हिमाचल प्रदेश सरकार ने 2026 के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) लागू करने को मंजूरी दे दी है. इस योजना के तहत सरकार किसानों से प्रोसेसिंग ग्रेड आम, खट्टे फल और सी-ग्रेड सेब तय कीमत पर खरीदेगी. इसका मकसद फल उत्पादकों को उनकी उपज का उचित दाम दिलाना और बाजार में कीमत गिरने की स्थिति में उन्हें आर्थिक सहारा देना है. वहीं, बागवानी विभाग ने कहा है कि फलों की खरीद एचपी हॉर्टिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केटिंग एंड प्रोसेसिंग कॉरपोरेशन (HPMC) के माध्यम से की जाएगी. जरूरत पड़ने पर सेब की खरीद में हिमफेड (HIMFED) की भी मदद ली जाएग.
मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत हिमाचल प्रदेश में 31 अगस्त 2026 तक प्रोसेसिंग ग्रेड के सीडलिंग, ग्राफ्टेड और कच्चे अचारी किस्म के आम किसानों से 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे जाएंगे. फलों की खरीद और ढुलाई के लिए 20 किलोग्राम क्षमता वाले दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले प्लास्टिक क्रेट का उपयोग किया जाएगा. किसानों की सुविधा के लिए राज्यभर में 42 फल संग्रह केंद्र (फ्रूट कलेक्शन सेंटर) बनाए गए हैं, जहां वे अपनी आम की फसल बेच सकेंगे.
गलगल की खरीद 10 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर होगी
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत अन्य फलों की खरीद की दरें भी तय कर दी हैं. योजना के अनुसार किन्नू, माल्टा और संतरा की प्रोसेसिंग ग्रेड उपज 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जाएगी, जबकि गलगल की खरीद 10 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर होगी. इन फलों की खरीद 21 नवंबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक की जाएगी.
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सेब की खरीद 35 किलोग्राम की जूट की बोरियों में होगी
सरकार ने फलों की पैकिंग के लिए भी मानक तय किए हैं. किन्नू, माल्टा और संतरा 15 किलोग्राम क्षमता वाले पुन: उपयोग योग्य प्लास्टिक क्रेट में खरीदे जाएंगे, जबकि गलगल की खरीद 40 किलोग्राम की जूट (गन्नी) की बोरियों में होगी. इसके अलावा, सरकार ने सी-ग्रेड सेब की खरीद का भी फैसला किया है. 1 अगस्त से 31 अक्टूबर 2026 तक अधिकतम 1.50 लाख मीट्रिक टन सी-ग्रेड सेब किसानों से 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदे जाएंगे. सेब की खरीद 35 किलोग्राम की जूट की बोरियों में होगी. हालांकि, जहां संभव होगा, वहां फलों की ढुलाई और सुरक्षित रखरखाव के लिए 16 किलोग्राम क्षमता वाले पुन: उपयोग योग्य प्लास्टिक क्रेट को प्राथमिकता दी जाएगी.
योजना के तहत सी-ग्रेड सेबों की खरीद की जाएगी
मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत केवल उन्हीं सी-ग्रेड सेबों की खरीद की जाएगी, जिनका आकार 51 मिमी से अधिक होगा और जो सरकार द्वारा तय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरेंगे. सरकार ने साफ किया है कि सड़े-गले, तेज हवा से गिरे हुए, पक्षियों द्वारा क्षतिग्रस्त, गंभीर बीमारी से प्रभावित, कीटग्रस्त, सिकुड़े हुए या एथेफोन (Ethephon) रसायन से पकाए गए फल इस योजना के तहत नहीं खरीदे जाएंगे. बागवानी विभाग के प्रवक्ता ने कहा है कि इस योजना का लाभ केवल वही किसान उठा सकेंगे, जिन्होंने एचपीएमसी के एमआईएस पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है. पंजीकृत किसान ही सरकार को अपनी उपज बेच सकेंगे.