खत्म होगी पुरानी मंडी व्यवस्था! नए कृषि विपणन कानून लाने के प्रस्ताव को मंजूरी.. किसानों को सीधा फायदा

ओडिशा सरकार ने OAPM Act, 1956 को खत्म कर नया कृषि विपणन कानून लाने का फैसला किया है. नए कानून के तहत किसान राज्य में कहीं भी फसल बेच सकेंगे, ई-ट्रेडिंग और ई-नीलामी की सुविधा मिलेगी. सरकार का दावा है कि इससे किसानों को बेहतर दाम, ज्यादा बाजार और निजी निवेश का लाभ मिलेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 15 Jul, 2026 | 04:15 PM

Odisha News: ओडिशा सरकार ने किसानों के लिए कृषि मंडी व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ओडिशा कृषि उपज मंडी (OAPM) अधिनियम, 1956 को खत्म कर नया कृषि विपणन कानून लाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. सरकार का कहना है कि नए कानून से किसानों को अपनी उपज बेचने के ज्यादा विकल्प मिलेंगे, बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उन्हें बेहतर कीमत मिलने में मदद मिलेगी.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि ओडिशा कृषि उपज मंडी (OAPM) अधिनियम वर्ष 1957 से लागू था. इसे किसानों को शोषण से बचाने और उनकी उपज का उचित दाम दिलाने के उद्देश्य से बनाया गया था. उन्होंने कहा कि समय के साथ यह व्यवस्था काफी सीमित और एकाधिकार वाली हो गई. इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा कम हुई, निजी निवेश नहीं बढ़ पाया और मंडियों का विकास भी प्रभावित हुआ. इसके कारण किसानों को अपनी फसल का कम दाम मिलता रहा, जबकि उपभोक्ताओं को ज्यादा कीमत चुकानी पड़ी.

किसान पशुधन को राज्य में कहीं भी बेच सकेंगे

उन्होंने बताया कि नया कृषि विपणन कानून मौजूदा बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा. साथ ही इसे केंद्र सरकार के मॉडल कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम, 2017 के अनुरूप बनाया जाएगा, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और अपनी उपज बेचने के अधिक अवसर मिल सकें. मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि नए कानून में कई बड़े बदलाव किए गए हैं. इसके तहत किसान अपनी फसल और पशुधन को राज्य में कहीं भी बेच सकेंगे. यानी खरीद-बिक्री पर क्षेत्रीय सीमाएं खत्म कर पूरे ओडिशा को एकीकृत कृषि बाजार बनाने की तैयारी है.

ई-ट्रेडिंग और ई-नीलामी जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी

नए कानून में किसानों को सीधे खरीदारों को उपज बेचने, ई-ट्रेडिंग और ई-नीलामी जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी. इससे किसानों को ज्यादा खरीदार मिलेंगे और उनकी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी. इसके अलावा, पूरे राज्य के लिए एक ही ट्रेडिंग लाइसेंस और एक बार ही बाजार शुल्क (मार्केट फीस) लेने की व्यवस्था होगी. सरकार का कहना है कि इससे दूसरे राज्यों के साथ व्यापार आसान होगा और निजी मंडियां, फूड प्रोसेसिंग कंपनियां, निर्यातक तथा बड़े खरीदार भी कृषि बाजार से जुड़ सकेंगे.

बाजार से जुड़ेंगे छोटे और सीमांत किसान

नए कानून के तहत फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज  और साइलो को भी बाजार के उप-केंद्र (सब-यार्ड) का दर्जा दिया जाएगा. इससे फसलों के बेहतर भंडारण की सुविधा मिलेगी और सप्लाई चेन मजबूत होगी. सरकार छोटे और सीमांत किसानों को भी बाजार से जोड़ने पर जोर दे रही है. इसके लिए किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी समितियां, स्वयं सहायता समूह (SHG) और अन्य किसान समूहों को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि किसान मिलकर अपनी उपज बेहतर तरीके से बेच सकें.

 

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Published: 15 Jul, 2026 | 04:10 PM

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