किसानों को बड़ी राहत! सिंचाई के लिए 1 सितंबर से मेत्तूर डैम का पानी छोड़ेगी तमिलनाडु सरकार

Mettur Dam Water Release: तमिलनाडु सरकार ने कावेरी डेल्टा के किसानों की सिंचाई जरूरत को देखते हुए 1 सितंबर से मेत्तूर डैम से 45 दिनों तक पानी छोड़ने का फैसला किया है. पानी की मात्रा बांध के जलस्तर और आवक के आधार पर तय होगी. यह फैसला कावेरी जल बंटवारे को लेकर तमिलनाडु-कर्नाटक विवाद के बीच आया है.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 27 Aug, 2026 | 12:24 PM

Mettur Dam: तमिलनाडु में कावेरी डेल्टा के किसानों के लिए राहत की खबर है. राज्य सरकार ने मेत्तूर डैम से पानी छोड़ने का फैसला किया है. यह पानी 1 सितंबर से 45 दिनों तक छोड़ा जाएगा. हालांकि, पानी छोड़ने की मात्रा बांध में मौजूद जल भंडार और उसमें आने वाले पानी के प्रवाह को देखकर तय की जाएगी. सरकार के इस फैसले से कावेरी डेल्टा इलाके में सिंचाई की जरूरत पूरी होने की उम्मीद है.

1 सितंबर से शुरू होगी पानी की सप्लाई

ग्रामीण विकास और जल संसाधन मंत्री एन आनंद ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान कावेरी बेसिन में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई है. इसके बावजूद राज्य सरकार ने पीने के पानी और खेती की जरूरत को देखते हुए मेत्तूर डैम से पानी छोड़ने का निर्णय लिया है. कावेरी डेल्टा क्षेत्र में धान समेत कई फसलों की खेती के लिए बांध के पानी पर काफी निर्भरता रहती है. ऐसे में पानी छोड़ने में देरी से किसानों की चिंता बढ़ रही थी. किसानों और आम लोगों की मांग को देखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया है.

पानी की मात्रा बांध के जलस्तर पर निर्भर

सरकार के मुताबिक मेत्तूर डैम से 45 दिनों तक पानी छोड़ा जाएगा, लेकिन रोजाना कितनी मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा, यह बांध के जलस्तर और उसमें आने वाले पानी पर निर्भर करेगा. इसका मतलब है कि अगर बांध में पानी की आवक कम रहती है तो पानी छोड़ने की मात्रा में भी बदलाव किया जा सकता है. फिलहाल सरकार का मुख्य उद्देश्य पीने के पानी की जरूरत और डेल्टा इलाके की सिंचाई दोनों को संतुलित रखना है.

कावेरी जल विवाद के बीच अहम फैसला

मेत्तूर डैम से पानी छोड़ने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी नदी के पानी को लेकर विवाद चल रहा है. तमिलनाडु का आरोप है कि उसे कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देश के मुताबिक पानी नहीं मिल रहा है.

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में भी तमिलनाडु ने इस मुद्दे को उठाया था. राज्य की ओर से कहा गया कि उसे उसके हिस्से का पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहा है. हालांकि, अदालत ने कहा कि कर्नाटक ने CWMA के निर्देशों के मुताबिक पानी छोड़ा है और तमिलनाडु को अपनी शिकायत संबंधित प्राधिकरण के सामने रखनी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

तमिलनाडु ने कर्नाटक से कावेरी का पानी छोड़े जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. राज्य सरकार ने CWMA के 30 जुलाई के निर्देश को लागू कराने की मांग की थी. इस निर्देश में कर्नाटक को 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ने को कहा गया था. तमिलनाडु ने दावा किया कि उसे कुल 4.536 TMC पानी की जरूरत है, जो 15 दिनों तक रोजाना 3,500 क्यूसेक पानी के बराबर है. राज्य ने इस पानी को 12 अगस्त तक छोड़े जाने की मांग की थी.

किसानों की नजर अब पानी की उपलब्धता पर

कावेरी डेल्टा में खेती के लिए मेत्तूर डैम से पानी छोड़ा जाना लंबे समय से अहम मुद्दा रहा है. इस साल कम बारिश और बांध के जलस्तर को लेकर किसानों की चिंता और बढ़ गई थी. ऐसे में 1 सितंबर से पानी छोड़े जाने के फैसले से किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, आगे बांध में पानी की आवक कैसी रहती है, यह काफी महत्वपूर्ण होगा. सरकार इसी आधार पर पानी छोड़ने की व्यवस्था को आगे तय करेगी. कावेरी जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बीच मेत्तूर डैम से पानी छोड़ने का यह फैसला तमिलनाडु के किसानों के लिए फिलहाल बड़ी राहत माना जा रहा है.

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Published: 27 Aug, 2026 | 12:23 PM

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