ईरान-इजराइल तनाव से भारतीय कॉफी निर्यात प्रभावित, कीमतों में आई गिरावट

कॉफी निर्यात में आई परेशानी की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बनी स्थिति को माना जा रहा है. यह समुद्री मार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. मौजूदा हालात के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.

नई दिल्ली | Updated On: 16 Mar, 2026 | 08:41 AM

Indian coffee exports: दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के कृषि कारोबार पर भी दिखने लगा है. अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर भारत की कॉफी इंडस्ट्री पर पड़ रहा है. खासकर कर्नाटक के मलनाड क्षेत्र में कॉफी उत्पादक किसान और व्यापारी इन दिनों बाजार को लेकर असमंजस में हैं. निर्यात में आ रही दिक्कतों और परिवहन लागत बढ़ने के कारण कॉफी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.

मलनाड के कॉफी किसानों में बेचैनी

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, कर्नाटक का मलनाड क्षेत्र, जिसमें चिक्कमगलूरु, हासन और कोडागु जिले शामिल हैं, भारत में कॉफी उत्पादन का एक बड़ा केंद्र माना जाता है. यहां बड़ी संख्या में किसान कॉफी की खेती पर निर्भर हैं. इस समय कई किसान अपनी तैयार फसल बेचने के लिए तैयार हैं, लेकिन बाजार की स्थिति साफ न होने के कारण व्यापारियों की खरीदारी धीमी पड़ गई है.

कॉफी व्यापार से जुड़े लोगों का कहना है कि निर्यात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, इसलिए कई व्यापारी अभी बड़े स्तर पर खरीद करने से बच रहे हैं. इससे किसानों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि वे अपनी उपज अभी बेचें या बेहतर कीमत मिलने का इंतजार करें.

समुद्री मार्ग में रुकावट से बढ़ी मुश्किल

कॉफी निर्यात में आई परेशानी की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बनी स्थिति को माना जा रहा है. यह समुद्री मार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. मौजूदा हालात के कारण इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है.

निर्यातकों का कहना है कि अब भारतीय कॉफी को यूरोप भेजने के लिए जहाजों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है. जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होकर केप ऑफ गुड होप के रास्ते जाना पड़ रहा है. इससे कॉफी की खेप यूरोप पहुंचने में करीब 10 से 12 दिन ज्यादा समय लग रहा है और शिपिंग लागत भी काफी बढ़ गई है. इससे निर्यातकों की लागत बढ़ रही है और बाजार में अनिश्चितता भी बढ़ गई है.

यूएई बाजार पर भी असर की आशंका

भारतीय कॉफी के प्रमुख खरीदार देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी शामिल है, जो भारत की कॉफी के बड़े निर्यात बाजारों में पांचवें स्थान पर आता है. व्यापारियों को आशंका है कि समुद्री मार्गों में आई रुकावटों का असर इस बाजार तक आपूर्ति पर भी पड़ सकता है.

कीमतों में हल्की गिरावट

मलनाड क्षेत्र के व्यापारियों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में कॉफी की कीमतों में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है. एक सप्ताह पहले रोबस्टा कॉफी बीन्स की कीमत लगभग 370 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी, लेकिन अब यह घटकर करीब 350 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है.

कॉफी व्यापारी सुरेश टीओआई को बताते हैं कि बाजार में कॉफी की मांग अभी भी बनी हुई है, लेकिन परिवहन में आ रही दिक्कतों और बढ़ती लागत के कारण कीमतों पर दबाव बना हुआ है. उनके अनुसार युद्ध और वैश्विक बाजार की स्थिति ने कॉफी व्यापार को अस्थिर बना दिया है.

ब्राजील की फसल का भी असर

कॉफी की कीमतों में गिरावट का एक कारण वैश्विक बाजार की स्थिति भी है. खबर है कि ब्राजील में इस बार अरबिका कॉफी की बड़ी फसल होने की संभावना है. ब्राजील दुनिया का सबसे बड़ा कॉफी उत्पादक देश है, इसलिए वहां उत्पादन बढ़ने की खबर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर असर पड़ता है.

किसान और व्यापारी दोनों इंतजार में

मलनाड क्षेत्र में फिलहाल स्थिति ऐसी है कि कुछ किसान अपनी कॉफी तुरंत बेच रहे हैं, जबकि कुछ बेहतर कीमत की उम्मीद में इंतजार कर रहे हैं. दूसरी ओर व्यापारी भी पूरी तरह से निश्चित नहीं हैं कि आने वाले दिनों में बाजार किस दिशा में जाएगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो इसका असर भारत के कॉफी निर्यात और किसानों की आय पर भी पड़ सकता है. फिलहाल किसान और व्यापारी दोनों ही अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही बाजार में स्थिरता लौटेगी.

Published: 16 Mar, 2026 | 09:00 AM

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