आधार कार्ड से खतौनी में तुरंत सुधरेगा नाम, अब नहीं रुकेंगे PM Kisan समेत कई योजनाओं के पैसे

सरकार ने किसानों के लिए बड़ी राहत की सुविधा शुरू कर दी है. अब आधार कार्ड की मदद से खतौनी में नाम बदलना या सुधारना पहले से आसान हो गया है. इससे PM Kisan की किस्त पाने में होने वाली देरी भी दूर होगी और अन्य योजनाओं का लाभ लेने में किसानों को बड़ी मदद मिलेगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Nov, 2025 | 07:30 PM

Uttar Pradesh farmers : जरा सोचिए.. खेत में खड़े किसान अपनी फसल को देखकर खुश हैं. लेकिन सरकारी योजना का फॉर्म भरते वक्त फिर वही पुरानी दिक्कत आती है. खेत की खतौनी में नाम एक और आधार कार्ड में नाम थोड़ा अलग है. जिसके कारण सरकारी योजनाओं का पैसा अटक जाता है. पर अब ऐसे लाखों किसानों की यह परेशानी खत्म होने वाली है. क्योंकि यूपी सरकार ने एक ऐसा कदम उठा दिया है, जो करोड़ों किसानों को सीधी राहत देगा.

खतौनी में अब होगा नाम का आसान बदलाव

उत्तर प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि किसान अब अपनी खतौनी में दर्ज नाम को आधार कार्ड  के अनुसार संशोधित करा सकेंगे. राजस्व परिषद ने इस व्यवस्था को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, लगभग 3 करोड़ किसानों के नाम आधार और खतौनी में अलग-अलग लिखे होने से भारी दिक्कतें सामने आ रही थीं. कई सरकारी योजनाओं में खतौनी जरूरी होती है, लेकिन नाम न मिलने पर किसान लाभ से वंचित रह जाते थे. सबसे ज्यादा परेशानी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में आ रही थी.

सम्मान निधि में नाम न मिलने से 18 लाख किसान हुए वंचित

उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, प्रदेश में 2 करोड़ 34 लाख किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि  (PM Kisan) मिलनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल 2 करोड़ 15 लाख किसानों को ही पैसा भेजा गया. यानी 18,90,373 किसानों के खाते में किस्त नहीं पहुंच सकी. इसके पीछे एक बड़ी वजह यह पाई गई कि ई-KYC पूरी नहीं हो पाई क्योंकि आधार कार्ड और खतौनी में नाम मिलान नहीं था. अब जब खतौनी में नाम आधार के अनुसार बदला जा सकेगा, तो किसानों की यह समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी.

जमीन का पूरा रिकॉर्ड एक जगह दिखेगा, बढ़ेगी पारदर्शिता

नए सिस्टम के बाद यह भी पता चल सकेगा कि किसी व्यक्ति के नाम पूरी यूपी में कुल कितनी जमीन है. फिलहाल यह रिकॉर्ड सिर्फ तहसील स्तर पर होता है, जिससे पूरा डेटा सामने नहीं आता. यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सीलिंग एक्ट के तहत-

  • सिंचित जमीन की अधिकतम सीमा: 18 एकड़
  • असिंचित जमीन की अधिकतम सीमा: 27 एकड़
  • बाग/ऊसर भूमि: 45 एकड़

इससे ज्यादा जमीन होने पर सरकार में निहित किए जाने का प्रावधान है. अब आधार से लिंक होने पर जमीन का सही-सही रिकॉर्ड उपलब्ध होगा.

बदलाव से पहले राजस्व कर्मी की रिपोर्ट अनिवार्य

सरकार ने यह भी साफ किया है कि खतौनी में नाम बदलने से पहले लेखपाल या अन्य राजस्व कर्मी की रिपोर्ट जरूरी होगी. यानी यह सुनिश्चित किया जाएगा कि- खतौनी और आधार  का नाम वास्तव में एक ही व्यक्ति का है. कोई गलत फायदा न उठा सके, राजस्व परिषद का कहना है कि यह सुविधा अगले दो महीनों के भीतर शुरू कर दी जाएगी.

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Published: 22 Nov, 2025 | 07:30 PM
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