कर्नाटक में खुला देश का पहला जीन पूल और जर्मप्लाज्म बैंक, अब चंदन किसानों की बढ़ेगी कमाई

2025 में कर्नाटक वन विभाग ने KSDL के साथ मिलकर राज्य में हर साल एक लाख चंदन के पौधे लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह परियोजना अभी शुरू नहीं हो पाई है. ऐसे चामराजनगर, बांदीपुर टाइगर रिजर्व और केरल का मरायूर क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले चंदन  के लिए प्रसिद्ध है.

Kisan India
नोएडा | Published: 3 Feb, 2026 | 07:01 PM

Karnataka News: कर्नाटक के चंदन किसानों के लिए खुशखबरी है. उनकी कमाई में अब इजाफा होने वाला है, क्योंकि देश का पहला दन जीन पूल और जर्मप्लाज्म बैंक राज्य में खोला गया है. सरकार को उम्मीद है कि अब प्रदेश के चंदन किसानों को उन्नत किस्म के पौधे मिलेंगे. इससे उनकी आय में बढ़ोतरी होगी. वहीं, कहा जा रहा है कि सरकार की इस कोशिश से प्रदेश में चंदन का रकबा भी बढ़ेगा. ऐसे में चंदन निर्यात में तेजी आएगी.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चंदन जीन पूल और जर्मप्लाज्म बैंक का उद्देश्य देशभर के किसानों को व्यावसायिक खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाले चंदन के पौधे उपलब्ध कराना है. यह पहल कर्नाटक सोप्स एंड डिटर्जेंट्स लिमिटेड (KSDL) ने इंस्टीट्यूट ऑफ वुड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (IWST) के साथ मिलकर शुरू की है. बीते तीन महीनों से नमूने जुटाए जा रहे थे और हालिया केंद्रीय बजट में तटीय क्षेत्रों में चंदन उत्पादन  को बढ़ावा देने की घोषणा से इस परियोजना को नई ताकत मिली है.

ऑस्ट्रेलिया से चंदन तेल और बीज आयात करने पड़ रहे हैं

KSDL के अनुसार, चंदन को अकेले नहीं बल्कि अन्य प्रजातियों के साथ उगाने पर जोर दिया जा रहा है, क्योंकि यह किसानों के लिए लाभकारी है. यह जीन बैंक चंदन और उसके तेल की गुणवत्ता सुधारने में मदद करेगा. शोध के नतीजे अन्य राज्यों के साथ भी साझा किए जाएंगे. गौरतलब है कि हाल की रिपोर्ट में चंदन की गुणवत्ता और उत्पादन में गिरावट की बात सामने आई थी, जिसके चलते भारत को ऑस्ट्रेलिया से चंदन तेल  और बीज आयात करने पड़ रहे हैं.

एक लाख चंदन के पौधे लगाने की योजना बनाई

2025 में कर्नाटक वन विभाग ने KSDL के साथ मिलकर राज्य में हर साल एक लाख चंदन के पौधे लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन यह परियोजना अभी शुरू नहीं हो पाई है. फिलहाल कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के वन कर्मचारियों की मदद से जंगलों और अन्य क्षेत्रों में मौजूद पुराने और श्रेष्ठ चंदन के पेड़ों की पहचान कर उनके नमूने एकत्र किए जा रहे हैं. इन नमूनों का जर्मप्लाज्म बैंक और जीन पूल में विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि मूल पेड़, लकड़ी और तेल की गुणवत्ता का पता लगाया जा सके. इसके बाद सबसे बेहतर किस्मों को विकसित कर किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा.

केरल का मरायूर क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले चंदन के लिए प्रसिद्ध है

मैसूरु, चामराजनगर, बांदीपुर टाइगर रिजर्व और केरल का मरायूर क्षेत्र उच्च गुणवत्ता वाले चंदन  के लिए प्रसिद्ध है. कर्नाटक में फिलहाल 713 किसान करीब 4,000 एकड़ में चंदन की खेती कर रहे हैं, जबकि राज्य के जंगलों में यह प्राकृतिक रूप से भी पाया जाता है. अधिकारियों का कहना है कि चंदन राज्य का वृक्ष होने के बावजूद इसके रोपण और गुणवत्ता बढ़ाने पर अपेक्षित काम नहीं हो रहा है.

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Published: 3 Feb, 2026 | 07:01 PM

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