Elephant Deaths: 1653 हाथियों की मौत ने वन्यजीव संरक्षण पर उठाए सवाल, वन विभाग की बढ़ी चिंता

भारत में हाथियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है. एक नई रिपोर्ट के अनुसार इंसानी गतिविधियों और विकास कार्यों की वजह से हजारों हाथियों की जान खतरे में पड़ी है. इसमें करंट, ट्रेन हादसे और शिकार जैसे कारण प्रमुख बताए गए हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण पर सवाल उठे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 7 Jun, 2026 | 01:13 PM

Elephant Conservation: भारत में जंगली हाथियों की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है. इस अध्ययन के अनुसार साल 2009 से 2025 के बीच देश में कुल 1,653 हाथियों की मौत इंसानी गतिविधियों और विकास कार्यों की वजह से हुई है. इनमें सबसे ज्यादा मामले करंट लगने, ट्रेन से टकराने और शिकार के कारण दर्ज किए गए हैं. यह रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून द्वारा तैयार की गई है. भारत दुनिया में एशियाई हाथियों की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में से एक है, जहां लगभग 60% हाथी पाए जाते हैं. ऐसे में ये रिपोर्ट संरक्षण को लेकर बड़ी चिंता जताती है.

करंट और बिजली लाइनों से सबसे ज्यादा मौतें

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि हाथियों की मौत  का सबसे बड़ा कारण बिजली का करंट रहा. इस दौरान 1,105 हाथियों की जान करंट लगने से गई. ओडिशा, कर्नाटक, असम, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में ऐसे मामले ज्यादा देखने को मिले. कई जगह खेतों की सुरक्षा के लिए लगाए गए अवैध या असुरक्षित बिजली तार हाथियों के संपर्क में आ गए, जिससे उनकी मौत हो गई. विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और इसे रोकने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है.

ट्रेन हादसे और जहर से भी खतरा बढ़ा

रिपोर्ट में बताया गया कि 2009 से 2025 के बीच 225 हाथियों की मौत ट्रेन से टकराने के कारण हुई. इसमें सबसे ज्यादा मामले असम में दर्ज किए गए, जहां 82 हाथियों की जान गई. इसके बाद पश्चिम बंगाल का स्थान रहा. इसके अलावा 79 हाथियों की मौत जहर देने के कारण हुई. इसमें अकेले असम में 45 मामले सामने आए. ओडिशा में भी ऐसे कई मामले दर्ज किए गए. ये दिखाता है कि मानव और हाथियों  के बीच संघर्ष कई जगह गंभीर रूप ले चुका है.

शिकार और बढ़ता मानव-हाथी संघर्ष

रिपोर्ट के अनुसार 214 हाथियों का शिकार किया गया. ओडिशा इस मामले में सबसे आगे रहा, जहां 66 हाथियों का शिकार हुआ. असम, केरल, मेघालय, कर्नाटक और तमिलनाडु में भी शिकार के मामले सामने आए हैं. ये संकेत देता है कि अवैध शिकार  अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने की जरूरत है. इसी अवधि में मानव-हाथी संघर्ष में 7,868 लोगों की भी मौत हुई है. ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य रहे हैं.

जंगलों की कटाई और विकास कार्य बने बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष का मुख्य कारण जंगलों का टूटना (फ्रैगमेंटेशन) और तेजी से हो रहा विकास है. सड़क, रेलवे लाइन, खदान और बिजली परियोजनाओं  ने हाथियों के प्राकृतिक रास्तों को बाधित किया है. इसी कारण हाथी गांवों और खेतों की ओर आ जाते हैं, जिससे टकराव बढ़ जाता है. कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में हाथियों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद मानव-हाथी संघर्ष अपेक्षाकृत कम है, क्योंकि वहां जंगल अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं.

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