Hottest cities list: इस साल अप्रैल का महीना भारत के लिए बेहद कठिन साबित हो रहा है. देश के कई हिस्सों में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और हालात इतने गंभीर हैं कि दुनिया के सबसे गर्म 20 शहरों में से 19 भारत में ही हैं. यह स्थिति सिर्फ एक सामान्य गर्मी नहीं, बल्कि एक बड़े जलवायु संकट की ओर इशारा कर रही है.
भारत बना दुनिया का सबसे गर्म इलाका
AQI.in द्वारा 21 अप्रैल, 2026 को जारी किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस समय पृथ्वी के सबसे ज्यादा गर्म शहरों की सूची में भारत का दबदबा है. बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के कई शहर इस सूची में सबसे ऊपर हैं.
बिहार के भागलपुर, ओडिशा के तलचर और पश्चिम बंगाल के आसनसोल में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो उस समय दुनिया में सबसे ज्यादा था. इसके अलावा बिहार के बेगूसराय, मोतिहारी, मुंगेर, भोजपुर और सिवान जैसे शहरों में भी तापमान 43 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया.
दिलचस्प बात यह है कि टॉप 20 में भारत के अलावा सिर्फ नेपाल का लुंबिनी शहर शामिल है, जिससे साफ है कि इस समय गर्मी का सबसे ज्यादा असर भारत पर ही है.
किन राज्यों में सबसे ज्यादा असर
बिहार: भागलपुर, बेगूसराय, मोतिहारी, मुंगेर, भोजपुर, सिवान
ओडिशा: तलचर
पश्चिम बंगाल: आसनसोल, दुर्गापुर, पश्चिम मेदिनीपुर, बीरभूम, कुल्टी, बांकुरा , रानीगंज और दालुरबंद
उत्तर प्रदेश: गोरखपुर और वाराणसी
मौसम विभाग की चेतावनी
भारतीय मौसम विभाग ने साफ कहा है कि 22 से 24 अप्रैल के बीच लू की स्थिति बनी रह सकती है. कई जगहों पर तापमान 43 डिग्री या उससे ऊपर जा सकता है. जब तापमान 40 डिग्री से ज्यादा हो जाता है, तो उसे हीटवेव माना जाता है. ऐसे में इस समय देश के कई हिस्से लू की चपेट में हैं.
आखिर इतनी गर्मी क्यों पड़ रही है
इस बार गर्मी सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि पूरे उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत में एक साथ बढ़ी है. इसका मतलब है कि यह कोई सामान्य स्थिति नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर मौसम में बदलाव हो रहा है.
वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण है तेज धूप और जमीन का लगातार गर्म होना. अप्रैल में सूरज की किरणें सीधे जमीन पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है. इसके अलावा आसमान साफ है और बादल नहीं हैं, जिससे धूप बिना किसी रुकावट के धरती को और ज्यादा गर्म कर रही है.
बर्फ कम, गर्मी ज्यादा
एक और बड़ा कारण है सर्दियों में कम बर्फबारी होना. हिमालय और यूरोप-एशिया के कई हिस्सों में इस बार बर्फ कम गिरी, जिससे धरती की परावर्तन क्षमता कम हो गई. आसान शब्दों में कहें तो बर्फ सूरज की रोशनी को वापस भेज देती है, लेकिन जब बर्फ कम होती है, तो जमीन ज्यादा गर्म हो जाती है. इससे गर्मी और तेजी से बढ़ती है.
समुद्र और हवाओं का असर
प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव और मौसम के पैटर्न में बदलाव भी इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं. जब समुद्र का तापमान बढ़ता है, तो यह हवा के रुख को बदल देता है. इस समय उत्तर-पश्चिमी गर्म और सूखी हवाएं चल रही हैं, जो बादल बनने नहीं दे रही हैं और बारिश को भी रोक रही हैं. इससे गर्मी और ज्यादा बढ़ रही है.
देश में मौसम का असमान असर
जहां एक तरफ उत्तर और मध्य भारत में भीषण गर्मी पड़ रही है, वहीं दक्षिण और उत्तर-पूर्व के कुछ हिस्सों में बारिश और तूफान देखने को मिल रहे हैं. यह अंतर दिखाता है कि देश में मौसम एक जैसा नहीं है और अलग-अलग क्षेत्रों में अलग परिस्थितियां बन रही हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही देश में इतने ज्यादा गर्म शहरों का होना एक बड़ा संकेत है कि जलवायु परिवर्तन तेजी से असर दिखा रहा है. ने वाले समय में हीटवेव की संख्या और उसकी तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं. यानी गर्मी का असर और ज्यादा खतरनाक हो सकता है.