Rajasthan Agriculture News: चना की गिरती कीमत से परेशान राजस्थान के किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अन्नदाता 5 मई को किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट के नेतृत्व में जयपुर में एकत्र होंगे. इस दौरान चने की पूरी खरीद के पंजीकरण की मांग की जाएगी. वहीं, रामपाल जाट ने ‘किसान इंडिया’ से बात करते हुए कहा कि राजस्थान की मंडियों में चने का रेट न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे चला गया है. ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. कई किसान कीमत में गिरावट आने से लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं.
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 5,875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन बाजार में इसका भाव 5,000 से 5,200 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के चने की पूरी खरीद के आदेश के बावजूद राजस्थान सरकार की ओर से अड़चनें पैदा की जा रही हैं, जिससे किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 775 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
चना खरीद की व्यवस्था पूरी तरह से लचर
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत चना, मसूर, उड़द और अरहर की पूरी खरीद के निर्देश जारी किए थे. इसके बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई और नेफैड तथा एनसीसीएफ को सीधे खरीद की जिम्मेदारी दी गई. लेकिन राजस्थान सरकार के असहयोग और बाधाओं के कारण ये संस्थाएं ठीक से खरीद नहीं कर पा रही हैं. नेफैड का राजस्थान में केवल अजमेर जिले के किशनगढ़ में ही एक केंद्र शुरू हो पाया है, जहां भी एक किसान से एक दिन में सिर्फ 40 क्विंटल तक चना खरीदा जा रहा है. इससे केंद्र सरकार के आदेशों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं.
कीमत में गिरावट से किसानों को नुकसान
किसान नेता ने कहा कि राजस्थान के कई जिलों में किसानों की आजीविका खरीफ में मूंग और रबी में चने की खेती पर निर्भर है. इनके उत्पादन से ही उनके परिवार की आर्थिक स्थिति चलती है. लेकिन बाजार में कम दाम मिलने के कारण किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक क्विंटल पर लगभग 775 रुपये के नुकसान के हिसाब से अगर कोई किसान 100 क्विंटल चना बेचता है, तो उसे करीब 77,500 रुपये का घाटा हो जाता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है. जबकि इस मिशन का उद्देश्य देश को दालों के आयात पर निर्भरता से मुक्त करना और किसानों की आय बढ़ाना है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखा गया पत्र
किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने कहा है कि राजस्थान सरकार किसानों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करती है, लेकिन व्यवहार में इसके उलट काम हो रहा है. इस मुद्दे को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है. इससे पहले इसी तरह का पत्र केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी भेजा जा चुका है. इस पत्र की प्रतियां गृह मंत्री, सहकारिता मंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और राजस्थान के सभी सांसदों व विधायकों को भी भेजी गई हैं.