भारत और अमेरिका के हालिया ट्रेड डील को हंगामा मचा हुआ है. घरेलू कृषि उत्पादों को नुकसान पहुंचने की चिंताओं के बीच केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने ऐसे उत्पादों की लिस्ट बताई है, जिनके लिए किसानों को कोई नुकसान नहीं होने वाला है. वहीं, अमेरिकी सेब के लिए बाजार खोले जाने पर उन्होंने नुकसान नहीं होने का गणित समझाया है. उन्होंने कहा कि सेब की घरेलू खपत हमारे उत्पादन से पूरी नहीं हो पाती है. हम वैसे भी बाहर से कम से 5 लाख टन सेब आयात करते हैं. घरेलू सेब की कीमत 75 रुपये रहने वाली है और अमेरिका से जो सेब आएगा वह 100 रुपये प्रति किलो होने वाला है. ऐसे में कैसे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमने अपने किसानों के हितों को सुरक्षित रखा है. वहीं, किसान संगठन एसकेएम की ओर से विरोध प्रदर्शन के आह्वान पर उन्होंने इसे किसानों का छोटा गुट बताया और कहा कि देश के ज्यादातर किसान जानते हैं यह समझौता उनके लिए फायदेमंद होगा.
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि मुझे यह मानने में कोई झिझक नहीं है कि एंबेसडर सर्जियो गोर इस समझौते और रिश्ते के लिए शुभचिंतक रहे हैं. उन्होंने बातचीत को फाइनल करने और घोषणा करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मैं उनके योगदान को स्वीकार करना चाहता हूं और उसका सम्मान करता हूं. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हमारे लिए यह एक ट्रेड एग्रीमेंट है जो अमेरिका-भारत के लंबे समय के रणनीतिक लक्ष्यों को नतीजों में बदलेगा और मुझे लगता है कि हमने बातचीत के ज़रिए एक बहुत अच्छा एग्रीमेंट किया है, जो दोनों देशों के लिए सम्मानजनक होगा, जो दोनों देशों को उनकी ताकत के क्षेत्रों में मौके देगा.
इन कृषि उत्पादों के लिए कोई छूट नहीं दी गई
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने खेती के मामले में कहा कि भारत की सभी संवेदनशीलताओं और किसानों और उत्पादकों के हितों को 100% सुरक्षित रखा गया है. मुझे आपसे यह बताते हुए बिल्कुल भी झिझक नहीं है कि अन्य चीजों के अलावा हमने मांस, पोल्ट्री, किसी भी तरह के GM फूड या उनके प्रोडक्ट, किसी भी सोया मील के लिए कोई छूट नहीं दी गई है. इसके साथ ही मक्का, अनाज जैसे चावल और गेहूं या ज्वार, बाजरा, रागी या मोटे अनाज, चीनी, भारत में पैदा होने वाले फल जैसे केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी, खट्टे फल, दालें जैसे हरी मटर, काबुली चना, मूंग जिनका हमारे पास पर्याप्त उत्पादन है, तिलहन, कुछ पशु आहार, मूंगफली, शहद, माल्ट और उसके अर्क, गैर अल्कोहल वाले पेय पदार्थ, आटा और भोजन, स्टार्च, जरूरी तेल, ईंधन के लिए इथेनॉल, तंबाकू के लिए कोई छूट नहीं दी है. ये भारत के लिए संवेदनशील हैं. हमने हार नहीं मानी है.
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हम पहले से 5 लाख टन से ज्यादा सेब आयात कर रहे
सेब या ट्री नट्स को लेकर पहाड़ी राज्यों की चिंताओं पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि हम सेब को दबा नहीं रहे हैं. सेब की डिमांड 25-26 लाख टन से ज्यादा है. हम लगभग 20-21 लाख टन सेब का उत्पादन करते हैं. अभी की बात करें तो हम हर साल 5.5 लाख टन सेब इंपोर्ट करते हैं. इसका एक बड़ा हिस्सा USA से आता है. हमने सेब को पूरी तरह से नहीं खोला है. हमने उन्हें सेब पर एक कोटा दिया है, जिसे हम वहां से खरीदेंगे. यह USA से अभी होने वाले सेब के इंपोर्ट से कम है.
पीयूष गोयल ने सेब किसानों को नुकसान नहीं होने का गणित बताया
उन्होंने कहा कि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हमने खोलने में बहुत सावधानी बरती है. आज सेब का मिनिमम इंपोर्ट प्राइस 50 रुपये है और इस पर 50% ड्यूटी लगती है जो 25 रुपये और जोड़ देती है. तो 75 रुपये बेस प्राइस है जिसके नीचे सामान देश में नहीं आता है. तो एक तरह से यह वह सुरक्षा है जो सेब किसानों को भी मिलती है कि कोई भी सामान डंप करके इतना सस्ता नहीं कर सकता कि सेब को सही कीमत न मिले. लेकिन USA को हमने जो कोटा दिया है उसमें भी मिनिमम इंपोर्ट प्राइस 80 रुपये है, उस पर 20 रुपये की ड्यूटी है. तो उसकी लैंडेड कीमत 100 रुपये होगी. यह हमारे किसानों के साथ कॉम्पिटिशन में नहीं है.
#WATCH | Speaking to ANI on India-US Trade Deal, on concerns of hill states about apples or tree nuts, Union Commerce Minister, Piyush Goyal says, “…We are not suppressing apples. The demand of apples is more than 25-26 lakh tons. We produce about 20-21 lakh tons. As we speak,… pic.twitter.com/fWKAhZTNII
— ANI (@ANI) February 8, 2026
संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन पर क्या बोले पीयूष गोयल
अमेरिका के साथ डील पर किसानों को नुकसान होने पर संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के आह्वान पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मुझे लगता है कि यह एक बहुत छोटा गुट है और यह एक अलग हुआ गुट है, जिसने यह आह्वान किया है. पीयूष गोयल ने कहा कि देश के ज्यादातर किसान समझते हैं कि यह उनके लिए अच्छा है. हमारे सभी कृषि उत्पादों पर अब हमारे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम पारस्परिक टैरिफ लगेगा.