“जय जवान, जय किसान” का नारा देने वाले भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री आज भी करोड़ों किसानों और देशवासियों के लिए प्रेरणा हैं. लेकिन आज के दौर में उनकी सोच कितनी प्रासंगिक है? अगर शास्त्री जी आज जीवित होते तो किसानों के लिए क्या करते? उनकी सादगी, ईमानदारी और किसानों के प्रति समर्पण से आज क्या सीख मिलती है?
इन्हीं सवालों पर लाल बहादुर शास्त्री के पोते और कांग्रेस नेता आदर्श शास्त्री ने Kisan India के Editor-in-Chief एवं वरिष्ठ पत्रकार शैलेश चतुर्वेदी के साथ इस विशेष बातचीत में खुलकर अपने विचार साझा किए.
इस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि एक परिवार की यादें, एक महान नेता का व्यक्तित्व और भारत के किसानों का भविष्य इन सभी पहलुओं पर भावनात्मक और तथ्यपूर्ण चर्चा की गई है.
इस इंटरव्यू में जानिए…
“जय जवान, जय किसान” से “खेती बचाओ” तक शास्त्री जी की सोच
-आज भी क्यों प्रासंगिक हैं लाल बहादुर शास्त्री?
-किसानों को लीगल MSP की जरूरत क्यों?
-किसानों को आसानी से बीज और खाद कैसे मिले?
-शास्त्री जी किसानों के सम्मान को कितना महत्व देते थे?
-प्रधानमंत्री रहते हुए उनका सादा जीवन और ईमानदारी की मिसाल.
-जब शास्त्री जी ने अपने बेटे को पैर छूने की सीख दी—एक प्रेरणादायक किस्सा.
-वह कार जो उन्होंने लोन लेकर खरीदी थी और आज भी उनकी सादगी की गवाही देती है.
-प्रधानमंत्री आवास में उगाया गया गेहूं और खेती से उनका गहरा जुड़ाव.
-परिवार के पास सुरक्षित शास्त्री जी की दुर्लभ यादें और वस्तुएं.
-शास्त्री जी की मौत का रहस्य—आज भी अनसुलझे सवाल क्यों?
-डॉक्टरों की मॉनिटरिंग और जांच को लेकर उठते सवाल.
-क्या अब समय आ गया है कि शास्त्री जी की मौत के रहस्य से पर्दा उठे?
यह इंटरव्यू सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के भारत, किसानों और राजनीति को समझने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है.