अब 70 दिनों में तैयार हो जाएगी मसूर, खेत में नहीं उगेंगे खरपतवार.. जल्द आएंगी उन्नत किस्में
सीहोर, मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्नत दलहन किस्मों से उत्पादन बढ़ेगा. मसूर जैसी जल्दी तैयार होने वाली किस्में और खरपतवार-प्रतिरोधी फसलें किसानों की मदद करेंगी. साथ ही फसल विविधीकरण और जागरूकता पर भी जोर दिया गया.
National Pulses Self-Sufficiency Mission: राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत दाल के उत्पादन में बंपर बढ़ोतरी होगी. कृषि वैज्ञानिक दलहन की ऐसी उन्नत किस्में तैयार कर रहे हैं, जिसकी पैदावार पहले के मुकाबले डबल होगी. खास बात यह है कि कृषि वैज्ञानिक मसूर की ऐसी किस्मों पर काम कर रहे हैं, जो ज्यादा गर्मी पड़ने से पहले ही फसल तैयार हो जाएगी. यानी अब मसूर की फसल 120 दिनों में नहीं, बल्कि 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाएगी. साथ ही खेत में खरपतवार भी नहीं उगेंगे. इसके लिए वैज्ञानिक लैब में प्रयोग कर रहे हैं.
दरअसल, मध्य प्रदेश के सीहोर में आयोजित राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत राष्ट्रीय परामर्श और रणनीति सम्मेलन के आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ये बातें कहीं. उन्होंने कहा है कि दलहन उत्पादन में भारत अभी आत्मनिर्भर नहीं है. अपनी डिमांड को पूरा करने के लिए हमें विदेशों से दलहन का आयात करना पड़ता है. यह हमारे लिए शर्म की बात है. उन्होंने कहा कि किसानों को केवल एक ही फसल की खेती नहीं करनी चाहिए. गेहूं, धान, सोयाबीन के साथ-साथ दलहन की भी खेती करनी चाहिए. इससे दलहन आयात की समस्या से छुटकारा मिलेगा. उन्होंने कहा कि एक ही फसल बार-बार बोने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी कमजोर होती है. इसलिए किसानों को बदल-बदल कर फसलें बोनी चाहिए.
वैज्ञानिक दलहन की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारा संकल्प दलहन उत्पादन बढ़ाने का है. इसके लिए वैज्ञानिक दलहन की उन्नत किस्में विकसित कर रहे हैं. इसलिए हर हाल में हमें मसूर, चना, अरहर और अन्य दलहनों का उत्पादन बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों के साथ-साथ कृषि वैज्ञानिकों को भी गांवों और खेतों में जाना होगा. साथ ही किसानों से दलहन की खेती के प्रति जागरूक करना होगा. शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम मसूर की ऐसी किस्में तैयार कर रहे हैं, जो ज्यादा गर्मी पड़ने से पहले ही फसल तैयार हो जाएगी. साथ ही खेत में खरपतवार भी नहीं उगेंगे. इसके लिए हमारे वैज्ञानिक लैब में प्रयोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उन्नत किस्में 120 दिनों में नहीं, बल्कि 70 से 75 दिनों में तैयार हो जाएंगी.
कपास और चावल उत्पादकों को काफी फायदा होगा
शिवराज सिहं चौहान ने कहा कि वैज्ञानिक ऐसी उन्नत किस्मों पर काम कर रहे हैं, जिसमें झुलसा रोग नहीं लगेगा. उन्होंने कहा कि अलग-अलग पौधे के जीन को एक जगह इकठ्ठे कर के एक ही पौधे में डाल दिए जाएंगे. इससे पैदावार में बढ़ोतरी होगी और लोगों को पौष्टिक आहार भी खाने को मिलेगा. उन्होंने कहा कि अब कैक्टस भी बीना कांटे वाले पैदा होंगे. इसके लिए भी काम किया जा रहा है. साथ ही अलग-अलग दहन के उत्पादन बढ़ाने के लिए किस्मों के ऊपर भी काम किए जा रहे हैं. इससे पैदावार में तुरंत बढ़ोतरी होगी. साथ ही उन्हों कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में इन कृषि उत्पादों को पूरी सुरक्षा दी गई है. इस समझौते से कपास और चावल उत्पादकों को काफी फायदा होगा.