Annapurna Summit 2025: किसानों ने खोला सच का पर्दा, सरकार की अनदेखी पर उठाए सवाल, सुझाए खेती के नए तरीके!
Kisan India Annapurna Summit 2025: किसान इंडिया के अन्नपूर्णा समिट 2025 में किसानों की हकीकत और उनकी आवाज ने हर किसी का ध्यान खींचा. किसी ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए, तो किसी ने खेती में नए और आधुनिक तरीकों के सुझाव दिए. हर वक्त चर्चा में यही दिखाई दिया कि किसानों की आवाज अब अनसुनी नहीं रह सकती. इस समिट में कृषि, पशुपालन और डेयरी जैसे विभिन्न सेक्टरों के मुद्दों पर खुलकर बातचीत हुई. किसान नेताओं ने अपनी समस्याएं और अनुभव साझा किए, सरकार की योजनाओं की आलोचना की और यह भी बताया कि कैसे सहकारी समितियों और वैज्ञानिक विधियों के जरिए खेती और डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है.

जैविक खेती पर जोर: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC) के ज्वॉइंट सेक्रेटरी केके त्रिपाठी ने अन्नपूर्णा समिट 2025 (Kisan India Annapurna Summit) में कहा कि केंद्र सरकार सीमांत और महिला किसानों को सस्ती दरों पर जैविक उर्वरक उपलब्ध कराकर जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है.

सहकारी संस्थाओं से बढ़ती आमदनी: केके त्रिपाठी ने बताया कि बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसान पैक्स और सहकारिता सोसायटी से जुड़कर अपनी आमदनी में सुधार कर सकते हैं.

नए बाजार की आवश्यकता: समिट में गुणी प्रकाश जी ने बताया कि किसानों को अपनी उपज का सही मूल्य हासिल करने के लिए मंडियों के बाहर नए और वैकल्पिक बाजार तलाशने की जरूरत है. इससे न केवल बिचौलियों और दलालों का दबाव कम होगा, बल्कि किसान अपनी मेहनत का उचित लाभ भी कमा सकेंगे.

गन्ने की खेती और सरकार की अनदेखी: राराष्ट्रीय किसान मजदूर पार्टी के संस्थापक वीएम सिंह ने अन्नपूर्णा समिट 2025 में कहा कि देश में करोड़ों किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं और इससे उनके परिवार का घर-खर्च चलता है. लेकिन इसके बावजूद केंद्र सरकार इस क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है और अब तक गन्ना मंत्री की नियुक्ति भी नहीं की गई है.

डेयरी सेक्टर में सुधार – आरएस दीक्षित, ओपी सिंह और दुष्यंत भाटी: समिट में डेयरी विशेषज्ञों ने बताया कि गोधन की नस्ल सुधार तकनीक को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाना बेहद जरूरी है. इससे की आमदनी में भी सुधार होगा. उन्होंने कहा कि इसके लिए किसानों का सक्रिय सहयोग और डेयरी स्टार्टअप्स का विश्वास जीतना आवश्यक है.

एकीकृत खेती और प्रशिक्षण: मंजू रानी कश्यप और डीपी सिंह ने कहा कि किसानों को सब्सिडी योजनाओं और केवीके वैज्ञानिकों से प्रशिक्षण लेकर बागवानी, मछलीपालन और पशुपालन में एकीकृत खेती अपनानी चाहिए, जिससे महिलाओं और पुरुषों दोनों को आर्थिक लाभ मिलेगा.(कार्यक्रम के स्पॉन्सर पंजाब स्टेट को–ऑपरेटिव सप्लाई एंड मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड यानी मार्कफेड, मिल्कफेड पंजाब– वेरका, नेक्संस बाइ पीसीए टेक्नोलॉजीज और बीएमएस ऑर्गेनिक फार्मर्स प्रॉड्यूसर कंपनी लिमिटेड थे.)