Bihar Krashi Yojana News: अपनी छत पर सब्जियां और फलों के पौधे लगाकर कमाई बढ़ाने का अवसर किसानों और शहरी परिवारों को दिया जा रहा है. इसके लिए बिहार सरकार छत पर बागवानी योजना चला रही है. योजना के जरिए लाभार्थी को गमला, पौधा खरीदने के लिए राशि और सब्सिडी दी जा रही है. कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि खेती योग्य भूमि में निरंतर कमी तथा शहरी क्षेत्रों में बढ़ती गर्मी (Urban Heat Island Effect) जैसी चुनौतियों के समाधान के लिए यह योजना जनहितकारी पहल है. यह योजना शहरी एवं अर्ध शहरी क्षेत्रों के किसान परिवारों, श्रमिक परिवारों, महिलाओं तथा मध्यम वर्ग के लिए पोषण सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और अतिरिक्त कमाई का माध्यम बन रही है.
कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि हमारे किसान भाई-बहन और शहरी गरीब परिवार सीमित संसाधनों में भी अपनी छत को उपजाऊ बनाकर पोषण और आय दोनों बढ़ा सकते हैं. छत पर बागवानी योजना से ताजा एवं सुरक्षित भोजन मिलेगा, घरेलू खर्च घटेगा और महिलाओं तथा युवाओं के लिए हरित रोजगार के नए अवसर बनेंगे. प्रत्येक शहरी परिवार अपनी छत को हरित बनाकर स्वस्थ परिवार, स्वच्छ वातावरण और आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में सहभागी बने, यही हमारा संकल्प है.
छत पर बागवानी योजना के लिए 317 लाख रुपये मंजूर
कृषि मंत्री ने कहा कि उद्यान निदेशालय की ओर से चलाई जा रही इस योजना के लिए 317 लाख रुपये की स्वीकृत राशि उपलब्ध कराई गई है. वर्तमान में पटना, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर नगर निगम क्षेत्रों में इसका सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है. कृषि मंत्री ने बताया कि छतों पर हरित आवरण विकसित होने से घरों का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे गर्मी में उल्लेखनीय राहत मिलती है. यह पहल वायु प्रदूषण कम करने, कार्बन अवशोषण बढ़ाने तथा स्वच्छ वातावरण बनाने में भी सहायक है. छत पर उगाई गई जैविक सब्जियां, फल, फूल एवं औषधीय पौधे परिवारों को ताजा, रसायनमुक्त और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराते हैं, जिससे पोषण सुरक्षा मजबूत होती है और घरेलू खर्च में कमी आती है.
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छत बागवानी सेवादल के गठन से ट्रेनिंग दी जा रही
उन्होंने कहा कि इस योजना से अतिरिक्त उपज बेचकर आय अर्जित करने की भी संभावना बनती है. रोपाई, रख-रखाव, वर्मी-कम्पोस्ट निर्माण, पौध नर्सरी, ग्रो-बैग एवं गमला निर्माण, माइक्रो सिंचाई, पैकिंग तथा होम डिलीवरी जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ‘ग्रीन जॉब्स’ का सृजन हो रहा है. महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ‘छत बागवानी सेवा-दल’ के गठन के जरिए प्रशिक्षण और सामुदायिक मार्केटिंग के अवसर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे महिलाओं को नियमित कमाई हो सके. वहीं युवाओं के लिए ‘रूफटॉप गार्डन’ स्थापना और परामर्श सेवाओं के रूप में उद्यमिता के नए अवसर दिए जा रहे हैं.
कितना मिलेगी सब्सिडी और कैसे करें आवेदन
छत पर बागवानी योजना के तहत 30 गमलों (पौधों सहित) की यूनिट लागत 10,000 रुपये तथा फार्मिंग बेड मॉडल की लागत 60,000 रुपये तय की गई है. दोनों मॉडलों पर 75 फीसदी तक अनुदान दिया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक 428 लाभार्थी इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं. इच्छुक लाभार्थी अपने संबंधित नगर निगम क्षेत्र के उद्यान, कृषि कार्यालय अथवा जिला उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर योजना की पात्रता एवं आवेदन प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.