देश के कई हिस्सों में अंडे महंगे हो गए हैं. फार्म-गेट पर एक अंडे का भाव करीब 7 रुपये पहुंच गया है, जबकि खुदरा बाजार में यह 8.50 से 9 रुपये में बिक रहा है. अंडे महंगे होने की बड़ी वजह पोल्ट्री फीड की बढ़ती लागत है. नेशनल एग कोऑर्डिनेशन कमेटी के मुताबिक, अंडे के सूचीबद्ध केंद्रों पर औसत भाव अप्रैल में 5.07 रुपये से बढ़कर जुलाई में 6.82 रुपये प्रति अंडा हो गया था. हालांकि, अगस्त में यह घटकर 5.46 रुपये रह गया. दिल्ली में भी औसत भाव अप्रैल के 4.11 रुपये से बढ़कर जुलाई में 6.70 रुपये हुआ और अगस्त में 5.47 रुपये पर आ गया.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अंडों की कीमत बढ़ने की बड़ी वजह मक्का की बढ़ती मांग और कीमत है. मक्का का इस्तेमाल मुर्गियों के दाने के साथ-साथ इथेनॉल बनाने में भी होता है. ज्यादा मक्का डिस्टिलरी में जाने से पोल्ट्री किसानों को बची हुई मक्का के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है. अंडा उत्पादन की कुल लागत में 70 फीसदी से ज्यादा हिस्सा फीड का होता है, इसलिए दाने की कीमत बढ़ने से अंडे की लागत भी बढ़ रही है.
पोल्ट्री फीड की कीमत 25 फीसदी तक बढ़ी, अंडा उत्पादन की लागत पर असर
पोल्ट्री फेडरेशन ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव रिकी थापर के मुताबिक, मुर्गियों के लिए इस्तेमाल होने वाला खास लेयर फीड अब 30,000 से 32,000 रुपये प्रति टन हो गया है. अप्रैल में इसकी कीमत करीब 24,000 रुपये प्रति टन थी. यानी चार महीने में फीड के दाम 20 से 25 फीसदी तक बढ़ गए हैं. इससे अंडा उत्पादन की लागत बढ़ रही है.
पोल्ट्री उद्योग में फीड की लागत लगातार बढ़ रही है
मक्के की कीमत अप्रैल के करीब 21,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर 26,500-27,000 रुपये हो गई है. वहीं, डी-ऑयल्ड राइस ब्रान के दाम 14,000 से बढ़कर 22,000 रुपये प्रति टन हो गए हैं. फीड में इस्तेमाल होने वाले लाइसिन, मेथियोनिन, अमीनो एसिड और विटामिन का बड़ा हिस्सा यूरोप से आयात होता है. ईरान युद्ध के बाद माल ढुलाई की लागत कई गुना बढ़ने से इनकी कीमत भी बढ़ गई है.
अंडे महंगे होने के बावजूद किसानों का मुनाफा नहीं बढ़ा
अंडे के खुदरा भाव बढ़ने के बावजूद किसानों का मुनाफा नहीं बढ़ रहा है. अभि एग्स के सह-संस्थापक एसवीवी डोरा रेड्डी के मुताबिक, फीड और दूसरी लागतें ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं. कई किसान घाटे में काम कर रहे हैं, जबकि कुछ का मुनाफा घटकर सिर्फ 1-2 फीसदी रह गया है. गुरुग्राम के एक पोल्ट्री किसान ने बताया कि उनकी यूनिट पिछले दो साल से करीब 60 फीसदी क्षमता पर चल रही है. उन्होंने कहा कि एथेनॉल की मांग बढ़ने के बाद मक्के के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव रहा है, जिससे किसानों का मुनाफा प्रभावित हुआ है.