मिस्त्र के पिरामिड से आपकी रसोई तक, आखिर क्यों नहीं सड़ता शहद

शहद की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनावट है. शहद में पानी की मात्रा बहुत कम होती है, आमतौर पर सिर्फ 17 से 18 प्रतिशत. जबकि ज्यादातर बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीवों को पनपने के लिए ज्यादा पानी चाहिए होता है. जब पानी ही पर्याप्त न हो, तो ये जीव शहद के अंदर जिंदा नहीं रह पाते.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 20 Jan, 2026 | 10:18 AM

Honey science: हम में से ज्यादातर लोगों ने कभी न कभी यह बात जरूर सुनी होगी कि शहद ऐसा खाद्य पदार्थ है जो कभी खराब नहीं होता. दादी-नानी की बातों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर जगह शहद को “अमर भोजन” कहा जाता है. कहा जाता है कि मिस्र के पिरामिडों से हजारों साल पुराना शहद मिला, जो आज भी खाने लायक था. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बात पूरी तरह सच है या फिर इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह छिपी हुई है? आइए आसान और समझने वाली भाषा में जानते हैं कि शहद आखिर क्यों लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.

शहद की बनावट ही उसे खास बनाती है

शहद की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनावट है. शहद में पानी की मात्रा बहुत कम होती है, आमतौर पर सिर्फ 17 से 18 प्रतिशत. जबकि ज्यादातर बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीवों को पनपने के लिए ज्यादा पानी चाहिए होता है. जब पानी ही पर्याप्त न हो, तो ये जीव शहद के अंदर जिंदा नहीं रह पाते. यही कारण है कि शहद में खराब होने की प्रक्रिया लगभग रुक जाती है.

अम्लीय प्रकृति भी देती है सुरक्षा

शहद का पीएच स्तर 3.2 से 4.5 के बीच होता है, यानी यह हल्का अम्लीय होता है. यह अम्लीय वातावरण ज्यादातर हानिकारक बैक्टीरिया के लिए अनुकूल नहीं होता. ऐसे में शहद अपने आप में एक प्राकृतिक संरक्षक की तरह काम करता है. यही वजह है कि बिना किसी केमिकल के भी शहद लंबे समय तक सुरक्षित रह पाता है.

मधुमक्खियों की मेहनत और एंजाइम का कमाल

जब मधुमक्खियां फूलों के रस को इकट्ठा करती हैं, तो वह सिर्फ उसे जमा नहीं करतीं, बल्कि उसे प्रोसेस भी करती हैं. इस प्रक्रिया में वे ग्लूकोज ऑक्सीडेज नाम का एक एंजाइम मिलाती हैं. यही एंजाइम शहद के अंदर धीरे-धीरे हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनाता है, जो हल्का एंटीसेप्टिक और एंटीबैक्टीरियल गुण रखता है. यही कारण है कि शहद को पुराने समय में घावों पर भी लगाया जाता था.

ज्यादा शर्करा, बैक्टीरिया के लिए खतरा

शहद में प्राकृतिक शर्करा की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. यह शर्करा ऑस्मोसिस की प्रक्रिया के जरिए बैक्टीरिया की कोशिकाओं से पानी खींच लेती है. जब बैक्टीरिया के पास पानी नहीं बचता, तो वे सूखकर नष्ट हो जाते हैं. इस तरह शहद अपने अंदर किसी भी तरह के संक्रमण को पनपने नहीं देता.

क्या शहद सच में कभी खराब नहीं होता?

वैज्ञानिक तौर पर देखा जाए तो शुद्ध शहद अगर सही तरीके से रखा जाए, यानी साफ और एयरटाइट कंटेनर में, तो वह बहुत लंबे समय तक खराब नहीं होता. हजारों साल पुराना शहद मिलने के उदाहरण इसी बात की पुष्टि करते हैं. हालांकि अगर शहद में नमी चली जाए, पानी मिल जाए या गंदे चम्मच से बार-बार निकाला जाए, तो वह खराब हो सकता है. यानी शहद का खराब होना उसके इस्तेमाल और भंडारण पर भी निर्भर करता है.

क्रिस्टलाइज होना खराब होने का संकेत नहीं

कई बार लोग देखते हैं कि शहद जम गया है या उसमें दाने बन गए हैं, तो वे सोचते हैं कि शहद खराब हो गया. जबकि सच्चाई यह है कि यह एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे क्रिस्टलाइजेशन कहते हैं. हल्का गुनगुना पानी देकर शहद को फिर से तरल किया जा सकता है और यह खाने के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है.

अमर नहीं, लेकिन बेहद टिकाऊ

शहद को अमर कहना शायद पूरी तरह सही न हो, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि सही परिस्थितियों में रखा गया शहद सालों-साल सुरक्षित रह सकता है. इसकी प्राकृतिक बनावट, कम नमी, अम्लीय गुण और मधुमक्खियों की मेहनत इसे दुनिया के सबसे टिकाऊ खाद्य पदार्थों में शामिल कर देती है. इसलिए अगली बार जब आप शहद का डिब्बा खोलें, तो जान लें कि उसके पीछे सिर्फ मिठास नहीं, बल्कि पूरा विज्ञान छिपा है.

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