मार्च में आम की फसल पर जरा सी गलती पड़ सकती है भारी! जानें बंपर उत्पादन का सही तरीका

Mango Farming Tips: मार्च का महीना आते ही आम के पेड़ों पर बौर की खुशबू फैलने लगती है और यही समय तय करता है कि इस साल फसल कितनी अच्छी होगी. लेकिन यही वह नाजुक दौर भी है, जब जरा सी लापरवाही से फूल झड़ सकते हैं और उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है. शाहजहांपुर के जिला उद्यान अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार पाठक बताते हैं कि, अगर किसान इस समय सही देखभाल, पोषण और सिंचाई का ध्यान रखें, तो आम की पैदावार और गुणवत्ता दोनों को कई गुना बढ़ाया जा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 22 Mar, 2026 | 11:30 PM
1 / 6मार्च का महीना आम की फसल के लिए बहुत अहम होता है, क्योंकि इस समय पेड़ों पर बौर आता है और छोटे-छोटे फल बनने लगते हैं. अगर इस समय सही देखभाल और पोषण नहीं दिया जाए, तो फूल झड़ सकते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.

मार्च का महीना आम की फसल के लिए बहुत अहम होता है, क्योंकि इस समय पेड़ों पर बौर आता है और छोटे-छोटे फल बनने लगते हैं. अगर इस समय सही देखभाल और पोषण नहीं दिया जाए, तो फूल झड़ सकते हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.

2 / 6आम के पेड़ों में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना बहुत फायदेमंद होता है. इससे मिट्टी उपजाऊ बनती है और जड़ों को अंदर से ताकत मिलती है. अच्छी मिट्टी होने पर पेड़ खुद ही बेहतर तरीके से पोषण लेता है, जिससे फल का आकार और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं.

आम के पेड़ों में सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालना बहुत फायदेमंद होता है. इससे मिट्टी उपजाऊ बनती है और जड़ों को अंदर से ताकत मिलती है. अच्छी मिट्टी होने पर पेड़ खुद ही बेहतर तरीके से पोषण लेता है, जिससे फल का आकार और स्वाद दोनों बेहतर होते हैं.

3 / 6मार्च में बौर आने के समय बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का छिड़काव करना जरूरी होता है. ये तत्व फूलों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें गिरने से बचाते हैं. सही समय पर स्प्रे करने से फल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ता है.

मार्च में बौर आने के समय बोरॉन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों का छिड़काव करना जरूरी होता है. ये तत्व फूलों को मजबूत बनाते हैं और उन्हें गिरने से बचाते हैं. सही समय पर स्प्रे करने से फल बनने की प्रक्रिया बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ता है.

4 / 6इस समय एनपीके 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करना काफी फायदेमंद होता है. इसे पानी में घोलकर पेड़ों पर स्प्रे करने से फल मजबूत बनते हैं और बीच में गिरने की समस्या कम होती है. इससे आम का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो जाते हैं.

इस समय एनपीके 13:00:45 या पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव करना काफी फायदेमंद होता है. इसे पानी में घोलकर पेड़ों पर स्प्रे करने से फल मजबूत बनते हैं और बीच में गिरने की समस्या कम होती है. इससे आम का आकार और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो जाते हैं.

5 / 6बौर आने के समय ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हल्की सिंचाई ही करें. जब छोटे फल दिखने लगें, तभी नियमित पानी दें. साथ ही पेड़ों के नीचे सूखी घास या पत्तियां बिछाकर मल्चिंग करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम होते हैं.

बौर आने के समय ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए हल्की सिंचाई ही करें. जब छोटे फल दिखने लगें, तभी नियमित पानी दें. साथ ही पेड़ों के नीचे सूखी घास या पत्तियां बिछाकर मल्चिंग करने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी कम होते हैं.

6 / 6मार्च में आम के पेड़ों पर मधुआ, हॉपर और गुझिया जैसे कीटों का खतरा बढ़ जाता है, जो फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके अलावा झुलसा रोग भी फसल को प्रभावित कर सकता है. समय पर दवा का छिड़काव और सही देखभाल से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

मार्च में आम के पेड़ों पर मधुआ, हॉपर और गुझिया जैसे कीटों का खतरा बढ़ जाता है, जो फूलों को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके अलावा झुलसा रोग भी फसल को प्रभावित कर सकता है. समय पर दवा का छिड़काव और सही देखभाल से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.

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Published: 22 Mar, 2026 | 11:30 PM
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