ईरान संकट के बीच घरेलू सेब की चमकी किस्मत, कश्मीरी किसानों को मिला बेहतर मुनाफा

कश्मीर घाटी के किसानों के लिए यह स्थिति काफी फायदेमंद साबित हो रही है. पिछले सीजन में मौसम की अनिश्चितता और जम्मू-श्रीनगर हाईवे के बंद होने से सेब की ढुलाई प्रभावित हुई थी. कई ट्रकों में लदा सेब रास्ते में ही खराब हो गया था, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 19 Mar, 2026 | 07:37 AM

Apple price increase: देश और दुनिया में चल रहे तनाव का असर अब फल बाजार पर भी साफ दिखने लगा है. ईरान में जारी संघर्ष के कारण भारत में सेब की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे घरेलू सेब की कीमतों में तेजी आई है. खासकर कश्मीर घाटी के सेब उत्पादकों और व्यापारियों को इससे काफी राहत मिली है, क्योंकि लंबे समय बाद उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं.

ईरान से आयात रुका, बाजार में सप्लाई हुई कम

बिजनेसलाइन की खबर के मुताबिक, ईरान से आने वाले सेब की नई खेप फिलहाल रुक गई है. जो माल पहले ही भेजा जा चुका था, वह तो भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच गया है, लेकिन अब नई सप्लाई नहीं आ रही है.

मुंबई की कंपनी झूलेलाल फ्रूट्स के सीईओ सुनील सचदेव के अनुसार, “ईरान से ताजा सेब की सप्लाई बंद हो गई है, जिसका सीधा असर भारत के बाजार पर पड़ा है. जब आयात कम होता है तो घरेलू सेब की कीमतें अपने आप बढ़ने लगती हैं.”

घरेलू सेब की कीमतों में आया उछाल

बाजार में सप्लाई कम होने से कश्मीरी सेब की मांग बढ़ गई है. इसके चलते कीमतों में भी अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है. कश्मीर के सेब व्यापारी मोहम्मद अशरफ वानी के अनुसार, “कुल्लू डिलीशियस सेब इस समय 140 से 145 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है, जबकि डिलीशियस किस्म 120 से 125 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है.”

यह बढ़ोतरी किसानों और व्यापारियों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि पिछले कुछ समय से उन्हें लागत बढ़ने और कीमतों में उतार-चढ़ाव की वजह से नुकसान उठाना पड़ रहा था.

किसानों को क्यों मिली राहत?

कश्मीर घाटी के किसानों के लिए यह स्थिति काफी फायदेमंद साबित हो रही है. पिछले सीजन में मौसम की अनिश्चितता और जम्मू-श्रीनगर हाईवे के बंद होने से सेब की ढुलाई प्रभावित हुई थी. कई ट्रकों में लदा सेब रास्ते में ही खराब हो गया था, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा. अब जब कीमतें बढ़ी हैं, तो किसान और व्यापारी दोनों अपने स्टॉक को बाजार में निकाल रहे हैं और उन्हें बेहतर मुनाफा मिल रहा है.

भारत में ईरानी सेब का कितना आयात होता है?

भारत हर साल ईरान से बड़ी मात्रा में सेब आयात करता है. आंकड़ों के अनुसार, भारत लगभग 1.24 लाख से 1.30 लाख मीट्रिक टन सेब ईरान से आयात करता है, जिसकी कीमत करीब 60 से 65 मिलियन डॉलर होती है. साल 2024 में भारत के कुल सेब आयात में ईरान की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत रही थी. ऐसे में वहां से सप्लाई रुकने का असर भारतीय बाजार पर पड़ना स्वाभाविक है.

कश्मीर में स्टॉक और उत्पादन की स्थिति

कश्मीर घाटी भारत के सेब उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र है. यहां हर साल करीब 20 से 22 लाख मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है, जो देश के कुल उत्पादन का 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है. पिछले सीजन में घाटी के कोल्ड स्टोरेज (CA स्टोरेज) में करीब 5 लाख मीट्रिक टन सेब रखा गया था. इसमें से आधा से ज्यादा स्टॉक बाजार में आ चुका है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में सेब स्टोरेज में मौजूद है.

JKPICCI के प्रवक्ता इजहार जावेद बिजनेसाइन को बताते हैं कि, “करीब 2.5 लाख टन सेब अभी भी कोल्ड स्टोरेज में रखा हुआ है. कीमतें बढ़ने के बाद अब किसान धीरे-धीरे इसे बाजार में भेज रहे हैं.”

वहीं सेब की खेती से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान से आयात लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो घरेलू सेब की कीमतें और बढ़ सकती हैं. इससे किसानों को और फायदा मिलेगा. हालांकि, उपभोक्ताओं के लिए यह थोड़ी चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि उन्हें सेब महंगे दाम पर खरीदना पड़ सकता है.

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