Milk Price Hike: देश में दूध की कीमतें आने वाले महीनों में फिर बढ़ सकती हैं. डेयरी उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि यदि अल नीनो के असर और कमजोर मॉनसून के कारण चारे की कमी बढ़ती है, तो दूध उत्पादन प्रभावित हो सकता है. ऐसे में जुलाई या अगस्त तक दूध के दामों में 3-4 फीसदी तक और बढ़ोतरी हो सकती है. दरअसल, कम बारिश होने पर किसानों को पशुओं के लिए चारा और पानी जुटाने में परेशानी होती है. इससे कई किसान पशुओं की संख्या घटा देते हैं, जिसका असर दूध उत्पादन पर पड़ता है. उत्पादन कम होने पर बाजार में दूध महंगा हो जाता है.
इस साल मई में ही कई बड़ी डेयरी कंपनियों ने दूध के दाम 2-3 फीसदी बढ़ाए थे. इनमें अमूल, मदर डेयरी और पराग मिल्क फूड्स शामिल हैं. वहीं Aavin ने गर्मी के असर के चलते दूध की आपूर्ति में कटौती की है. पैराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह के अनुसार, यदि प्रमुख दुग्ध उत्पादक क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम रहती है, तो जुलाई तक दूध की कीमतों में 3-4 फीसदी की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. संभावित संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को अधिक चारा उत्पादन करने की सलाह दी है. वहीं कई डेयरी कंपनियां भी पशुपालकों के साथ मिलकर चारा प्रबंधन की योजना पर काम कर रही हैं, ताकि दूध उत्पादन पर असर कम से कम पड़े.
पशुओं के चारे की कमी हो सकती है
द इकॉनोमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के कारण आने वाले समय में पशुओं के चारे की कमी हो सकती है. इस आशंका को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने पशुपालकों को अभी से सतर्क रहने और चारा फसलों की खेती की योजना बनाने की सलाह दी है. महाराष्ट्र के पशुपालन आयुक्त किरण पाटिल ने कहा कि अल नीनो के चलते भविष्य में चारे की कमी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. इसलिए राज्य के सभी पशुपालकों को अभी से चारे की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, ताकि पशुधन और दूध उत्पादन पर कोई नकारात्मक असर न पड़े.
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कम बारिश का प्रभाव कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है
वहीं, डेयरी क्षेत्र की प्रमुख संस्था अमूल का कहना है कि वह मॉनसून की स्थिति पर नजर बनाए हुए है. कंपनी के अनुसार फिलहाल चारे की उपलब्धता को लेकर कोई बड़ी चिंता नहीं है. गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक जयन मेहता ने द इकॉनोमिक टाइम्स से कहा कि अभी अल नीनो का दूध की उपलब्धता पर कोई सीधा असर नहीं दिख रहा है. उन्होंने कहा कि कम बारिश का प्रभाव आमतौर पर कुछ क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है और इसका असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होता.
दूध उत्पादन और कीमतों पर असर पड़ सकता है
हालांकि, यदि मॉनसून कमजोर रहता है और चारे की कमी बढ़ती है, तो आने वाले महीनों में दूध उत्पादन और कीमतों पर असर पड़ सकता है. इसलिए सरकार और डेयरी कंपनियां पहले से तैयारी में जुट गई हैं. संभावित मौसम संबंधी चुनौतियों और चारे की स्थिति को देखते हुए मदर डेयरी ने कहा है कि वह अपने सभी दूध खरीद क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर रही है. मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयरथीर्था चारी ने कहा कि कंपनी राज्यवार आधार पर अपने खरीद नेटवर्क की स्थिति पर नजर रखे हुए है. जहां भी आवश्यकता महसूस होगी, वहां प्रभाव को कम करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि कंपनी संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रही है, ताकि दूध की खरीद और आपूर्ति व्यवस्था पर किसी तरह का बड़ा असर न पड़े.