यूरोपीय यूनियन संग ट्रेड डील किसानों के लिए बनेगी जैकपॉट? क्या अल्फांसो आम समेत GI Tag वाले उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी

यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ भारत ने फ्री ट्रेड डील फाइनल कर दी है. लेकिन, कृषि और डेयरी सेक्टर को इस समझौते से बाहर रखा गया है. क्योंकि, भारतीय किसानों को सस्ते विदेशी उत्पादों से प्रभावित होने से बचाया जा सके. हालांकि, भारत के जीआई टैग हासिल उत्पादों के लिए इस डील से बिक्री के लिए 27 देशों का बाजार जरूर मिल गया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 27 Jan, 2026 | 01:50 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) हुआ है. उन्होंने कहा कि यह ग्लोबल GDP का 25 फीसदी और ग्लोबल ट्रेड का एक-तिहाई हिस्सा है. दरअसल यूरोपीय यूनियन में फ्रांस, जर्मनी, स्पेन समेत 27 देशों का समूह है और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के साथ ही इन देशों के उत्पादों को भारत सस्ती दर पर हासिल कर सकेगा और अपने उत्पाद इन देशों में निर्यात कर सकेगा. हालांकि, इस डील से कृषि और डेयरी सेक्टर के उत्पादों को बाहर रखा गया है. लेकिन, जीआई टैग हासिल उत्पादों समझौते का हिस्सा हैं. ऐसे में अल्फांसो आम, बासमती चावल समेत अन्य जीआई टैग हासिल उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में सुरक्षित जगह मिल सकेगी.

पीएम मोदी ने कहा कि यूरोपीय यूनियन और भारत के ट्रेड डील से 140 करोड़ भारतीयों और करोड़ों यूरोपीय लोगों के लिए बहुत सारे अवसर खुल गए हैं. पीएम ने कहा कि भारत का एनर्जी सेक्टर 500 अरब डॉलर के निवेश के मौके देता है और उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स से देश में निवेश करने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा तेल रिफाइनिंग हब बन जाएगा. देश 2030 तक तेल और गैस सेक्टर में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य बना रहा है.

ट्रेड डील से कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर रखने के मायने

यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ फ्री ट्रेड डील में कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा गया है. इसका मतलब यह है कि इन क्षेत्रों को समझौते के तहत आयात-निर्यात शुल्क में छूट या बाजार खोलने के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा. यानी कृषि और डेयरी उत्पादों पर वर्तमान सीमा शुल्क, कोटा और अन्य सुरक्षा नियम पहले की तरह लागू रहेंगे. इसका उद्देश्य भारत के छोटे और सीमांत किसानों तथा दुग्ध उत्पादकों को यूरोप के अत्यधिक सब्सिडी वाले सस्ते उत्पादों से होने वाली सीधी प्रतिस्पर्धा से बचाना है. हालांकि, जीआई टैग हासिल उत्पादों की बिक्री भारत कर सकेगा. लेकिन, ऐसे उत्पादों पर मौजूदा सीमा शुल्क, सख्त गुणवत्ता मानक (SPS norms), फूड सेफ्टी जैसे नियम लागू रहेंगे.

जीआई टैग हासिल उत्पादों की बिक्री को बढ़ेगी

भारत इस समझौते के जरिए अपने जीआई टैग हासिल कृषि उत्पादों समेत अन्य उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में भेज सकेगा. खासकर जीआई टैग हासिल उत्पादों को हाथों-हाथ लिया जाएगा. क्योंकि, GI टैग हासिल उत्पादों को की ब्रांड वैल्यू 30 फीसदी तक बढ़ जाती है. ऐसे में जब यूरोप का कोई ग्राहक यह देखेगा कि इस पर ‘Authentic Indian GI’ का लोगो है, तो वह उस उत्पाद के लिए ज्यादा कीमत देने को तैयार होगा. इस पहचान के साथ बिचौलियों की मोनोपॉली खत्म होगी. भारतीय सहकारी समितियां और छोटे कारीगर सीधे यूरोप के बड़े खरीदारों से जुड़ सकेंगे.

चाय, चप्पल, साड़ी समेत कई उत्पादों को ऊंचे दाम मिलेंगे

दार्जिलिंग चाय और कांगड़ा चाय की खुशबू और स्वाद का यूरोप पहले से ही दीवाना है. अब इन्हें वहां ‘शेंपेन’ (Champagne) जैसा दर्जा मिलेगा. बनारसी साड़ी और कांजीवरम सिल्क को नया बाजार मिलेगा. भारतीय बुनकरों की कला अब पेरिस और मिलान के फैशन हाउस में अपनी असली पहचान के साथ बिकेगी. कोल्हापुरी चप्पल और कश्मीरी पश्मीना शॉल जैसे हस्तशिल्प उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और ऊंचे दाम मिलेंगे.

बासमती चावल का निर्यात बढ़ेगा, रास्ते का रोड़ा नहीं बन पाएगा पाकिस्तान

बासमती चावल का मामला ट्रेड एग्रीमेंट में बड़ी भूमिका में रहा है. डील के बाद भारतीय बासमती को यूरोप में वह खास सुरक्षा मिलेगी जो इसे पाकिस्तान या अन्य देशों के चावल से अलग और कीमती बनाएगी. भारत बासमती निर्यात में सबसे आगे है. लेकिन, पाकिस्तान मुसीबत बनता रहा है. लेकिन, इस सौदे के बाद पाकिस्तानी बासमती चावल हमारे रास्ते का रोड़ा नहीं बन पाएगा.

अल्फांसो, लीची समेत अन्य फलों की बिक्री को नया बाजार

अल्फांसो आम या हापुस की सप्लाई को बूस्ट मिलेगा. गर्मियों में जब भारत का हापुस यूरोप पहुंचेगा, तो वह वहां के सुपरमार्केट में एक ‘प्रोटेक्टेड ब्रांड’ के तौर पर सजेगा. इसके अलावा दूसरे जीआई टैग हासिल आम और लीची समेत अन्य फलों को नए बाजार में सप्लाई का मौका मिलेगा. जबकि, उत्पादक किसानों को ज्यादा कीमत और समय बिक्री का लाभ मिलेगा.

डेयरी और कृषि सेक्टर को समझौते से बाहर रखा गया

कई कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों के नेताओं ने इस समझौते से भारतीय डेयरी सेक्टर और कृषि क्षेत्र को बाहर रखा है. भारत ने इस डील में बहुत चतुराई से काम किया है. भारत ने अपने डेयरी और कृषि क्षेत्र को इस समझौते से बाहर रखा है. इसका मतलब है कि यूरोप का सस्ता दूध या पनीर भारतीय डेयरी किसानों के मार्केट को खराब नहीं कर पाएगा.

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