Sugar Price Fall India: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच आम लोगों के लिए राहत की खबर सामने आई है. बाजार में जल्द ही करीब 3 से 3.5 लाख टन चीनी की अतिरिक्त सप्लाई आ सकती है. यह चीनी पहले से भारतीय रिफाइनरों के पास उपलब्ध है, लेकिन इसे घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति नहीं थी. अब सरकार के हालिया फैसले के बाद इसके बाजार में आने का रास्ता साफ हो गया है.
सरकार के इस कदम से बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है. खासकर आने वाले त्योहारी सीजन में इसकी मांग बढ़ने वाली है, ऐसे में अतिरिक्त स्टॉक बाजार में आने से उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है.
सरकार ने लिया बड़ा फैसला
सरकार ने पिछले सप्ताह 10 लाख टन कच्ची चीनी (Raw Sugar) के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी. इसके साथ ही उन रिफाइनरों को कुछ मात्रा में रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत भी दी गई, जो पहले केवल निर्यात के लिए निर्धारित थी. इसी फैसले के बाद रिफाइनरों के पास मौजूद चीनी का एक हिस्सा जल्द बाजार में पहुंच सकता है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों और उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि, करीब 3 लाख टन से ज्यादा प्रोसेस्ड चीनी की सप्लाई तुरंत शुरू हो सकती है.
चीनी के दाम में 20 फीसदी की गिरावट
सरकार के कदम का असर थोक बाजार में दिखाई देने लगा है. पिछले करीब 10 दिनों में मिलों से निकलने वाली चीनी यानी एक्स-मिल कीमत में लगभग 20 फीसदी की गिरावट आई है. बुधवार को महाराष्ट्र के कोल्हापुर में एक्स-मिल चीनी का भाव करीब 48 रुपये प्रति किलो रहा. वहीं उत्तर प्रदेश में यह कीमत लगभग 53 रुपये प्रति किलो बताई गई. कुछ दिन पहले कीमतें काफी तेजी से बढ़ी थीं. अधिकारियों के मुताबिक एक्स-मिल कीमत का कुछ ही दिनों में 48 रुपये से बढ़कर 58-60 रुपये प्रति किलो तक पहुंचना इस बात का संकेत था कि कीमत बढ़ने के पीछे जमाखोरी और अटकलों की भूमिका हो सकती है. उनका कहना है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं थी.
खुदरा कीमतों में भी जल्द दिख सकता है असर
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक सरकार के उठाए कदमों का असर अब दिखने लगा है. एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट आने वाले दिनों में खुदरा बाजार तक पहुंचने की उम्मीद है. बुधवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 65 रुपये प्रति किलो थी. अगर थोक कीमतों में गिरावट बनी रहती है और अतिरिक्त चीनी बाजार में आती है, तो खुदरा ग्राहकों को भी आने वाले दिनों में राहत मिल सकती है.
10 लाख टन कच्ची चीनी का आयात क्यों जरूरी?
सरकार की योजना सिर्फ मौजूदा स्टॉक को बाजार में लाने तक सीमित नहीं है. 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात से आगे चलकर सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी. रिफाइनर इस कच्ची चीनी को प्रोसेस करके तैयार चीनी में बदल सकते हैं. इससे घरेलू बाजार में सप्लाई की कमी होने की आशंका कम होगी और त्योहारों के दौरान बढ़ने वाली मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी.
त्योहारों से पहले बढ़ेगी सप्लाई
त्योहारों के समय मिठाई, बेकरी और दूसरे खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है. ऐसे में मांग बढ़ने से कीमतों पर दबाव आने की आशंका रहती है. सरकार के मौजूदा फैसले का उद्देश्य इसी स्थिति से पहले बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध कराना है. उद्योग संगठन का भी कहना है कि देश में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त है और आने वाले त्योहारी सीजन में लोगों को उचित कीमत पर चीनी मिलने की उम्मीद है. यानी फिलहाल सरकार का फोकस सप्लाई बढ़ाने, जमाखोरी रोकने और कीमतों को सामान्य रखने पर है.