसे सैटेलाइट, GPS और GIS का इस्तेमाल किया जाता है. भारतीय वन सर्वेक्षण द्वारा एक ऐसा सिस्टम तैयार किया गया है, जो जंगल में आग लगते ही तुरंत अलर्ट भेज देता है. इससे समय रहते आग पर काबू पाया जा सकता है. इसके साथ ही स्थानीय लोगों को भी इस काम में जोड़ा गया है, ताकि वे अपने जंगलों की रक्षा कर सकें.

जंगल बचाओ, जीवन बचाओ.
वन धन योजना: जंगल से रोजगार की राह
2018 में शुरू हुई प्रधानमंत्री वन धन योजना आदिवासी लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रही है. इस योजना के तहत जंगल से मिलने वाले उत्पाद जैसे शहद, लाख, जड़ी-बूटियां आदि को बेहतर तरीके से तैयार करके बाजार में बेचा जाता है. इसके लिए वन धन विकास केंद्र (VDVK) बनाए जाते हैं, जहां लोग मिलकर काम करते हैं. सरकार इन केंद्रों को आर्थिक मदद देती है और ट्रेनिंग भी देती है. इससे आदिवासी लोगों की आमदनी बढ़ती है, उनका जीवन बेहतर होता है और उन्हें अपने गांव छोड़कर शहरों में जाने की जरूरत भी कम हो जाती है.