Nagauri Pan Methi: राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को अब देशभर में नई पहचान मिलने जा रही है. वर्षों तक इसे कसूरी मेथी के नाम से जाना जाता रहा, लेकिन अब भारत सरकार के पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPV&FRA) ने इसे ‘सामुदायिक किस्म (Community Variety)’ के रूप में राष्ट्रीय मान्यता दे दी है. यह सम्मान नागौर जिले की मूंडवा तहसील के महिला कृषक समुदाय को मिला है. इस उपलब्धि से न केवल महिला किसानों का सम्मान बढ़ा है, बल्कि भविष्य में GI टैग, ब्रांडिंग और निर्यात के नए रास्ते भी खुलने की उम्मीद है.
महिला किसानों को मिला राष्ट्रीय सम्मान
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में यह प्रमाण-पत्र मूंडवा क्षेत्र की महिला कृषक समुदाय की प्रतिनिधि एवं पूर्व प्रधान गीता देवी और उनकी सहयोगी महिला किसानों को सौंपा गया. प्रमाण-पत्र PPV&FRA के अध्यक्ष डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने प्रदान किया. इस मौके पर राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री सी.आर. चौधरी, कृषि आयुक्त डॉ. पी.के. सिंह, PPV&FRA बोर्ड सदस्य डॉ. सीमा शर्मा, ICAR-DKMA की निदेशक डॉ. अनुराधा अग्रवाल, रजिस्ट्रार जनरल डॉ. डी.के. अग्रवाल और साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC), जोधपुर के संस्थापक निदेशक डॉ. भागीरथ चौधरी भी मौजूद रहे.
70 साल पुरानी खेती को मिली नई पहचान
नागौरी पान मेथी की विशेष प्रजाति (Trigonella corniculata L.) है, जिसकी खेती मुख्य रूप से राजस्थान के नागौर जिले में होती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सूखी पत्तियों से आने वाली प्राकृतिक और लंबे समय तक बनी रहने वाली सुगंध है, जो इसे दूसरी मेथी किस्मों से अलग बनाती है. डॉ. भागीरथ चौधरी के अनुसार, नागौर के किसान करीब 70 वर्षों से इसकी खेती कर रहे हैं. वैज्ञानिक स्तर पर इस फसल पर ज्यादा काम नहीं हुआ, लेकिन इसकी खुशबू और गुणवत्ता के कारण देश की बड़ी मसाला कंपनियां लंबे समय से इसका उपयोग अपने उत्पादों में करती रही हैं. अब राष्ट्रीय पंजीकरण मिलने से इसे अलग पहचान और बाजार मिलेगा.
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एक एकड़ से 2.5 लाख रुपये तक की कमाई
नागौरी पान मेथी वर्तमान में करीब 7,000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जाती है. इसकी खेती मुख्य रूप से मूंडवा, नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना और खींवसर क्षेत्रों में होती है. यह बहु-कटाई वाली पत्तेदार मसाला फसल है. हर कटाई के बाद प्रति एकड़ लगभग 175 किलोग्राम सूखी पत्तियां मिलती हैं, जिससे करीब 25 हजार रुपये की आय होती है. एक सीजन में औसतन 10 कटाइयों के आधार पर किसान प्रति एकड़ 2.5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं.
वर्ष 2024-25 में नागौर जिले में लगभग 30,000 मीट्रिक टन सूखी नागौरी पान मेथी का उत्पादन हुआ, जिससे किसानों को करीब 450 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई.
GI टैग और निर्यात की दिशा में बढ़ेगा कदम
नागौरी पान मेथी का यह पंजीकरण करीब सात वर्षों के वैज्ञानिक अनुसंधान और कई संस्थानों के सहयोग का परिणाम है. इस पहल का नेतृत्व SABC, जोधपुर ने किया. ICAR-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र (NRCSS), अजमेर के सहयोग से इसकी वैज्ञानिक विशेषताओं का अध्ययन किया गया. बाद में नाबार्ड समर्थित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र (AEFC) के माध्यम से किसानों के साथ फील्ड अध्ययन, DUS परीक्षण और दस्तावेजीकरण पूरा किया गया.
इस मान्यता से नागौरी पान मेथी के नाम और बीज सामग्री के गलत उपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी. साथ ही किसानों के सामुदायिक अधिकार मजबूत होंगे, वैज्ञानिक बीज मानकों के विकास का रास्ता खुलेगा और भविष्य में GI टैग, अलग ब्रांड पहचान तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात के नए अवसर मिलेंगे. यह उपलब्धि राजस्थान की कृषि विरासत, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय जैव-विविधता के संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है.