बिहार में बाढ़ का कहर! 15 जिलों में 48 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, खतरे के निशान से ऊपर नदियां

Bihar Flood Crisis: बिहार में बाढ़ का संकट और गंभीर हो गया है. 15 जिलों में करीब 48.22 लाख लोग प्रभावित हैं और गंगा समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. राहत के लिए 1,248 सामुदायिक रसोई, 13 राहत शिविर और 1,794 नावें चल रही हैं. SDRF और NDRF की टीमें भी तैनात हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 13 Sep, 2026 | 07:48 AM

Bihar Flood Update: बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है. राज्य के 15 जिलों में बाढ़ से प्रभावित लोगों की संख्या बढ़कर करीब 48.22 लाख हो गई है. गंगा समेत कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का असर भी बिहार की नदियों पर साफ दिखाई दे रहा है. इस बीच जल संसाधन विभाग ने नदी किनारे कटाव वाले संवेदनशील इलाकों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं.

15 जिलों में 48 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

आपदा प्रबंधन विभाग के मुताबिक, बिहार के 15 जिलों के 87 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतें बाढ़ की चपेट में हैं. इन इलाकों में करीब 48.22 लाख लोग प्रभावित हुए हैं. शुक्रवार शाम तक प्रभावित लोगों की संख्या करीब 47.33 लाख थी. यानी कुछ ही समय में बाढ़ प्रभावित आबादी में करीब 89 हजार की बढ़ोतरी हुई है. बाढ़ प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं.

कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर

बिहार में लगातार बारिश और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होने से कई नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ गया है. सितंबर में अब तक राज्य में 108.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से करीब 20 फीसदी ज्यादा है. भागलपुर के सुल्तानगंज में शनिवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 36.48 मीटर दर्ज किया गया. यह खतरे के निशान से 1.98 मीटर ऊपर है. हालांकि, यहां पानी का स्तर अब धीरे-धीरे कम हो रहा है. इसके अलावा डुमरियाघाट में गंडक, बलतारा और कुर्सेला में कोसी, खगड़िया में बूढ़ी गंडक और कई जगहों पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. पुनपुन, बागमती और घाघरा नदी के कुछ हिस्सों में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.

पानी घटने के साथ बढ़ सकता है कटाव का खतरा

बाढ़ के बीच एक और चिंता नदी किनारे कटाव की है. विभाग ने अधिकारियों को खास तौर पर उन जगहों पर नजर रखने को कहा है, जहां नदी का पानी तेजी से घट रहा है. दरअसल, पानी का स्तर अचानक कम होने पर नदी के किनारों पर दबाव बढ़ सकता है. इससे मिट्टी कटने और तटबंध के कमजोर हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है. अधिकारियों को ऐसे संवेदनशील स्थानों का तुरंत निरीक्षण करने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा के इंतजाम करने के निर्देश दिए गए हैं.

1,248 सामुदायिक रसोई और 13 राहत शिविर चालू

बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने कई स्तर पर इंतजाम किए हैं. अलग-अलग जिलों में 1,248 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं. इसके अलावा 13 राहत शिविर भी चालू हैं. इन राहत शिविरों में करीब 12,260 लोगों के रहने, खाने और इलाज समेत जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था की गई है. लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए 1,794 नावें भी चलाई जा रही हैं.

SDRF-NDRF की टीमें तैनात

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान के लिए आपदा प्रबंधन की टीमें भी मैदान में हैं. अलग-अलग जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की 10 टीमें तैनात की गई हैं. बाढ़ प्रभावित इलाकों में पशुओं के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं. अब तक 11,204 क्विंटल पशु चारा वितरित किया जा चुका है.

अगले दो दिन भी मौसम पर रहेगी नजर

बिहार मौसम केंद्र ने अगले दो दिनों तक राज्य के ज्यादातर हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान जताया है. इस दौरान तेज हवाएं भी चल सकती हैं. ऐसे में पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. खासकर नदी किनारे और तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों को प्रशासन की सलाह का पालन करने और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई है.

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