Punjab News: पंजाब में इस साल गेहूं की पैदावार में गिरावट आई है. इसका खुलासा पंजाब के कृषि विभाग द्वारा किए गए क्रॉप-कटिंग प्रयोगों से हुआ है. कृषि विभाग के मुताबिक, इस साल गेहूं की पैदावार पिछले साल की तुलना में औसतन 2 क्विंटल प्रति एकड़ कम रही है. इसका मतलब है कि किसानों को प्रति एकड़ सीधे तौर पर लगभग 5,000 रुपये से ज्यादा का नुकसान हो रहा है. इस साल राज्य में करीब 86 लाख एकड़ में गेहूं की खेती हुई है और कुल उत्पादन लगभग 182 लाख टन होने का अनुमान है. सरकार ने 1 अप्रैल से 1,872 मंडियों में गेहूं की खरीद शुरू कर दी है और कुल 122 लाख टन गेहूं खरीदने की व्यवस्था है.
पिछले साल राज्य में कुल 188 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था, जिसमें से 119 लाख टन गेहूं राज्य सरकार की एजेंसियों ने केंद्र सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लिए खरीदा था. इस बार मार्च के अंत और अप्रैल के पहले हफ्ते में मौसम खराब रहा. बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की वजह से फसल को नुकसान हुआ, खासकर जब गेहूं पकने की आखिरी अवस्था में था. इससे कई जगह फसल गिर गई और दानों को भी नुकसान पहुंचा. कृषि विभाग ने अब तक 850 क्रॉप-कटिंग प्रयोगों की रिपोर्ट तैयार की है. इन रिपोर्ट्स के अनुसार इस साल औसत पैदावार 20 क्विंटल प्रति एकड़ रही है, जबकि पिछले साल यह 22 क्विंटल प्रति एकड़ थी.
प्रति एकड़ सबसे कम पैदावार दर्ज की गई
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पठानकोट जिले में इस साल प्रति एकड़ सबसे कम पैदावार दर्ज की गई है, जो 16 क्विंटल रही. इसके बाद होशियारपुर और मोहाली में क्रमशः 18 और 18.5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन हुआ है. इन जिलों में पहले भी पैदावार कम थी, लेकिन इस साल इसमें और गिरावट देखने को मिली है. इस सीजन में सबसे ज्यादा नुकसान फरीदकोट जिले में हुआ है, जहां पैदावार 2025 के 23 क्विंटल प्रति एकड़ से घटकर 20 क्विंटल रह गई है, यानी 3 क्विंटल की कमी आई है.
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पैदावार 22.5 क्विंटल से घटकर 20 क्विंटल हो गई
इसी तरह अमृतसर और बरनाला में भी पैदावार 22.5 क्विंटल से घटकर 20 क्विंटल हो गई है, जिससे प्रति एकड़ 2.5 क्विंटल का नुकसान हुआ है. बठिंडा, कपूरथला और मानसा जिलों में भी पिछले साल की तुलना में करीब 2 क्विंटल प्रति एकड़ की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं दूसरी तरफ जालंधर जिले में थोड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है, जहां पैदावार 2025 के 21.5 क्विंटल प्रति एकड़ से बढ़कर इस साल 22 क्विंटल प्रति एकड़ हो गई है.
मुआवजा देने की कोई व्यवस्था नहीं
राज्य के कृषि विभाग के एक अधिकारी के अनुसार, फिलहाल किसानों को पैदावार में हुई कमी के कारण किसी तरह का मुआवजा देने की कोई व्यवस्था नहीं है. हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि इस बार जो फसल पहले बोई गई थी, उसे मार्च में अचानक तापमान बढ़ने की वजह से नुकसान हुआ, क्योंकि उस समय फसल पकने की स्थिति में थी. अधिकारी का कहना है कि आगे चलकर जो क्रॉप-कटिंग टेस्ट किए जाएंगे, उनमें पैदावार थोड़ी बेहतर भी निकल सकती है.
गेहूं खरीद मानकों में ढील
दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 17 अप्रैल को पंजाब में गेहूं की खरीद के नियमों में ढील देने का फैसला किया है. इसके तहत अब गेहूं में चमक की कमी 70 फीसदी तक स्वीकार की जाएगी, जबकि पहले यह सीमा 0 फीसदी थी. इसी तरह सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 15 फीसदी कर दी गई है, जो पहले 6 फीसदी थी. इसके अलावा खराब और हल्के खराब दानों की सीमा भी 6 फीसदी कर दी गई है, जो पहले केवल 2 फीसदी थी.