किसानों को नहीं मिल रहा गाजर का भाव, 4 रुपये में खरीदकर 20 रुपये में बेच रहे व्यापारी.. युवा किसान की जुबानी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गाजर की खेती करने वाले 32 साल के युवा किसान राजेश कुमार ने किसान इंडिया से बातचीत में कहा कि वह कई साल से गाजर की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2 एकड़ में इस बार गाजर की खेती की है. लेकिन, उन्हें गाजर का सही भाव नहीं मिल पा रहा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 5 Jan, 2026 | 01:15 PM

Carrot Farmers Price Issue: गाजर की फसल में सर्दियों में ध्यान रखने योग्य बातों में सबसे महत्वपूर्ण है मिट्टी की नमी और तापमान पर खास ख्याल रखना, क्योंकि ठंड के मौसम में मिट्टी देर से गर्म होती है और नमी बनी रहती है, इसलिए जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए, अचानक ठंड या पाले से फसल को बचाने के लिए हल्की मल्चिंग या ओट्स/घास की परत देना लाभकारी रहता है ताकि मिट्टी की गर्माहट और नमी दोनों नियंत्रित रहें, साथ ही समय-समय पर खेत को खरपतवार मुक्त रखना और धूप का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए खेत को खुला रखना चाहिए ताकि पौधों को पर्याप्त धूप मिले.

राजेश कुमार को 4 रुपये में बेचनी पड़ रही गाजर

उत्तर प्रदेश के कानपुर में गाजर की खेती करने वाले 32 साल के युवा किसान राजेश कुमार ने किसान इंडिया से बातचीत में कहा कि वह कई साल से गाजर की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि 2 एकड़ में इस बार गाजर की खेती की है और वर्तमान में गाजर की खुदाई चल रही है और वह अपनी उपज की बिक्री कर रहे हैं. लेकिन, उन्हें गाजर का सही भाव नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने कहा कि उन्हें व्यापारियों को 4 रुपये प्रति किलो में गाजर बेचनी पड़ रही है. जबकि, व्यापारी वही गाजर खुले बाजार में 20 रुपये प्रति किलो तक के भाव में ग्राहकों को बेचते हैं.

10 किलोमीटर के दायरे में सरकारी खरीद केंद्र बनाए जाएं

उन्होंने कहा कि नजदीक में मंडी नहीं होने की वजह से स्थानीय किसानों को व्यापारियों को अपनी उपज बेचनी पड़ती है. उन्होंने कहा कि गाजर समेत अन्य सब्जियों की खरीद के लिए 5 से 10 किलोमीटर की दूरी पर सरकारी खरीद केंद्र बनाए जाने चाहिए. उनके यहां से कानपुर की चकरपुर सब्जी एवं फल मंडी 35 किलोमीटर दूर है. ऐसे में अगर वह मंडी अपनी उपज ले जाएं तो भाड़ा में ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा और समय भी ज्यादा लगेगा. किसानों की इस मजबूरी का व्यापारी फायदा उठाते हैं और किसान की उपज को औने-पौने दाम पर खरीदते हैं. कम दाम पर फसल बेचना किसानों की मजबूरी है.

दिल्ली के बाजारों में 25 रुपये तक में बिक रही गाजर

दिल्ली के बाजारों में गाजर का भाव मौसमी और आपूर्ति मांग के अनुसार बदलता रहता है. पिछले सीज़न के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली एपीएमसी मंडी में गाजर का औसत भाव लगभग 900 रुपये प्रति क्विंटल रहा यानी 90 रुपये प्रति किलो. इस सीजन दिल्ली में 15 रुपये से 25 रुपये प्रति किलो तक गाजर का भाव चल रहा है. तरह गाजियाबाद, नोएडा समेत अन्य बड़े शहरों में भी गाजर का 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है. हालांकि, आवक बढ़ने पर अगले कुछ सप्ताह में भाव में गिरावट देखी जा सकती है.

गाजर फसल की खुदाई के वक्त इन बातों का रखें ध्यान

युवा किसान राजेश कुमार ने कहा कि गाजर की खुदाई (हार्वेस्ट) के वक्त किसान को यह ध्यान रखना चाहिए कि जब जड़ें आकार, मोटाई और रंग सभी उन्नत अवस्था में बने रहें. खुदाई से पहले खेत की मिट्टी में भरपूर नमी होना जरूरी है ताकि धीरे-धीरे जड़ों को निकाला जा सके और वे टूटें नहीं. इसके अलावा खुदाई के बाद गाजर को धूप में थोड़ी देर सुखा कर मिट्टी हटानी चाहिए और फिर बाजार या भंडारण के लिए पैकिंग करनी चाहिए.

carrot farmer rajesh kumar

राजेश कुमार के खेत में परिवार गाजर की खुदाई करके बिक्री के लिए साफ-सफाई कार्य में लगा है.

गाजर के लिए खतरनाक हैं ये कीट, ऐसे करें बचाव

किसान ने कहा कि गाजर फसल में लगने वाले प्रमुख कीटों से किसानों को हर बार नुकसान होता है. इसमें पत्ता फड़कने वाला कीट (leaf miner), गोभी कीट (cutworm) और गाजर पर हानिकारक एफिड और व्हाइटफ्लाई का भी अटैक होता है. इनसे बचने के लिए खेत में नियमित रूप से निगरानी करते रहें, प्राकृतिक दुश्मनों जैसे लेडीबग या नेचुरल ट्रैप का किसान इस्तेमाल करें, नीम या जैविक कीटनाशकों का छिड़काव जरूरत के अनुसार सुबह-शाम किया जा सकता है और फसल चक्र अपनाकर कीटों के खतरे को कम किया जा सकता है.

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Published: 5 Jan, 2026 | 12:55 PM

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