VB-G RAM-G Scheme: ग्रामीण इलाकों में रोजगार की मांग को लेकर अगस्त का आंकड़ा कुछ राहत देने वाला रहा है. वीबी-जी राम-जी योजना के तहत अगस्त 2026 में 1.24 करोड़ परिवारों ने काम की मांग की. इससे पहले जुलाई में करीब 1 करोड़ परिवारों ने रोजगार मांगा था. यानी एक महीने में काम की मांग में करीब 24 फीसदी का सुधार हुआ है. खास बात यह है कि अगस्त 2025 में 1.18 करोड़ परिवारों ने काम की मांग की थी. इस लिहाज से इस साल अगस्त में ग्रामीण रोजगार की मांग पिछले साल के इसी महीने से भी ज्यादा रही.
जुलाई के मुकाबले अगस्त में बढ़ी रोजगार की मांग
नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू होने के बाद जुलाई में काम की मांग काफी कम रही थी. जुलाई 2026 में करीब 1 करोड़ परिवारों ने रोजगार की मांग दर्ज कराई. अगस्त में यह संख्या बढ़कर 1.24 करोड़ हो गई. इससे संकेत मिलता है कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार की जरूरत एक बार फिर बढ़ी है. खेती के अलावा जिन परिवारों को स्थानीय स्तर पर मजदूरी के दूसरे साधन कम मिलते हैं, उनके लिए सरकारी रोजगार योजना आय का अहम सहारा बन सकती है.
पहले कई महीनों से लगातार गिर रही थी मांग
नई योजना से पहले ग्रामीण रोजगार की मांग में लगातार गिरावट देखी जा रही थी. जून 2026 में मनरेगा के तहत करीब 2.245 करोड़ परिवारों ने काम मांगा था, जो पिछले साल के मुकाबले 18.6 फीसदी कम था. मई में 2.048 करोड़ परिवारों ने रोजगार की मांग की थी और इसमें करीब 27.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. अप्रैल में यह आंकड़ा करीब 1.3 करोड़ परिवार रहा, जो सालाना आधार पर 35.3 फीसदी कम था. ऐसे में अगस्त में 1.24 करोड़ परिवारों की मांग दर्ज होना ग्रामीण रोजगार के लिहाज से एक अहम बदलाव माना जा सकता है.
एक जुलाई से लागू हुई नई योजना
सरकार ने 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह वीबी-जी राम-जी योजना लागू की है. इस योजना का मकसद ग्रामीण परिवारों को रोजगार का सहारा देना और गांवों में आजीविका के अवसर बढ़ाना है. शुरुआती महीनों में काम की मांग में आई गिरावट ने योजना को लेकर चर्चा जरूर बढ़ाई थी. लेकिन अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई की तुलना में ग्रामीण परिवारों की ओर से रोजगार की मांग बढ़ी है.
मॉनसून और खेती का भी दिख रहा असर
ग्रामीण रोजगार की तस्वीर समझने के लिए खेती और मौसम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. भारत मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून सामान्य से करीब 16.3 फीसदी कम रहा. इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में खरीफ फसलों की बुवाई का काम जारी रहा. अगस्त के अंत तक खरीफ फसलों का कुल रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 1.7 फीसदी कम और पिछले पांच साल के औसत से करीब 3 फीसदी कम रहा. खेती का काम बढ़ने या घटने से गांवों में मजदूरी की उपलब्धता और सरकारी रोजगार की जरूरत दोनों प्रभावित होती हैं. ऐसे में कमजोर मॉनसून के बीच रोजगार की मांग में अगस्त में आया सुधार सरकार के लिए अहम संकेत माना जा रहा है.
आगे के आंकड़ों पर रहेगी नजर
अगस्त में रोजगार की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं. हालांकि आने वाले महीनों में योजना के तहत काम की मांग किस दिशा में जाती है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण होगा. खेती का मौसम, बारिश की स्थिति और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के दूसरे विकल्प इस मांग को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में सरकार की नई रोजगार योजना ग्रामीण परिवारों को कितना स्थायी सहारा दे पाती है, इसका आकलन आने वाले महीनों के आंकड़ों से और साफ होगा.