बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य है, जिसमें कृषि की भी अहम भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार में लंबे समय से कृषि और किसानों के जीवन स्तर सुधारने का काम कर रहे हैं. हमारी कोशिश होनी चाहिए कि 2047 से पहले ही विकसित भारत का लक्ष्य हासिल किया जाए और इसमें बिहार की अग्रणी भूमिका होगी. मंत्री ने कहा कि कृषि को आकर्षक बनाना जरूरी है, ताकि युवा पीढ़ी खेती की ओर आए. साथ ही दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के बजाय वे बिहार में ही कृषि क्षेत्र में काम करें. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में अब परंपरागत खेती के अलावा फल, सब्जी और फूलों का उत्पादन भी बढ़ रहा है. मंत्री ने कहा कि अगले 5 साल बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. राज्य को देश के शीर्ष 10 राज्यों में लाने के लिए किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर कैश क्रॉप्स की ओर बढ़ना होगा. इससे किसानों की आय और खुशहाली बढ़ेगी.
कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री रहते उन्हें अक्सर अन्य राज्यों का दौरा करना पड़ता था. वहां के लोग कहते थे कि उन्हें भी बिहार जैसी विकास की गति चाहिए. आज बिहार जर्दालू आम, कतरनी चावल, लीची, मखाना आदि का निर्यात देश-विदेश में कर रहा है. मुख्यमंत्री का सपना है कि बिहार के व्यंजन हर राज्य की थाली तक पहुंचे, इसके लिए भंडारण, प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग पर खास ध्यान देना जरूरी है. मंत्री ने कहा कि पिछले दो दशकों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव आए हैं. कृषि रोडमैप के माध्यम से उत्पादन बढ़ाया गया, किसानों की आय बढ़ी और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिला. बदलती जलवायु को ध्यान में रखते हुए खोजपरक और सतत कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की जरूरत है.
जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है. बिहार में कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ आती है. मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देश में बाढ़ को कम करने और बारिश के पानी का सुरक्षित उपयोग करने की कोशिश की गई है. गंगा के पानी का इस्तेमाल और नवादा जैसे शहरों में पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है. पिछले 20 वर्षों में बिहार में तेजी से विकास हुआ है. मंत्री ने कहा कि अगले 5 साल बिहार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. राज्य को देश के शीर्ष 10 राज्यों में लाने के लिए किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर कैश क्रॉप्स की ओर बढ़ना होगा. इससे किसानों की आय और खुशहाली बढ़ेगी.
क्या बोले संजय कुमार झा
वहीं, राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने कहा कि जब सतत कृषि पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा था, तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली कार्यक्रम के जरिए सतत कृषि पर जोर दिया. 2019 में बिहार देश का पहला राज्य बना, जिसने सतत कृषि को मूर्त रूप देने का प्रयास किया. पिछले 20 वर्षों में चार कृषि रोडमैप के जरिए बिहार के कृषि क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं.
जलवायु परिवर्तन का कृषि पर सीधा असर
सस्टेनेबिलिटी मैटर्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का कृषि पर सीधा असर पड़ रहा है. पर्यावरण के अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार, वैज्ञानिक, उद्योग और किसान मिलकर काम करें. कार्यक्रम में नाबार्ड, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और सिडबी के अधिकारी किसानों और किसान उत्पादक संगठनों की मदद के तरीके साझा किए.
ये नेता रहे उपस्थित
दरअसल, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर और कृषि की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पटना स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी में ‘बिहार–झारखंड रीजनल पॉलिसी डायलॉग एंड अवॉर्ड 2026’ का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम सस्टेनेबिलिटी मैटर्स, इंडीएग्री और एनजीओ एक्शन (Alliance for Change, Transformation & Innovation) के संयुक्त प्रयास से आयोजित हुआ. कार्यक्रम में बिहार के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. इस दौरान कृषि मंत्री और संजय झा ने अपनी बातें कहीं.