प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेन्द्र देव ने कहा कि किसानों की आय में हाल के वर्षों में अच्छी बढ़त हुई. इसकी वजह कई फैक्टर्स का काम करलना है, जिनमें किसानों का खेती के साथ ही पशुपालन और मछली पालन करना, एक खेत में कई फसलें उगाना और पूरा उत्पादन चक्र बनाना. वहीं, सरकार के मोर्चे से एफपीओ जैसी पहल से किसानों को जोड़ना और उत्पादन बिक्री के लिए बाजार और सही कीमत उपलब्ध कराना है. वहीं, सरकार खुद फसल बीमा, पीएम किसान समेत कई तरह से किसानों को आर्थिक मदद दे रही है. यही वजह है कि कृषि क्षेत्र में सालाना लगभग साढ़े चार फीसदी की वृद्धि हुई है. हालांकि, कृषि नीतियों को मौजूदा वैश्विक चुनौतियों को ध्यान रखना जरूरी है.
तेजी से बढ़ रही भारत की कृषि विकास दर
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन एस महेन्द्र देव ने इंटरनेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले दशक में देश की कृषि क्षेत्र की औसत वृद्धि दर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे अधिक है. उन्होंने कहा कि पिछले लगभग एक दशक में भारत के कृषि क्षेत्र की औसत वृद्धि दर करीब 4.5 फीसदी रही है, जो दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में संभवतः सबसे अधिक है. देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि की हिस्सेदारी लगभग 17 प्रतिशत है, जबकि रोजगार में इसकी हिस्सेदारी 43 फीसदी है.
किसान की बढ़ाने वाले फैक्टर्स पर सरकार का ज्यादा जोर
कृषि विकास दर में तेज बढ़त से किसानों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का ध्यान अब केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने पर भी केंद्रित है. उन्होंने कहा कि कृषि में विविधीकरण, उच्च मूल्य वाली फसलों, पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने से किसानों की आय में और वृद्धि हो सकती है.
- PM Kisan Yojana के लाभार्थियों को एडवांस में मिलेंगे 2000 रुपये, जानिए किस्त जारी करने के लिए मंत्रालय ने क्या कहा
- हल्दी, करौंदा की खेती पर सरकार दे रही 10 हजार रुपये, स्प्रिंकलर लगवाने पर 90 फीसदी सब्सिडी पाएं किसान
- यमुना और हिंडन की बाढ़ में अभी भी डूबे दर्जनों गांव, गन्ना में बीमारी लग रही.. गेहूं बुवाई में देरी की चिंता
ज्यादा मूल्य वाली फसलों, पशुपालन और मछली पालन, फसल कटाई के बाद की व्यवस्था और मार्केटिंग सिस्टम को मजबूत करने के साथ ही फूड व एग्रो-प्रोसेसिंग पर ज्यादा जोर देने से किसानों की आय में बढ़त हुई है. हालांकि, सरकार का इन सेक्टर को और बेहतर करने पर जोर ताकि किसान की आय और रोजगार दोनों को और तेजी से बढ़ाया जा सके.
86 फीसदी छोटे और सीमांत किसानों के लिए नई पहलें कारगर
उन्होंने कहा कि हमारे 86 फीसदी किसान छोटे और सीमांत हैं. इसलिए FPO और सहकारी समितियों जैसी संस्थाएं कोई वैकल्पिक चीज नहीं हैं, बल्कि उन्हें बेहतर दाम और बाजार दिलाने में मदद करने के लिए ये बहुत जरूरी हैं. इनका सकारात्मक असर भी देखा जा रहा है. वहीं, सरकार फसल बीमा योजना, पीएम किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं के जरिए किसानों के नुकसान की भरपाई के साथ नकद राशि देकर आर्थिक रूप से मजबूत कर रही है.
कृषि नीतियों को मौजूदा वैश्विक चुनौतियों को ध्यान रखना जरूरी
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन प्रो. एस. महेंद्र देव ने कहा कि हरित क्रांति के बाद भारत ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. देश खाद्यान्न की कमी वाले राष्ट्र से दुनिया के प्रमुख अनाज, फल, सब्जी, दूध और मत्स्य उत्पादक देशों में शामिल हो गया है. उन्होंने कहा कि कृषि नीतियों को मौजूदा वैश्विक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार करना होगा. कृत्रिम मेधा यानी एआई का उपयोग आपूर्ति बढ़ाने में सहायक हो सकता है. इसी प्रकार ब्लॉकचेन आधारित प्रणालियां विशेष रूप से उच्च मूल्य वाली फसलों और कृषि निर्यात के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं.