धान और कपास जैसी फसलों में कीटों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले कार्बोसल्फान पर अब सरकार की सख्ती बढ़ने वाली है. स्वास्थ्य और पर्यावरण को होने वाले संभावित नुकसान को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस कीटनाशक पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. प्रस्ताव के तहत इसके आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन और इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है. विशेषज्ञ समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में कार्बोसल्फान को इंसानों, पक्षियों, मधुमक्खियों और जलीय जीवों के लिए जोखिम भरा बताया है.
स्वास्थ्य के लिए बेहद जहरीला माना गया कार्बोसल्फान
कार्बोसल्फान एक ऐसा कीटनाशक है, जिसका इस्तेमाल कई फसलों में कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है. सरकार की पंजीकरण समिति ने इसे बेहद जहरीला कीटनाशक माना है. इसके शरीर में जाने पर गंभीर नुकसान हो सकता है और यह शरीर के जरूरी तंत्र पर बुरा असर डाल सकता है.समिति के अनुसार, कार्बोसल्फान शरीर में पहुंचने के बाद एक और जहरीले पदार्थ में बदल सकता है. इससे अचानक और गंभीर जहर का असर हो सकता है. सरकार की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि इसके जहर के असर को खत्म करने के लिए कोई खास दवा यानी एंटीडोट उपलब्ध नहीं है.
पक्षियों और जलीय जीवों के लिए भी खतरा
कार्बोसल्फान का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है. विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर पक्षियों, मधुमक्खियों जैसे परागण करने वाले जीवों, पानी में रहने वाले जीवों और दूसरी ऐसी प्रजातियों पर भी पड़ सकता है, जिनका कीटनाशक के इस्तेमाल से सीधा संबंध नहीं है. यही वजह है कि सरकार अब खेती में इसके इस्तेमाल को जारी रखने के जोखिम पर गंभीरता से विचार कर रही है. सरकार का प्रस्ताव सामने आने के बाद अगर प्रतिबंध लागू होता है तो इसका इस्तेमाल पूरी तरह बंद किया जा सकता है.
धान, कपास और बागवानी फसलों में होता रहा इस्तेमाल
भारत में कार्बोसल्फान का इस्तेमाल धान, कपास और कई बागवानी फसलों में कीटों से बचाव के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, इसके सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 14 जनवरी 2026 को कार्बोसल्फान के इस्तेमाल की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई थी. इस समिति ने 12 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी. इसके बाद पंजीकरण समिति ने भी उपलब्ध जानकारी और सुरक्षा से जुड़े मामलों की समीक्षा की.
आयात से बिक्री तक पर रोक का प्रस्ताव
विशेषज्ञों की रिपोर्ट और पंजीकरण समिति की सलाह के बाद कार्बोसल्फान पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है. सरकारी राजपत्र में जारी मसौदा आदेश के अनुसार, प्रतिबंध लागू होने पर इसके आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन, वितरण और इस्तेमाल पर रोक लग सकती है. इसके साथ ही कार्बोसल्फान के लिए जारी पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू करने का प्रस्ताव है. केंद्र सरकार ने राज्यों को भी आदेश को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है. अब मसौदा आदेश पर आगे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसके अंतिम फैसले पर नजर रहेगी.