मध्य प्रदेश सरकार का टारगेट है कि 2026 में हर किसान के खेत तक सिंचाई की सुविधा पहुंचाई जाए और किसी भी खेत की फसल पानी के बिना सूखी न रह जाए. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंचित क्षेत्र 100 लाख हेक्टेयर करके रहेंगे. यह टारगेट पूरा करने में नदी जोड़ो परियोजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी. इसके साथ ही रीचार्ज परियोजनाओं के जरिए सूखी नदियों, जलाशयों और कुओं को पुनर्जीवित किया जाएगा.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है. तीन बड़ी परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा 100 लाख हैक्टेयर तक करने में सफलता मिलेगी. साथ ही प्रदेश की अन्य निर्माणाधीन सिंचाई परियोजनाएं भी लक्ष्य को पाने में सहायक होंगी. प्रदेश में दो वर्षों में सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है. किसानों की तरक्की और खुशहाली हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. कृषि के अतिरिक्त पेयजल, उद्योगों, विद्युत उत्पादन आदि के लिए जल की उपलब्धता कराये जाने के प्रयास निरंतर जारी हैं.
तीन परियोजनाओं से बदल रही सिंचाई की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेई के नदी जोड़ो अभियान के सपने को साकार किया जा रहा है. इस परियोजना से पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र की तस्वीर एवं तकदीर बदल जाएगी. इस परियोजना से न केवल सिंचाई बल्कि पेयजल एवं विद्युत उत्पादन का लाभ भी मिलेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की दूसरी महत्वपूर्ण पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना है. इससे प्रदेश के बड़े हिस्से में सिंचाई, पेयजल, उद्योगों आदि के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध हो रहा है. जबकि, तापी बेसिन मेगा रिचार्ज परियोजना से ताप्ती नदी के अतिरिक्त जल को भूजल भरण और सूखे जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने में इस्तेमाल किया जा रहा है.
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सिंचाई जल पहुंचाने के लिए 3 साल की कार्ययोजना
मध्यप्रदेश में “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” की अवधारणा को मूर्त रूप देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं. सिंचाई प्रबंधन में मध्यप्रदेश देश में सर्वोच्च स्थान पर है. प्रदेश में सिंचाई के रकबे में वृद्धि हो रही है. माइक्रो सिंचाई पद्धति में मध्यप्रदेश देश में अग्रणी राज्य है. जल संरक्षण एवं संवर्धन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य को राष्ट्रीय जल अवार्ड भी मिला है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई के रकबे को बढ़ाने और हर खेत तक पानी पहुंचाने में सफलता मिलेगी. राज्य सरकार ने सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए आगामी 3 वर्ष की कार्य योजना भी बनाई है, जिसे अमल में लाना शुरू कर दिया है.
8 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई देगी केन-बेतवा परियोजना
परियोजना की लागत 44 हजार 605 करोड़ रुपये है. इससे सिंचाई 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर में हो सकेगी. परियोजना से बुन्देलखण्ड के 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ, निवाडी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा एवं सागर के लगभग 2 हजार ग्रामों के 7 लाख 25 हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे. साथ ही 44 लाख आबादी को पेयजल मुहैया हो सकेगा. परियोजना से 103 मेगावॉट विद्युत (जल विद्युत) और 27 मेगावॉट सौर उर्जा का उत्पादन होगा. भू-जल की स्थिति में सुधार भी होगीी.
चंबल क्षेत्र के 13 जिलों को पानी दे रही पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना
परियोजना की कुल लागत 72 हजार करोड़ रुपये है. इसमें मध्यप्रदेश का हिस्सा 35 हजार करोड़ रुपये का है. परियोजना से मालवा एवं चंबल क्षेत्र के 13 जिले गुना, शिवपुरी, मुरैना, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर मालवा, शाजापुर, श्योपुर, ग्वालियर एवं भिण्ड में 6.16 लाख हेक्टेयर में नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली के आधुनिकीकरण से भिण्ड, मुरैना एवं श्योपुर के 3.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा हो सकेगी. साथ ही लगभग 2 हजार 94 ग्रामों की 40 लाख आबादी लाभान्वित होगी.
बुंदेलखंड के गांवों को पानी पहुंचा रही दो योजनाएं
पारंपरिक जल भंडारण के स्थान पर भूगर्भ जल भरण वाली इस परियोजना की कुल लागत 19 हजार 244 करोड़ रुपये है. इस परियोजना से बुरहानपुर एवं खण्डवा जिले की 1 लाख 23 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो सकेगी. इसके अलावा अटल भूजल योजना से भूजल संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के 06 जिलों सागर- दमोह छतरपुर- टीकमगढ़-पन्ना एवं निवाडी के 09 विकासखंडों की 670 ग्राम पंचायत क्षेत्रों में जन सहभागिता से जल सुरक्षा योजना तैयार करने हेतु भारत सरकार की सहायता से 314.44 करोड़ राशि की योजना 2020 से अक्टूबर 2025 तक क्रियान्वित की गई.