खाद की कालाबाजारी: 190 टन अवैध यूरिया जब्त, 2500 रुपये में बेची जा रही थी 246 वाली बोरी
बेंगलुरु ग्रामीण जिले में DRI ने खाद की कालाबाजारी के बड़े रैकेट का खुलासा किया है. छापेमारी में 190 टन सब्सिडी वाली यूरिया जब्त हुई, जिसे किसानों के बजाय काले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था.
Karnataka News: केंद्र और राज्य सरकार की तमाम सख्ती के बावजूद खाद की कालाबाजारी नहीं रूक रही है. ताजा मामला कर्टनाक के बेंगलुरू जिले में सामने आया है. कहा जा रहा है कि राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) के अधिकारियों ने बेंगलुरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला के पास गेज्जागडाहल्ली में एक गोदाम पर छापा मारकर उर्वरक की कालाबाजारी के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस कार्रवाई में करीब 190 टन अवैध रूप से जमा की गई यूरिया जब्त की गई, जिसकी कीमत लगभग 28 करोड़ रुपये बताई जा रही है.
2,500 रुपये बोरी बेची जा रही थी खाद
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जांच में सामने आया कि यह 45 किलो की सरकारी सब्सिडी वाली यूरिया थी, जिसे किसानों को 246 रुपये प्रति बोरी में मिलना चाहिए था, लेकिन इसे बिचौलियों के जरिए काले बाजार में 2,000 से 2,500 रुपये प्रति बोरी बेचा जा रहा था. इससे कई जिलों के किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. अधिकारियों के अनुसार, ताजिर खान यूसुफ नाम के व्यक्ति ने यह गोदाम करीब छह महीने पहले 40,000 रुपये मासिक किराये पर लिया था और इसे कर्नाटक के लिए आने वाली सब्सिडी वाली यूरिया को जमा करने और आगे भेजने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था.
तमिलनाडु में हुई छापेमारी के बाद खुला राज
डीआरआई अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा राज्य को भेजी गई यूरिया पहले इस गोदाम में लाई जाती थी और वहीं जमा की जाती थी. बाद में 45 किलो की बोरियों से यूरिया निकालकर उसे 50 किलो की बोरियों में दोबारा पैक किया जाता था और तमिलनाडु भेजकर ऊंचे दामों पर अवैध रूप से बेचा जाता था. बेंगलुरु की इस कार्रवाई का सुराग तमिलनाडु में हुई एक छापेमारी के दौरान मिली खास जानकारी से मिला.
मालिक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया
गोदाम के मालिक को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है और जांच जारी है. अधिकारियों को शक है कि इस रैकेट में एक बड़ा नेटवर्क शामिल है और कुछ सरकारी कर्मचारियों की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा रहा है. इस खुलासे से किसानों में गुस्सा है, क्योंकि खेती के सीजन में उन्हें यूरिया की भारी कमी झेलनी पड़ रही है. सब्सिडी वाली यूरिया की अवैध तस्करी और कालाबाजारी से राज्य के कई हिस्सों में संकट और गहरा गया है, जिससे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.