किसान संघ के विरोध के बावजूद राजस्थान में बीटी कपास (Bt Cotton) हाईब्रिड बीजों की बिक्री को मंजूरी दे दी गई है. राजस्थान में खरीफ 2026 सीजन के लिए बीटी कपास (Bt Cotton) हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता कराने का आदेश दिया है. राज्य सरकार इसे किसानों के लिए राहत भरा फैसला बता रही है. हालांकि, पश्चिमी जिलों में बिक्री पर रोक बरकरार रखी गई है.
राजस्थान सरकार के नोटीफिकेशन में कहा गया है कि खरीफ 2026 सीजन के लिए बीटी कपास (Bt Cotton) हाइब्रिड बीजों की बिक्री की मंजूरी दी जा रही है. राज्य सरकार ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति और बीटी कपास पर स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर यह अनुमति दी है.
34 कंपनियों को मिली बिक्री की जिम्मेदारी
राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस निर्णय के तहत 34 अधिकृत बीज कंपनियां तय की गई हैं, जो राज्यभर में बीज की बिक्री कर सकेंगी. इन कंपनियों का चयन केंद्र सरकार की जेनेटिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (GEAC) की सिफारिशों के आधार पर किया गया है.
कपास बीज बिक्री नियम तय किए
सरकार ने बीजों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पक्की करने के लिए सख्त नियम भी लागू किए हैं, जिनमें हर पैकेट पर QR कोड अनिवार्य करना, निर्धारित कीमत से अधिक मूल्य न लेने का प्रावधान और बीजों का परीक्षण कृषि अनुसंधान केंद्रों पर कराना शामिल है. इसके साथ ही किसानों को बुवाई से लेकर कटाई तक ट्रेनिंग देने और लगभग 20 फीसदी क्षेत्र में रिफ्यूज बीज का उपयोग अनिवार्य किया गया है.
पश्चिमी जिलों में बिक्री पर रोक लगी
राज्य के पश्चिमी जिलों जैसे श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर में सफेद मक्खी और CLCuD रोग से प्रभावित किस्मों की बिक्री पर रोक लगाई गई है. कुल मिलाकर इस फैसले से किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध होंगे और कपास उत्पादन तथा आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है.
भारतीय किसान संघ ने विरोध किया
दादा लाड कपास तकनीक अपनाने को बढ़ावा दे सरकार
भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने सुझाव दिया कि सरकार जीएम बीजों के बजाय नॉन जीएम हाइब्रिड कपास बीजों के विकास उनके उत्पादन और बिक्री के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था करे. घरेलू जरूरतों को मैनेज करने व निर्यात की दृष्टि से नॉन जीएम कपास उत्पादन बढ़ाने कि लिये आईसीएआर से प्रमाणित दादा लाड कपास तकनीक अपनाने की सलाह दी. इसमें कपास की पैदावार 300 फीसदी तक बढ़ जाती है.