BRICS New Delhi Declaration: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के नई दिल्ली घोषणापत्र में कृषि और किसानों को खास जगह दी गई है. खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और खेती को ज्यादा टिकाऊ बनाने के लिए सदस्य देशों ने चार नई पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है. इनमें बीज व्यवस्था, कृषि में जरूरी सामान, कृषि-पारिस्थितिकी और डिजिटल खेती जैसे मुद्दे शामिल हैं. खास बात यह है कि इन पहलों को अब सिर्फ कृषि मंत्रियों के स्तर तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने भी इन्हें समर्थन दिया है.
किसानों के लिए क्या हैं ये चार पहल?
ब्रिक्स देशों ने किसानों से जुड़े चार अहम क्षेत्रों पर साथ काम करने का फैसला किया है. इसमें बेहतर बीज व्यवस्था, खेती के लिए जरूरी इनपुट, पर्यावरण के अनुकूल खेती और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल शामिल है. इसका मकसद किसानों को बेहतर संसाधन उपलब्ध कराने के साथ खेती को बदलते मौसम और बाजार की चुनौतियों के लिए तैयार करना है. आने वाले समय में इन क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच अनुभव, तकनीक और जानकारी साझा करने पर जोर दिया जा सकता है.
अनाज कारोबार के लिए बनेगा साझा मंच
शिखर सम्मेलन में पूरे ब्रिक्स समूह के लिए अनाज व्यापार मंच बनाने को भी मंजूरी दी गई है. इसका मकसद सदस्य देशों के बीच अनाज से जुड़े कारोबार और सहयोग को बेहतर बनाना है. खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह कदम काफी अहम माना जा रहा है. अगर देशों के बीच अनाज की उपलब्धता, मांग और व्यापार से जुड़ी जानकारी बेहतर तरीके से साझा होती है, तो खाद्य संकट के समय आपूर्ति को संभालने में मदद मिल सकती है.
डिजिटल खेती पर भी बढ़ेगा जोर
नई पहलों में डिजिटल खेती को भी शामिल किया गया है. खेती में मोबाइल, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ने से किसानों को मौसम, फसल और बाजार से जुड़ी जानकारी समय पर मिल सकती है. ब्रिक्स देशों के बीच डिजिटल खेती से जुड़े अनुभव और तकनीक साझा होने से छोटे किसानों के लिए भी आधुनिक खेती के नए रास्ते खुल सकते हैं. इससे खेती में लागत कम करने और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
बीज और जरूरी कृषि सामान पर फोकस
किसानों के लिए अच्छी क्वालिटी के बीज और समय पर जरूरी कृषि सामान मिलना बेहद जरूरी है. घोषणापत्र में बीज प्रणालियों और खेती में इस्तेमाल होने वाले जरूरी इनपुट को लेकर भी पहल की गई है. इसके साथ ही बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों को लेकर वैश्विक मंच बनाने की बात सामने आई है. इसका मकसद किसानों की भूमिका और उनके अधिकारों को ज्यादा मजबूती देना है.
पर्यावरण के साथ खेती को आगे बढ़ाने की तैयारी
कृषि-पारिस्थितिकी यानी ऐसी खेती, जिसमें खेती के साथ मिट्टी, पानी और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाए, पर भी ब्रिक्स देशों ने जोर दिया है. इसके लिए कृषि-पारिस्थितिकी पर काम करने वाले विशेष केंद्रों का नेटवर्क बनाने की पहल को आगे बढ़ाया गया है. बदलते मौसम और बढ़ती प्राकृतिक चुनौतियों के बीच टिकाऊ खेती पर ध्यान देना किसानों के लिए काफी अहम हो सकता है. इससे कम संसाधनों में खेती को लंबे समय तक बनाए रखने की दिशा में काम किया जा सकता है.
इंदौर कृषि घोषणापत्र से जुड़ा है फैसला
नई दिल्ली घोषणापत्र में कृषि से जुड़े ये फैसले जून 2026 में इंदौर में हुई ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की बैठक के घोषणापत्र से जुड़े हैं. वहां जिन चार पहलों पर सहमति बनी थी, उन्हें अब राष्ट्राध्यक्षों के स्तर पर भी समर्थन मिला है. इनमें AGRIN, बीज प्रणालियों में किसानों के अधिकारों पर वैश्विक मंच, कृषि-पारिस्थितिकी पर उत्कृष्टता केंद्रों का नेटवर्क और डिजिटल खेती का नेटवर्क शामिल हैं.
WTO में कृषि मुद्दों पर आगे बढ़ेंगे BRICS देश
ब्रिक्स देशों ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में कृषि से जुड़ी बातचीत को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई. देशों ने कहा कि वे डब्ल्यूटीओ के मौजूदा फैसलों और एग्रीमेंट ऑन एग्रीकल्चर (AoA) के तहत कृषि से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों पर आगे बढ़ना चाहते हैं. इसका मकसद ऐसा कृषि व्यापार सिस्टम बनाना है, जो निष्पक्ष, संतुलित और विकास को बढ़ावा देने वाला हो. ब्रिक्स देशों ने यह भी माना कि नीतियों और नियमों में हो रहे बदलावों का असर खेती, कृषि व्यापार, खाद्य सुरक्षा और छोटे किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है. इसके साथ ही, देशों ने टिकाऊ खेती, सभी को साथ लेकर चलने और ग्लोबल वेजिटेबल ऑयल सेक्टर में बाजार तक बराबर पहुंच बढ़ाने की कोशिशों का स्वागत किया.