कृषि शिक्षा पर सख्त रेगुलेशन लाएगा मंत्रालय, बिना खेत के कृषि संस्थान चलाना और डिग्री बांटना खतरनाक

Agricultural Education Regulations: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आजकल कई प्राइवेट कृषि संस्थान बन गए हैं. इस पर रेगुलेशन होना चाहिए. वरना, कोई भी व्यक्ति सिर्फ पैसे कमाने के लिए कृषि शिक्षा देना और डिग्रियां बांटना शुरू कर देगा.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 25 Aug, 2026 | 06:46 PM

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हमारे पास 80 से ज्यादा कृषि विश्वविद्यालय हैं. फिर भी प्राइवेट कृषि विश्वविद्यालय और कृषि संस्थान खुल रहे हैं, जो चिंताजनक है. उन्होंने कहा कि ऐसे नहीं चलेगा कि मनमर्जी से जो चाहे कृषि शिक्षा पढ़ाना शुरू कर दे. निजी कृषि विश्वविद्यालयों और कृषि संस्थानों के पास खेत है नहीं और कृषि की पढ़ाई कराई जा रही है, ऐसे नहीं चलेगा. उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक और कृषि शिक्षा सचिव डॉ. एम एल जाट को रेगुलेशन बनाने के निर्देश दिए हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में कृषि विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलरों के 36वें सालाना सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत विकसित कृषि और समृद्ध किसान के लक्ष्य के लिए एग्रीकल्चरल स्टडीज बहुत जरूरी हैं. आज की जरूरतों और हालात के हिसाब से एग्रीकल्चरल स्टडीज को नए सिरे से सोचना होगा. हमें आज की चुनौतियों का समाधान खोजना होगा – चाहे वह क्लाइमेट चेंज हो, ग्लोबल वार्मिंग हो, बदलती टेक्नोलॉजी हो, नई बीमारियां हों या मिट्टी की खराब होती सेहत हो. इस पर आज से ही काम करना होगा और युवाओं को इन बिंदुओं पर गहन अध्ययन का मौका देना होगा, ताकि जब वह पढ़कर निकलें तो इन चुनौतियां का चुटकियों में हल निकाल सकें.

कृषि शिक्षा के लिए रेगुलेशन बनाने को कहा

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि यह सच है कि हमारा कृषि शिक्षा सिस्टम दुनिया के सबसे बड़े सिस्टम में से एक है. इसमें कोई शक नहीं है. हमारे पास 80 से ज्यादा कृषि विश्वविद्यालय हैं. इनमें सरकारी सेक्टर के राज्य विश्वविद्यालय और केंद्रीय विश्वविद्यालय शामिल हैं, और आजकल कई प्राइवेट कृषि संस्थान भी बन गए हैं. मेरा यह भी कहना है कि कहीं न कहीं कुछ रेगुलेशन होना चाहिए. वरना, कोई भी व्यक्ति सिर्फ पैसे कमाने के लिए कृषि शिक्षा देना शुरू कर देगा. उन्होंने कहा कि आजकल प्राइवेट भी कृषि संस्थान खुल रहे हैं. रेगुलेशन बनाने की जरूरत है ताकि मनमर्जी से जो चाहे कृषि डिग्री ना बांटने लगे और पैसे न बनाने लगे.

बिना खेती की जमीन के कृषि विश्वविद्यालय नहीं चल सकता है

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मुझे लगता है कि हमें इस पर भी विचार करना चाहिए और सुझाव देने चाहिए कि क्या कोई कृषि विश्वविद्यालय बिना किसी खेती की जमीन के काम कर सकता है? क्या कोई कृषि कॉलेज इसके बिना चल सकता है? इस पर विचार करना पड़ेगा. खेत है नहीं तो एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी कैसे चलेगी, ऐसा नहीं हो सकता है. सिर्फ कागज पर डिग्रियां बांटना काफी नहीं होगा. उन्होंने कहा कि निजी कृषि विश्वविद्यालयों के पास खेत नहीं हैं, ऐसे नहीं चलेगा. समय बदल रहा है, खेती भी बदल रही है. कृषि शिक्षा के पैटर्न को भी बदलना होगा. क्लामेट चेंज का खतरा है, पानी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है.

असली शिक्षा क्लासरूम में नहीं खेतों और किसानों के बीच होनी चाहिए

उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल डिग्री देना नहीं होना चाहिए. लक्ष्य यह होना चाहिए कि हमारी शिक्षा और अनुसंधान से किसानों के जीवन में कितना परिवर्तन आया. हमें डिग्री से दक्षता, ज्ञान के प्रसार से नवाचार और नवाचार से समस्या के समाधान की ओर बढ़ना होगा. कृषि मंत्री ने एग्रीकल्चर डिग्री प्रोग्राम वाले युवा छात्रों को ट्रेनिंग देने के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि आज की जरूरत है कि एग्रीकल्चर एजुकेशन के तरीके में AI को शामिल किया जाए. एग्रीकल्चर एजुकेशन के बारे में बात करते हुए मंत्री ने कहा कि ऐसी शिक्षा क्लासरूम में नहीं दी जा सकती, बल्कि यह खेतों में और दूसरे किसानों के बीच होनी चाहिए.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 25 Aug, 2026 | 06:44 PM

लेटेस्ट न्यूज़