GI टैग वाला खुशबूदार जोहा चावल हुआ महंगा, एक साल में दाम दोगुने, जानिए क्यों आम लोगों की पहुंच से दूर

जैसे-जैसे मांग बढ़ी, असम से जोहा चावल की बड़ी मात्रा पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में जाने लगी. अब यह चावल देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है. बाजार में लगातार जोहा चावल की मांग लगातार बढ़ रही है और अब यह प्रीमियम चावल के रूप में पहचान बना रहा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 17 Mar, 2026 | 03:10 PM

Assam Joha rice price: असम का मशहूर जोहा चावल अपनी खुशबू और स्वाद के लिए जाना जाता है, लेकिन इन दिनों यह अपनी बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा में है. पिछले एक साल में इस चावल की कीमत लगभग दोगुनी हो गई है. पहले जो जोहा चावल करीब 80 रुपये प्रति किलो मिल जाता था, अब वही 160 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. ऐसे में आम लोगों के लिए इसे खरीदना मुश्किल होता जा रहा है.

अचानक क्यों बढ़ गए दाम?

द असम ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, जोहा चावल के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह इसकी बढ़ती मांग और कम होती उपलब्धता है. दरअसल, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, जो जोहा जैसा ही खुशबूदार और छोटे दाने वाला होता है, 2024-25 के सीजन में खराब मौसम की वजह से करीब 40 प्रतिशत कम पैदा हुआ.

इस कमी के कारण गोविंदभोग चावल के दाम करीब 300 प्रतिशत तक बढ़ गए. ऐसे में बाजार में उसकी जगह भरने के लिए असम का जोहा चावल तेजी से लोकप्रिय हो गया और उसकी मांग अचानक बढ़ गई.

दूसरे राज्यों और विदेशों में भी बढ़ी मांग

जैसे-जैसे मांग बढ़ी, असम से जोहा चावल की बड़ी मात्रा पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में जाने लगी. अब यह चावल देश के बड़े शहरों के साथ-साथ विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है. बाजार में लगातार जोहा चावल की मांग लगातार बढ़ रही है और अब यह प्रीमियम चावल के रूप में पहचान बना रहा है.

किसान भी रोक रहे हैं बिक्री

व्यपारियों का कहना है कि कीमत बढ़ने की एक वजह यह भी है कि किसान तुरंत अपनी फसल बाजार में नहीं बेच रहे हैं. वे उम्मीद कर रहे हैं कि आगे कीमत और बढ़ेगी, इसलिए वे स्टॉक अपने पास ही रख रहे हैं. इससे बाजार में चावल की कमी बनी हुई है और दाम ऊपर जा रहे हैं.

उत्पादन कितना है?

कृषि विशेषज्ञ निर्मल यादव किसान इंडिया को बताते हैं कि असम में जोहा चावल की खेती करीब 21,662 हेक्टेयर में होती है और साल 2024-25 में इसका उत्पादन करीब 43,298 मीट्रिक टन रहा. लेकिन इस उत्पादन का बड़ा हिस्सा किसान अपने उपयोग में ही ले लेते हैं. जो बचता है, उसका सिर्फ करीब 10 प्रतिशत ही बाजार या मिलों तक पहुंच पाता है और यही वजह है कि इसकी उपलब्धता सीमित रहती है.

विदेशों में भी बढ़ी पहचान

जोहा चावल को 2017 में जीआई टैग मिला था, जिससे इसकी पहचान और बढ़ी है. अब यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी जगह बना रहा है. हाल ही में 25 मीट्रिक टन जोहा चावल ब्रिटेन और इटली भेजा गया है. इसके अलावा वियतनाम और खाड़ी देशों जैसे कुवैत, कतर, ओमान, बहरीन और सऊदी अरब में भी इसका निर्यात किया जा चुका है.

किन इलाकों में होती है खेती?

असम के नगांव, बकसा, गोलपाड़ा, शिवसागर, माजुली, चिरांग और गोलाघाट जैसे जिले जोहा चावल के प्रमुख उत्पादक हैं. यहां की मिट्टी और मौसम इस चावल को खास खुशबू और स्वाद देते हैं.

आम लोगों पर क्या असर?

कीमत बढ़ने का सीधा असर आम लोगों पर पड़ा है. पहले जो चावल रोजमर्रा के खाने का हिस्सा था, अब वह धीरे-धीरे महंगा होता जा रहा है. हालांकि, इसकी गुणवत्ता के कारण लोग अभी भी इसे खरीद रहे हैं, लेकिन हर किसी के लिए यह आसान नहीं रह गया है.

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Published: 17 Mar, 2026 | 03:00 PM
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