Mango export: देश में आम का सीजन शुरू होते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है, लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है. किसानों और व्यापारियों के सामने नई मुश्किल खड़ी हो गई है. पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का सीधा असर आम के निर्यात पर पड़ा है. खासकर कर्नाटक के कोलार, रामनगर और चिक्कबल्लापुर के किसान, जिन्हें हर साल यूएई से पहले ही ऑर्डर मिल जाते थे, इस बार अनिश्चितता से जूझ रहे हैं. ऐसे में अब उन्हें नए बाजार तलाशने और देश के अंदर ही ज्यादा बिक्री करने पर ध्यान देना पड़ रहा है.
निर्यात पर असर, इस बार नहीं मिले एडवांस ऑर्डर
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर आम के सीजन से पहले ही विदेशों, खासकर यूएई से एडवांस ऑर्डर आ जाते थे. इससे किसानों को यह भरोसा रहता था कि उनका माल आसानी से बिक जाएगा. लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं. पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से व्यापार प्रभावित हुआ है और कई पुराने खरीदार सामने ही नहीं आए. कुछ व्यापारियों का कहना है कि जो खरीदार आए भी, उन्होंने ऑर्डर पक्का नहीं किया या फिर भुगतान में देरी की.
अब नए बाजारों की तलाश में किसान
चिक्कबल्लापुर के किसान महांतेश पी. बताते हैं कि उन्होंने इस बार खुद एक्सपोर्टर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया ताकि बिचौलियों से बच सकें. लेकिन हालात ऐसे बन गए कि पारंपरिक निर्यात का सिस्टम ही कमजोर पड़ गया. अब किसान और व्यापारी यूके और कनाडा जैसे नए बाजारों की ओर देख रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है.
फसल अच्छी, लेकिन दाम बढ़ने की उम्मीद कम
पिछले साल जनवरी में हुई बेमौसम बारिश से आम की फसल को नुकसान हुआ था, लेकिन इस बार उत्पादन बेहतर है. इससे बाजार में सप्लाई अच्छी रहने की उम्मीद है. हालांकि ज्यादा उत्पादन होने की वजह से कीमतों में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है. जानकारों का कहना है कि इस बार आम के दाम सामान्य ही रह सकते हैं.
बाजार में आम आना शुरू, लेकिन पूरी सप्लाई अभी बाकी
बेंगलुरु के बाजारों में आम की आवक शुरू हो गई है, लेकिन अभी पूरी तरह सप्लाई नहीं पहुंची है. व्यापारियों के अनुसार अगले 10 दिनों में आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक से कई किस्मों के आम बाजार में आने लगेंगे. फिलहाल मांग और सप्लाई दोनों ही कम हैं, इसलिए बाजार धीमा चल रहा है.
व्यापार में अनिश्चितता, बढ़ी एडवांस की मांग
इस बार बाजार में अनिश्चितता ज्यादा है. व्यापारियों का कहना है कि खरीदार अब 50 फीसदी से ज्यादा एडवांस कैश मांग रहे हैं. इससे छोटे व्यापारियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है. कई पुराने ग्राहक इस बार नहीं आए और जो आए, उन्होंने भी पूरी तरह भरोसा नहीं दिखाया.
आम की कीमतें अभी स्थिर
बेंगलुरु के के.आर. मार्केट के व्यापारी श्रीधर एम. के मुताबिक, अभी आम के दाम स्थिर हैं. अल्फांसो 280 से 300 रुपये प्रति किलो, रासपुरी और सिंधुरा करीब 250 रुपये प्रति किलो और बंगनपल्ली 180 से 200 रुपये प्रति किलो बिक रहा है. हालांकि जैसे-जैसे बाजार में आम की आवक बढ़ेगी, कीमतें थोड़ा नीचे आ सकती हैं, जिससे किसानों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है.
पल्प इंडस्ट्री भी दबाव में
सीजन के अंत में ज्यादा पके आम आमतौर पर पल्प बनाने वाली फैक्ट्रियों में भेजे जाते हैं, खासकर तमिलनाडु में. लेकिन इस बार ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने और मांग साफ न होने के कारण यह विकल्प भी आसान नहीं रह गया है. व्यापारी सेल्वन कुमार एम. का कहना है कि फिलहाल सभी लोग घरेलू बाजार से ही बेहतर कमाई करने की कोशिश कर रहे हैं.
बदल रहा है आम का कारोबार
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बात साफ कर दी है कि सिर्फ एक-दो विदेशी बाजारों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. अब किसान और व्यापारी नए देशों के साथ-साथ भारत के घरेलू बाजार को भी मजबूत बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों का असर कम हो सके.