Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार ने बजट सत्र के आखिरी दिन विधानसभा में कई अहम बिल पास किए. इनमें किसानों के लिए राज्य स्तरीय आयोग बनाने का बिल सबसे अहम है. यह आयोग एक सलाहकार संस्था के रूप में काम करेगा और खेती व उससे जुड़े क्षेत्रों को मजबूत बनाने के लिए नीतियों की समीक्षा कर सुझाव देगा. आयोग में एक अध्यक्ष और अधिकतम तीन गैर-सरकारी सदस्य होंगे. इसका मुख्य फोकस किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें आसान कर्ज दिलाने, बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनके कल्याण से जुड़े मुद्दों पर रहेगा. इसके अलावा, एक और बिल पास किया गया है जिसका उद्देश्य गंभीर आरोपों वाले लोगों को पंचायत चुनाव से दूर रखना है.
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब हिमाचल प्रदेश में खेती कई चुनौतियों से जूझ रही है, जैसे घटती आमदनी, छोटे-छोटे बंटे हुए खेत, बदलता मौसम, बाजार की अनिश्चितता और संस्थागत मदद की कमी. प्रस्तावित किसान आयोग को बनाने में करीब 50 लाख रुपये का एकमुश्त खर्च आएगा, जबकि हर साल करीब 85 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है. यह आयोग किसानों की समस्याएं सुनने, अलग-अलग पक्षों के बीच बेहतर तालमेल बनाने और तथ्यों के आधार पर नीतियां तैयार करने में मदद करेगा.
कौन बनेगा किसान आयोग का अध्यक्ष
कृषि मंत्री चंदर कुमार ने कहा है कि आयोग का अध्यक्ष हिमाचल का ही कोई प्रगतिशील या सक्रिय किसान होगा, जो कम से कम ग्रेजुएट हो, देश-विदेश की खेती से जुड़ी जानकारी रखता हो और कृषि या इससे जुड़े क्षेत्रों में कम से कम 5 साल का प्रशासनिक अनुभव रखता हो. उन्होंने कहा कि आयोग के गैर-सरकारी सदस्य भी वास्तविक किसान होंगे, जो समान शैक्षणिक योग्यता रखते हों और जिनके पास प्रशासनिक अनुभव या इस क्षेत्र में उच्च डिग्री हो. इनमें कृषि या उससे जुड़े क्षेत्रों जैसे बागवानी या पशु चिकित्सा में पीएचडी करने वाले लोग भी शामिल हो सकते हैं.
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पंचायती राज (संशोधन) बिल भी पास
साथ ही, विधानसभा ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) बिल, 2026 भी पास किया है. इस बिल के तहत नशे से जुड़े मामलों में आरोप तय होने पर ऐसे लोगों को पंचायत चुनाव लड़ने या पद पर बने रहने से अयोग्य कर दिया जाएगा. इसके अलावा, जमीन पर अवैध कब्जे, वित्तीय गड़बड़ियों और हितों के टकराव से जुड़े नियमों को और सख्त किया गया है. ग्राम सभा में कम उपस्थिति के कारण विकास कार्यों में देरी न हो, इसके लिए कोरम (न्यूनतम उपस्थिति) भी कम करने का प्रावधान किया गया है.
बजट में किसानों को मिला था बड़ा गिफ्ट
बता दें कि बजट 2026 पेश करते हुए हमाचल प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में कई अहम फसले लिए थे. सरकार ने पहली बार अदरक जैसी फसल को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के दायरे में लाकर किसानों को बड़ा तोहफा दिया था. इसी के साथ दूध के दाम में भी 10 रुपये का इजाफा किया गया था. इस बजट में प्राकृतिक खेती और पशुपालन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया. इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह रही थी कि राज्य सरकार ने कई फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की है. पहली बार अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलो MSP तय किया गया, जो पहाड़ी किसानों के लिए राहत की खबर है. प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करते हुए गेहूं का MSP 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलो कर दिया गया.