Mandi Bhav: 3 साल में सबसे ज्यादा अभी सस्ते हैं प्याज सहित ये अनाज, जानें लासलगांव मंडी का लेटेस्ट रेट

पिछले तीन साल में प्याज, अरहर, मूंग, उरद समेत कई अनाजों की कीमतें न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं. बढ़ते आयात और कम निर्यात के कारण दालों की कीमतें MSP से 10-20 फीसदी कम हैं. सरकारी भंडारण बिक्री से प्याज की कीमतों पर दबाव बना है, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है.

नोएडा | Updated On: 27 Sep, 2025 | 10:23 PM

Onion Mandi Rate: अरहर, मूंग, उरद जैसे रोजमर्रा के जरूरी सामान की कीमतें पिछले तीन सालों में सबसे नीचे आ गई हैं. साथ ही नासिक के लासलगांव बाजार में प्याज की कीमतें भी पिछले तीन सालों में सबसे कम हैं. हर्टीकल्चर एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के उपाध्यक्ष विकास सिंह का कहना है कि बांग्लादेश हमारे प्याज का सबसे बड़ा खरीदार है, लेकिन पिछले छह महीनों में बांग्लादेश को निर्यात बहुत कम हुआ है. उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियां नैफेड और एनसीसीएफ ने प्याज की कीमतें स्थिर करने के लिए प्याज खरीदी थी. लेकिन अब त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग को पूरा करने के लिए अपने भंडारण से प्याज बाजार में भेज रही हैं. इस वजह से भी प्याज की कीमतों पर दबाव बढ़ा है. वहीं,  26 सितंबर यानी शुक्रवार को लासलगांव मंडी में प्याज का मैक्सिमम रेट 1535 रुपये और मिनिमम रेट 500 रुपये क्विंटल रहा. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है.

द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीली मटर  की कीमतें छह साल में सबसे कम हैं. इसके अलावा, सोयाबीन और कपास की कीमतें भी दो साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं. मंडी विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट दालों और खाना पकाने वाले तेलों के आयात में बढ़ोतरी और प्याज के कम निर्यात की वजह से आई है, जिससे कीमतें कई सालों के सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं. वहीं, iGrain इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि पीली मटर के भारी आयात ने भारत में लगभग सभी स्थानीय दालों की कीमतें दबा दी हैं. उन्होंने कहा कि कई देशों ने भारत को रिकॉर्ड मात्रा में दालें सप्लाई करनी शुरू कर दी हैं.

सोयाबीन की कीमतें अभी एमएसपी से हैं कम

ऑस्ट्रेलिया ने पिछले साल भारत को बड़े स्तर पर चना सप्लाई की थी और इस साल वह मसूर की रिकॉर्ड फसल लेकर आया है. किसानों के लिए चिंता की बात यह है कि कई मुख्य खरीफ फसलों जैसे दालें, कपास और सोयाबीन की कीमतें अभी एमएसपी से 10 फीसदी से 20 फीसदी तक कम हैं. अफ्रीका से अरहर की भारी मात्रा में भारत के लिए सप्लाई हो रही है, जबकि म्यांमार ने उरद की अच्छा निर्यात किया है.

इस साल 80,000 टन से ज्यादा उरद उत्पादन का अनुमान

इसी तरह ब्राजील ने भी हाल ही में भारत के लिए उरद की खेती  शुरू की है और वहां इस साल 80,000 टन से ज्यादा उरद की फसल होने का अनुमान है. महाराष्ट्र के लातूर के दाल प्रोसेसर नितिन कलांत्रे ने कहा कि ज्यादा बारिश की वजह से खराब गुणवत्ता वाली फसलों की मात्रा बढ़ेगी, जिससे कीमतें कम होती हैं. इससे अच्छी और खराब गुणवत्ता वाली फसलों के दामों के बीच अंतर बढ़ जाएगा.

 

Published: 27 Sep, 2025 | 03:46 PM

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