Rajasthan News: राजस्थान में अब ऑनलाइन होगी खाद की बिक्री, 18 जिलों में नई व्यवस्था लागू

Digital Fertilizer Sale: राजस्थान में किसानों को खाद आसानी से उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल उर्वरक बिक्री व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है. अब तक 18 जिलों में यह सिस्टम लागू हो चुका है. एक लाख से ज्यादा किसान करीब 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिजिटल बुकिंग कर चुके हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 5 Sep, 2026 | 03:57 PM

Fertilizer Booking: राजस्थान के किसानों के लिए खाद खरीदने की प्रक्रिया जल्द और आसान होने वाली है. किसानों को उनकी जरूरत के हिसाब से सब्सिडी वाला उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) व्यवस्था का धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में विस्तार कर रही है. डिजिटल तकनीक पर आधारित इस सिस्टम का मकसद खाद की मांग, उपलब्धता और बिक्री पर नजर रखना है, ताकि जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद मिल सके और कालाबाजारी व जमाखोरी जैसी शिकायतों पर रोक लगाई जा सके.

18 जिलों में शुरू हो चुकी है डिजिटल व्यवस्था

कृषि विभाग के मुताबिक, डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन के वर्जन 3.77 के जरिए राजस्थान के 18 जिलों में डिजिटल खाद वितरण व्यवस्था लागू हो चुकी है. इसे पूरे प्रदेश में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है. इस व्यवस्था की शुरुआत सिरोही और राजसमंद से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर हुई थी. यहां मिले अच्छे नतीजों के बाद दूसरे जिलों को भी इससे जोड़ा गया. इसके बाद बूंदी, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा, धौलपुर और चूरू को शामिल किया गया. फिर बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक में भी यह व्यवस्था शुरू की गई.

एक लाख से ज्यादा किसानों ने की यूरिया की बुकिंग

कृषि विभाग के अनुसार, शुरुआती दो चरणों में ही एक लाख से ज्यादा किसानों ने करीब 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की डिजिटल बुकिंग की है. किसानों की ओर से इस प्रोसेस को आसान और सुविधाजनक बताया गया है. नई व्यवस्था में किसान पहले अपनी जरूरत के हिसाब से खाद की बुकिंग करेंगे. बुकिंग पूरी होने के बाद उन्हें एक टोकन मिलेगा, जिसकी वैधता 48 घंटे होगी. इस टोकन के आधार पर किसान अपने नजदीकी अधिकृत खाद विक्रेता से यूरिया ले सकेंगे. हालांकि, अगर किसान 48 घंटे के अंदर खाद नहीं ले पाता है तो उसे फिर से बुकिंग करनी होगी.

खाद लेने के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं

सरकार को उम्मीद है कि डिजिटल बुकिंग शुरू होने से किसानों को खाद के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. साथ ही, लंबी कतारों में खड़े रहने की परेशानी भी कम हो सकती है. इस व्यवस्था का एक बड़ा फायदा यह होगा कि विभाग को यह पता चल सकेगा कि किस इलाके में कितनी खाद की जरूरत है और कहां कितना स्टॉक उपलब्ध है. इससे खाद की मांग और सप्लाई के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद मिलेगी.

फार्मर आईडी से होगी खाद की बिक्री

नई व्यवस्था में खाद की बिक्री फार्मर आईडी के आधार पर की जाएगी. कृषि विभाग के मुताबिक राजस्थान में अब तक 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं. सरकार कृषि क्षेत्र से जुड़ी डिजिटल सेवाओं को मजबूत करने के लिए जल्द एग्रीस्टैक कमिश्नरेट भी स्थापित करने की तैयारी कर रही है. इससे किसानों से जुड़ी अलग-अलग सेवाओं को डिजिटल तरीके से जोड़ने में मदद मिलेगी.

कालाबाजारी और ओवरचार्जिंग पर लगेगी रोक

डिजिटल सिस्टम लागू होने से सब्सिडी वाले यूरिया की गलत तरीके से बिक्री पर नजर रखना आसान होगा. इससे ऐसे लोगों पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी जो जरूरत से ज्यादा खाद खरीदकर उसका गलत इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा दुकानदारों द्वारा तय कीमत से ज्यादा पैसे लेने या खाद के साथ जबरन दूसरे सामान खरीदने के लिए कहने जैसी शिकायतों पर भी लगाम लग सकती है. अधिकारियों को दुकानों पर उपलब्ध खाद के स्टॉक की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी मिल सकेगी.

सरकार को मिल रही है प्रोत्साहन राशि

इस डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्य सरकार को वित्तीय प्रोत्साहन भी मिल रहा है. कृषि विभाग के अनुसार, सिरोही और राजसमंद में व्यवस्था लागू करने पर करीब 175 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई है. वहीं, अगर यह सिस्टम पूरे राजस्थान में लागू किया जाता है तो करीब 675 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की संभावना है.

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Published: 5 Sep, 2026 | 03:50 PM

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