Sariska Tiger Reserve: राजस्थान के अलवर स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए दो बड़ी योजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं. एक तरफ यहां करीब 7 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को रिजर्व में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, तो दूसरी तरफ आधुनिक वन्यजीव अस्पताल और जांच केंद्र को मंजूरी मिल चुकी है. इस कदम से सरिस्का में रहने वाले करीब 20 हजार वन्यजीवों को बेहतर इलाज और सुरक्षित आवास मिलने की उम्मीद है. लंबे समय से लंबित जमीन हस्तांतरण और अतिक्रमण से जुड़े मामलों का भी अब समाधान किया जा रहा है.
सरिस्का में बनेगा आधुनिक वन्यजीव अस्पताल
सरिस्का टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों के इलाज के लिए अब उन्हें बाहर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने यहां आधुनिक वन्यजीव अस्पताल और जांच केंद्र स्थापित करने को मंजूरी दे दी है. ये अस्पताल कटीघाटी क्षेत्र में प्रस्तावित चिड़ियाघर परियोजना का हिस्सा होगा. अधिकारियों के अनुसार, इस अस्पताल में अत्याधुनिक मशीनें और विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की टीम तैनात की जाएगी. इससे घायल या बीमार वन्यजीवों का इलाज समय पर और बेहतर तरीके से हो सकेगा. अभी तक सरिस्का में प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन गंभीर स्थिति में वन्यजीवों को जयपुर या अन्य शहरों में ले जाना पड़ता है. नए अस्पताल के बनने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी. केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस परियोजना को सरिस्का के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है और कहा है कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा.
20 हजार वन्यजीवों को मिलेगा सीधा फायदा
सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघ, बघेरे, सांभर, चीतल और अन्य वन्यजीवों की बड़ी संख्या पाई जाती है. यहां करीब 20 हजार वन्यजीव मौजूद हैं. नए अस्पताल के बनने से इन सभी वन्यजीवों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी. विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज मिलने से वन्यजीवों की मृत्यु दर कम होगी और संरक्षण कार्य भी मजबूत होगा. वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि सरिस्का में यह कदम पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करेगा.
7 हजार हेक्टेयर जमीन सरिस्का में शामिल करने की तैयारी
सरिस्का टाइगर रिजर्व के विस्तार के तहत करीब 7 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को रिजर्व में शामिल करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. इसके लिए राजस्व विभाग द्वारा डिजिटल नक्शे तैयार किए जा रहे हैं. ये भूमि सरिस्का के संरक्षण क्षेत्र को और मजबूत बनाएगी. इससे वन्यजीवों को अधिक सुरक्षित और बड़ा आवास क्षेत्र मिलेगा. अधिकारियों के अनुसार, अगले महीने तक यह भूमि सरिस्का के नाम दर्ज हो सकती है. इसके बाद रिजर्व का क्षेत्र और बड़ा हो जाएगा, जिससे संरक्षण कार्यों को और मजबूती मिलेगी.
82 गांवों की जमीन और अतिक्रमण का मामला
वर्ष 2007-08 में सरिस्का की भूमि का नोटिफिकेशन जारी किया गया था, लेकिन उस समय 82 गांवों की करीब 61 हजार हेक्टेयर भूमि रिजर्व के नाम दर्ज नहीं हो सकी थी. इस दौरान कई जगहों पर अतिक्रमण कर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू हो गई थीं. मामला बाद में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक पहुंचा. उच्च स्तरीय समिति के हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने करीब 54 हजार हेक्टेयर भूमि सरिस्का के नाम दर्ज कर दी है. बाकी 7 हजार हेक्टेयर भूमि का मामला तकनीकी कारणों से अटका हुआ था. अब राजस्व विभाग इस तकनीकी समस्या को दूर करने में लगा है, ताकि पूरी भूमि सरिस्का के नाम दर्ज की जा सके. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भूमि हस्तांतरण पूरा होने के बाद सरिस्का का संरक्षण और मजबूत होगा और वन्यजीवों के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकेगा.