FSSAI का सख्त निर्देश: अश्वगंधा की पत्तियों के इस्तेमाल पर रोक, सप्लीमेंट्स में सिर्फ जड़ ही मान्य

पहले अश्वगंधा का उपयोग सिर्फ आयुर्वेदिक दवाओं तक सीमित था, लेकिन अब यह कई आधुनिक उत्पादों का हिस्सा बन चुका है. आजकल यह हर्बल चाय, प्रोटीन पाउडर, हेल्थ ड्रिंक्स, कैप्सूल और अन्य वेलनेस प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल हो रहा है. लोग इसे इम्युनिटी बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए नियमित रूप से ले रहे हैं.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Apr, 2026 | 07:50 AM

FSSAI ashwagandha rules: आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं. इसी वजह से हर्बल और आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स की मांग तेजी से बढ़ रही है. अश्वगंधा भी ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है, जिसे ताकत बढ़ाने, तनाव कम करने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए काफी लोकप्रिय माना जाता है. लेकिन अब इसके इस्तेमाल को लेकर एक अहम निर्देश सामने आया है, जो हर कंपनी और उपभोक्ता के लिए जानना जरूरी है.

हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने साफ कहा है कि अश्वगंधा से बने हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल्स में केवल इसकी जड़ (रूट) और उसके अर्क का ही इस्तेमाल किया जा सकता है. पत्तियों या उनके किसी भी रूप का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है.

आखिर क्यों लिया गया यह फैसला

FSSAI ने अपनी एडवाइजरी में बताया कि कुछ कंपनियां अश्वगंधा की पत्तियों और उनके एक्सट्रैक्ट का भी इस्तेमाल कर रही थीं, जो तय नियमों के खिलाफ है. इसलिए अब साफ निर्देश जारी किया गया है कि केवल जड़ का उपयोग ही मान्य होगा. यह नियम खाद्य सुरक्षा से जुड़े 2016 के नियमों के तहत पहले से मौजूद थे, लेकिन अब इन्हें सख्ती से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है.

आजकल किन-किन चीजों में हो रहा है इस्तेमाल

पहले अश्वगंधा का उपयोग सिर्फ आयुर्वेदिक दवाओं तक सीमित था, लेकिन अब यह कई आधुनिक उत्पादों का हिस्सा बन चुका है. आजकल यह हर्बल चाय, प्रोटीन पाउडर, हेल्थ ड्रिंक्स, कैप्सूल और अन्य वेलनेस प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल हो रहा है. लोग इसे इम्युनिटी बढ़ाने और तनाव कम करने के लिए नियमित रूप से ले रहे हैं. इसी बढ़ती मांग के कारण इसके सही और सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करना और भी जरूरी हो गया है.

पत्तियों के इस्तेमाल पर क्यों लगी रोक

इस मामले में आयुष मंत्रालय ने भी कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे केवल अश्वगंधा की जड़ और उसके अर्क का ही उपयोग करें. वैज्ञानिक शोधों में पाया गया है कि अश्वगंधा की पत्तियों में कुछ ऐसे तत्व होते हैं, जो ज्यादा मात्रा में शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं. खासकर “Withaferin-A” नाम का तत्व अधिक पाया जाता है, जिससे सेहत पर असर पड़ सकता है. इसी वजह से पत्तियों को सुरक्षित नहीं माना गया और उनके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है.

कंपनियों के लिए क्या हैं नए नियम

अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स बनाते समय खास ध्यान रखना होगा. उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि वे केवल अश्वगंधा की जड़ या उसके अर्क का ही उपयोग करें और तय मात्रा का पालन करें. अगर कोई कंपनी इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. इसलिए अब प्रोडक्ट की गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पर ज्यादा फोकस रहेगा.

आम लोगों को क्या ध्यान रखना चाहिए

इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है. जब भी आप कोई हेल्थ सप्लीमेंट या हर्बल प्रोडक्ट खरीदें, तो उसका लेबल जरूर पढ़ें. यह देखना जरूरी है कि उसमें अश्वगंधा की जड़ का ही उपयोग किया गया है या नहीं. अगर जानकारी स्पष्ट नहीं हो, तो ऐसे प्रोडक्ट से बचना ही बेहतर है.

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